सरकार मेरा इस्‍तेमाल करना चाहती है : अग्निवेश

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: न्‍यूज एक्‍सप्रेस के मंथन में स्‍वामी ने कही दिल की बात : नक्सलियों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश को लगता है कि नक्सली आंदोलन से निबटने में सरकार उनका इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर सरकार खास कर गृहमंत्री पी चिदंबरम के रवैये से उन्हें ऐसा महसूस होता है कि सरकार ऑपरेशन ग्रीन हंट को जनहित में उठाया गया कदम साबित करने के लिए उनकी मध्यस्थता को हथियार बनाना चाहती है।

खुद को नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले और उनकी वकालत करने वाले के तौर पर प्रचारित करने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि हिंसा को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, चाहे वो हिंसा नक्सलियों की तरफ से हो या फिर सरकारी मशीनरी की तरफ से। ढांचागत हिंसा भी उतनी ही निंदनीय है क्योंकि यह सुनियोजित तरीके से गरीबों को और गरीब बना रही है। उन्होंने साफ किया कि वह मार्क्सवाद के समर्थक नहीं है लेकिन समता मूलक समाज में विश्वास रखते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य वैदिक समाजवाद की स्थापना है।

न्यूज़ एक्सप्रेस के मंथन कार्यक्रम में पत्रकारों से मुखातिब स्वामी अग्मिवेश ने कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए उनके पास प्रस्ताव रखती है लेकिन बातचीत को आगे बढ़ाने में गंभीरता नहीं दिखाती। नक्सली समस्या के समाधान को लेकर सरकारी रवैये की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में उन्हें सरकार की नीयत साफ नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि सरकार नक्सलियों की वास्तविक समस्याओं को सुलझाना नहीं चाहती।

मंथन

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि गरीब, शोषित और दलित जन की राजनीति में रिस्क ज्यादा है। दरअसल, जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि जल्द ही आम लोगों से दूर हो जाते हैं, क्योंकि वे ऐसे तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं जो अपने हितों के लिए माफिया के तौर पर काम कर रहा होता है। यही वह कारण है कि चुनाव की राजनीति आज लोकतंत्र से दूर होती चली जा रही है।

भ्रष्टाचार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिस्टम का एक लक्षण मात्र है कोई बीमारी नहीं। इसलिए कोशिश ये हो कि व्यवस्था की खामियां सुधारी जाएं भ्रष्टाचार खुद ब खुद खत्म होगा। पश्चिम बंगाल में एक शिक्षक के तौर पर कॅरियर शुरू करने वाले अग्निवेश कैसे संन्यासी बने और ऐसे जीवन के तमाम अनुभव न्यूज़ एक्सप्रेस के सदस्यों से बांटते हुए उन्होंने कहा कि पहले तो वो नक्सल आंदोलन के विरोधी थे, लेकिन जब वो जमीनी हकीकत से रू-ब-रू हुए तो उनके विचार बदल गये। प्रेस विज्ञप्ति


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