''डाक्‍टरी पेशे को बदनाम करने से बचें न्‍यूज चैनल''

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: न्‍यूज एक्‍सप्रेस के 'मंथन' में डा. केके अग्रवाल ने दी सलाह : मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केके अग्रवाल ने माना है कि मेडिकल के क्षेत्र को बदनाम करने के पीछे सबसे बड़ा हाथ दवा कंपनियों का है। इन्हीं दवा कंपनियों की राजनीति डॉक्टरी पेशे को भी बदनाम कर रही है. ये कंपनियां अपने प्रोडक्ट को प्रेस्क्राइब करने के लिए डाक्टरों को मोटा लालच देती हैं। देश में सफेद कोट पहने कई ऐसे काले दलाल अरबों की संपत्ति लिए बैठे हैं।

न्यूज चैनल न्यूज एक्सप्रेस के मंथन कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने बेबाकी से कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में भी उतनी ही सियासत हावी है, जितनी राजनीतिक पार्टियों में। इस क्षेत्र में राजनीति, सत्ता और पैसे पर कब्जे की है। डॉक्टरों को मिलने वाले पुरस्कारों पर राजनीति के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि पद्मश्री जैसे अवार्ड जुगत से नहीं मिलते, पर वीवीआईपी का इलाज करने वाले डॉक्टर को पुरस्कार मिल ही जाता है। वीआईपी देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों को अपने इलाज के लिए चुनते हैं। इसलिए ऐसे डॉक्टर की काबिलियत पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

मंथन

चिकित्सा में फैले भ्रष्टाचार के बारे में उन्होंने कहा कि दूसरे पेशे की तरह यहां भी भ्रष्टाचार हावी है. बावजूद इसके नब्बे फीसदी डॉक्टर्स चाहते हैं कि लोगों को बेहतर इलाज मिले. महज कुछ डॉक्टरों की कारगुजारियों की वजह से पूरे चिकित्सा क्षेत्र को बदनाम करना ठीक नहीं है। अगर देश की सरकार हर नागरिक का स्वास्थ्य बीमा करा दे तो चिकित्सा क्षेत्र का भ्रष्टाचार खुद ब खुद मिट जाएगा। हर भारतीय नागरिक का एक लाख का बीमा कराने में सरकार को सिर्फ एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, जो स्पेक्ट्रम घोटाले से काफी कम रकम है। उन्होंने मीडिया खासकर टीवी न्यूज चैनलों को नसीहत दी कि वो डॉक्टरों के बारे में सही जानकारी देने के साथ-साथ संयमित भाषा का इस्तेमाल करें. इससे डॉक्टरों और मीडिया के बीच एक समन्वय भी बनेगा।

पोलियो उन्मूलन अभियान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा इस अभियान की सफलता के लिए लोगों को जागरूक करना ज़रूरी है, क्योंकि इस को नाकाम करने के पीछे भी एक खास तरह की राजनीति हो रही है। चिकित्सा को कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में लाने का उन्होंने विरोध किया और कहा कि डॉक्टर न तो दुकानदार है और न ही मरीज कोई ग्राहक, इसलिए इस एक्ट का कोई मतलब नहीं है। इसके लिए स्टेट काउंसिल काफी है। डॉक्टर अग्रवाल चिकित्सा क्षेत्र में आरक्षण को ठीक मानते हैं बशर्ते इसकी मेरिट से कोई समझौता न हो। प्रेस विज्ञप्ति


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