'कई सकारात्मक खबरें मीडिया में सुर्खियां नहीं बनती'

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: 'न्यूज एक्सप्रेस' वर्कशाप में चंद्रभान प्रसाद का लेक्चर : मशहूर दलित चिंतक और विचारक चंद्रभान प्रसाद ने कहा है कि भारत में दलितों के हालात में तेजी से सुधार हो रहा है और मीडिया को उन बदलावों को भी लोगों के सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलितों के हालात में इस तब्दीली के पीछे उनका गांवों से शहरों की ओर होता विस्थापन एक अहम वजह है। समाचार चैनल न्यूज एक्सप्रेस के मंथन कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि दलितों के बेहतर होते हालात की वजह उनकी आर्थिक प्रगति है।

चंद्रभान प्रसाद ने कहा कि कुछ दलित हस्तियां ऐसी भी हुई हैं जिन्होंने समाज की बेहतरी के लिए कई काम किए लेकिन मीडिया में उनके काम को उजागर नहीं किया गया। अपने एक अनुभव को पत्रकारों से बांटते हुए उन्होंने कुछ दिन पहले दलित उद्योगपतियों से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस मौके पर कई उद्योगपतियों ने अपने हालात साफ करते हुए कहा कि वे अपनी मेहनत से इस मुकाम पर पहुंचे हैं और वो भी बिना किसी सरकारी मदद के। यही नहीं इसके साथ ही उन्होंने कई बेरोज़गारों को रोज़गार भी दिया और सरकार को टैक्स भी दे रहे हैं। उन्होंने चौंकाने वाली बात ये कही कि उन्हें अपने लिये सरकार से कुछ नहीं चाहिये बल्कि अगर सरकार को उनकी मदद या मशवरे की कभी ज़रूरत पड़े तो वो सरकार के साथ हैं। चंद्रभान प्रसाद ने आक्षेप लगाया कि ये सारी सकारात्मक बातें और खबरें कभी मीडिया में सुर्खियां नहीं बनती।

उन्होंने कहा कि दिक्कत की बात तो ये है कि दलितों को हमेशा वजीफा या बीपीएल कार्ड मांगने वाला ही समझा जाता रहा है। उत्तर प्रदेश में दलितों पर हो रही अत्याचार की घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के अश्वेत लोगों को भी उनके राष्ट्रपति बनने से कोई खास लाभ की उम्मीद नहीं रही। ठीक वैसा ही मायावती के साथ भी है। लिहाजा हमें उनसे भी ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दलित राजनीति दरअसल पहचान की राजनीति है लेकिन ये एक दौर है धीरे-धीरे इसमें तब्दीली ज़रूर आएगी।

पत्रकारों को सलाह देते हुए चंद्रभान प्रसाद ने कहा कि बेहतर हो कि अपवाद के रूप में सामने आई दलित समाज से जुड़ी घटनाओं को नज़ीर न बनाया जाए। इसके बदले दलित समाज और समाज की मुख्यधारा में उनके अहम किरदार को लोगों तक पहुंचाया जाए। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि करीब ढाई दशक तक जेल में रहने के बाद जब वे देश के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अश्वेतों पर हुए अत्याचार को इतिहास करार दिया और समाज के सभी वर्गों के विकास को अपना एजेंडा बताया। प्रेस विज्ञप्ति


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