ये खबर सही है तो टीवी वालों को पीएम को दौड़ा लेना चाहिए

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हिंदुस्तान अखबार में अंदर के पेज पर निर्मल पाठक की लिखी एक स्टोरी छपी है. इसमें उन्होंने बताया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह टीवी जर्नलिस्टों से बहुत नाराज हैं और इसी कारण वे अपनी विदेश यात्रा में टीवी वालों को नहीं ले जाएंगे. यह स्टोरी चौंकाती है. क्या पीएम उन्हीं को ले जाएंगे जो उन्हें सूट करते हैं. जो उनको सुरक्षित करते हुए लिखते हैं. टीवी वालों से उनकी नाराजगी की वजह क्या है. क्या टीवी वालों ने घपलों-घोटालों को दिखा दिया तो यह गलत काम कर दिया.

कुल मिलाकर अगर ये स्टोरी सच है तो टीवी वालों को मनमोहन की खबर लेनी चाहिए. आखिर कैसे कोई पीएम ऐसा कर सकता है. क्या कांग्रेस फिर से इस देश में आपातकाल की तैयारी कर रही है? तभी तो जो उनके हिसाब से नहीं बोलता, उन्हें नष्ट करने, उन्हें साइडलाइन करने की तैयारी चल रही है. और ऐसा केंद्र में ही नहीं, बिहार-यूपी-उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भिन्न-भिन्न सरकारें भी यही काम कर रही हैं. सत्ता को खुद के चरणों में लोटने वाला मीडिया ही क्यों पसंद है. इन सभी मुद्दों पर टीवी वालों को बहस की शुरुआत करनी चाहिए अन्यथा आज वे चुप रहेंगे तो कल उनकी मौत पर कोई कंधा देने भी नहीं आएगा. हिंदुस्तान में प्रकाशित पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- टीवी पत्रकार नहीं जाएंगे प्रधानमंत्री के साथ चीन


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Comments (4)Add Comment
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written by Abhinav Sharma, March 15, 2011
Dear Yashvant ji, Readers & Commenter,

Shayad aap sabhi ko yaad hoga ki jab Ghotalon ki safai dene khud PM sahab se Press Conference aayojit ki thi tab TV Journalists ne hi PM ki aankhon se aansoo nikalvaye they. Ye PM ka dosh nahin ki ve TV journalists ko apne saath nahin le kar ja rahe ye aagya hai Soniya ji ki. 2G spectram maamle main hamare aadarniya senior TV journalists ki bhaagedaari bhi is cheez ka nateeja hai.
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written by anurag sharma., March 14, 2011
vastav me pradhanmantri electronic media se naraz nahi hai. akhbar me prakashit khabar likhne wala electronic media se naraz hai aur is tarah kee betuki khabar likh raha hai. maine bhee wah khabar padhi hai. theek se padhe to samajh aa jayega.
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written by govind goyal, March 13, 2011
let him go! bechara majbur hai.
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written by Sanjay Sharma. Weekand Times., March 13, 2011
अगर सच में ऐसा है तो न सिर्फ इलेक्ट्रोनिक बल्कि प्रिंट मीडिया के लोगो को भी इसका विरोध करना चहिए. यह देश मनमोहन सिंह और मोंटेक सिंह का नहीं है जो सिर्फ अमेरिका और वर्ल्ड बैंक के इशारे पर कठपुतलियो की तरह नाचता रहे. शर्म आनी चहिए जो भर्ष्टाचार रोकने की जगह उन लोगो को रोकने की कोशिश कर रहे है जो भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे है

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