टीआरपी के चक्कर में अंधविश्वास की खेती कर रहे चैनल

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जाने माने तर्कशास्त्री सनल इडामारुकु का कहना है टीआरपी के चक्कर में मीडिया का एक तबका अंधविश्वास को काफी बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया चाहे तो अंधविश्वास को दूर करने में अच्छी भूमिका निभा सकता है, लेकिन कुछ लोग इस जिम्मेदारी को नहीं समझते। मीडिया चाहे तो इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभाते हुए लोगों को कई स्तरों पर जागरुक कर सकता है, उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित कर सकता है।

न्यूज़ एक्सप्रेस के मंथन कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत में सनल ने कहा कि देश की तरक्की तभी संभव है जब अंधविश्वास का जड़ से खात्मा हो, लेकिन हालत यह है कि लोगों में भ्रम फैलाकर और उन्हें तरह तरह से डरा कर पैसे ऐंठने का काम हो रहा है।

अंध विश्वास के खिलाफ लंबे अरसे से अलख जगाने वाले सनल ने बताया कई बार डायन आदि बता कर औरतों को मारने का मामला सामने आता है, लेकिन अगर उन घटनाओं की तह में जाएं तो पता चलता है कि असली वजह संपत्ति की लड़ाई है। ऐसे लोगों की संपत्ति हड़पने के लिए स्थानीय स्तर पर राजनीति की जाती है और इलाके के किसी व्यक्ति को ओझा के तौर पर पेश कर किसी खास औरत को निशाना बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि लोगों के बीच फैला अंधविश्वास धार्मिक बाबाओं की राजनीति का हथियार बनता जा रहा है। ऐसे बाबा लोगों में भ्रम फैलाकर बाबाओं के अलग-अलग संगठन अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ते हैं। धर्म की राजनीति पर चर्चा के दौरान सनल ने कहा कि हिंदुत्व से जुड़ी कई राजनीतिक पार्टियां इन बाबाओं के जरिए अपना हित साधने में लगी हुई हैं। ज्योतिष को भी सिरे से खारिज करते हुए इडामारुकु ने कहा कि ज्योतिष कहीं से भी विज्ञान से जुड़ा नहीं है। ज्योतिष के माध्यम से भी लोगों को मनोवैज्ञानिक तौर पर ठगने का ही काम चल रहा है।

मंथन में सनल ने कई घटनाओं के जरिये अपनी बात रखी और उसके समर्थन में अपने तर्क पेश किये। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास को खत्म करने में पहली जरूरत लोगों में शिक्षा और जागरुकता लाना है। सनल मानते हैं कि तर्क की कसौटी पर कसकर ही बात मानने की समझ लोगों में विकसित करनी होगी। प्रेस विज्ञप्ति


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Comments (1)Add Comment
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written by nikhil, March 17, 2011
tarafa ki spelling galat hai

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