मौजूदा दौर का कार्टूनिस्ट महज ग्राफिक्स डिजायनर या इलस्ट्रेटर बन कर रह जाता है : सुधीर तैलंग

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तैलंग: कम हो गई है कार्टून की धार : मशहूर कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग की नजर में कार्टूनों में आज विचारों की कमी होती जा रही है,जिससे इसमें अब वह बौद्धिक पैनापन नहीं दिखता जो पहले की तरह सटीक बिंदू पर सीधा प्रहार कर सके। तैलंग की राय में पत्रकारों और नेताओं के गठजोड़ से मीडिया की धार कुंद हो गई है, जिसका नतीजा यह हो रहा है कि मौजूदा दौर का कार्टूनिस्ट महज ग्राफिक्स डिजायनर या इलस्ट्रेटर बन कर रह जाता है।

करीब तीन दशक से तमाम अखबारों के लिए कार्टून बना रहे तैलंग ने कहा कि सत्ता का प्रभाव इस कदर हावी होने लगा है कि कई मीडिया हाउस आलोचना से बचने का रास्ता चुन ले रहे हैं,  उन्होंने कहा कि  यह राजनीति में आ रही गिरावट का ही तकाजा है कि आज हर प्रधानमंत्री छह महीने बीतते बीतते कार्टूनिस्टों के ब्रश के दायरे में आ जाता है। तैलंग कहते हैं, “ऐसा लगता है जिसकी भी लॉटरी खुल जाए वह देश का प्रधानमंत्री हो सकता है। देश के कई प्रधानमंत्री इसकी मिसाल हैं।

न्यूज़ एक्सप्रेस के मंथन कार्यक्रम में तैलंग ने बताया कि उनका फेवरेट कैरेक्टर भी देश के प्रधानमंत्री रह चुके पी वी नरसिम्हाराव थे। तैलंग ने कहा कि उनके चेहरे से लेकर व्यक्तित्व का हर हिस्सा कार्टून के लिए बेहद उपयुक्त थी। उन्होंने लालू यादव को कार्टून के हिसाब से मुश्किल कैरेक्टर बताते हुए कहा, कि जिनकी लाइफस्टाइल ह्यूमरस हो उसका कार्टून बनाना ज्यादा मुश्किल है।

जब तैलंग से उनके कार्टूनों के राजनीति और समाज पर असर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा कोई वाकया याद नहीं आता। राजनेता चिकने घड़े की तरह होते हैं, उन पर किसी बात का शायद ही असर पड़ता हो।” तैलंग ने एक और वाकये का जिक्र किया, “एक बार मैंने ऑटोवालों पर सीरीज बनायी। पता चला कि उन ऑटोवालों के लाइसेंस रद्द कर दिये गये।”

न्यूज़ एक्सप्रेस के सदस्यों से बातचीत में तैलंग ने कई दिलचस्प बातें भी बतायीं, मसलन : उनके पास एक मंत्री के पीए का फोन आया की मंत्री जी आपसे बेहद नाराज है। “जब मैंने कहा कि हाल फिलहाल में उनका कोई कार्टून नहीं बनाया फिर कैसी नाराजगी। पता चला नाराजगी की वजह तो यही थी कि छह महीने में उन पर कोई कार्टून नहीं बनाया।” तैलंग ने बताया कि केद्रीय मंत्री एमएस गिल को कार्टूनों का बहुत शौक है। गिल को उनके बनाए कार्टून इतने पसंद हैं कि उन्होंने कार्टून अपने बेड रूम में लगा रखे हैं।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुधीर तैलंग ने कहा कि राष्ट्रपति का पद हो या किसी और का जिस किसी पद की भी गरिमा पर आंच आएगी वो खुद ब खुद कार्टूनिस्ट के ब्रश के दायरे में आ जाएगा। दस साल की उम्र से कार्टून बना रहे सुधीर के मुताबिक एक कार्टूनिस्ट जर्नलिस्ट और आर्टिस्ट का कंबिनेशन है, लेकिन वो जो भी सीखता है खुद से सीखता है। उन्होंने कहा कि कार्टूनिस्ट को हर रोज कुछ नया करना होता है, जो काफी चुनौती पूर्ण है। तैलंग ने बताया कि जो नेता धोती पहनते हैं उनके कैरीकेचर बनाते वक्त धोती भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितना की उनका चेहरा।


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