बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को देने के लिए 57 लाख रुपये ले जा रहे थे केडी सिंह!

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श्रीनिवास: एक जमाना वो भी था जब केडी सिंह किसी सांसद से मीटिंग फिक्स करवाने वालों को पचास हजार रुपये टिप दे दिया करते थे :  आज भड़ास पर बाबू अमर सिंह का एक लेख पढ़ा. ठाकुर साहेब ने अपने लेख में राज्यसभा के लिए झारखण्ड से चुन कर आये एक नए नवेले सांसद श्रीयुत कुंवर दीप सिंह उर्फ़ केडी सिंह के बारे में कुछ वक्तव्य दिए हैं. ठाकुर साहेब ने अपने लेख में जो विचार जाहिर किये हैं, उसे कुछ गैर राजनीतिक नजरिये से देखा जाये तो वो शायद शत-प्रतिशत सही है.

ठाकुर साहेब के ब्लॉग पर छपी कुछ पंक्तियों का उल्लेख यहाँ पर करना चाहूँगा-- "केडी सिंह कलाकार हैं, रहते हैं चंडीगढ़ में, जन्मे हैं जाट परिवार में, रैली हरिवंश के साथ लखनऊ में करते हैं, सांसद झारखंड से हैं, पकड़े असम में जाते हैं और सरकार बंगाल में बनाने का दावा करते हैं, इच्छा दिल्ली में रेल मंत्री बनने की है." ठाकुर साहेब, ये तो राजनीति की मजबूरियां हैं और केडी सिंह जैसे कलाकार तो इस राजनीति में आते जाते रहते हैं. कुल जमा दस हज़ार करोड़ की कंपनियों के मालिक हैं. जिस दिन बाबू केडी सिंह 57 लाख रुपये की नकदी के साथ हवाई अड्डे पर रोके गए थे, उस दिन किसी भी मीडिया ने इस खबर को अपने चैनल पर दिखाने की हिमाकत नहीं की. हाँ, इक्के-दुक्के अख़बारों ने इस खबर को अपने बीच के किसी पन्ने पर छापने की हिम्मत जरूर कर दी.

पता नहीं क्या मजबूरियां थी इलेक्ट्रानिक मीडिया की जिसने इतनी बड़ी खबर को अपने चैनल पर एक बार भी दिखाने लायक नहीं समझा. खैर इलेक्ट्रानिक मीडिया को अब अगर कोई खबर और सच्ची खबर से जोड़ कर देखता है तो ये उसकी नासमझी है क्योकि न्यूज़ चैनल अब खबर नहीं परोसते बल्कि परोसते हैं वैसी खबरें जिनका आम जन मानस से कोई सरोकार हो न हो, पर उस खबर से चैनल के लाला (मालिक) की जेब जरूर भरती हो. खैर हम बात कर रहे थे केडी सिंह की. इनकी बहुत सारी कंपनियां हैं. पर जहां तक मेरी जानकारी है, इनकी ऐसी कोई भी कंपनी नहीं जो कानूनन इतने पैसे कमाती हो. पर सिंह साहेब कलाकार हैं तो पैसे येन केन प्रकारेण बना ही लेते हैं.

कुल जमा 30 करोड़ खर्च करने के बाद केडी सिंह राज्यसभा भी पहुँच गए. मुझे आज भी वो वक़्त याद है जब बाबू केडी सिंह किसी एमपी तक से मुलाकात करवाने पर मीटिंग फिक्स करने वाले को 25-50 हज़ार रुपये टिप में दे दिया करते थे. वर्तमान केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भी किसी ज़माने में केडी सिंह के निजी विमान की खूब सेवा ली और उसकी कीमत भी चुकाई, उनके फ़ूड प्रोसेसिंग के धंधे को यथाशक्ति सहायता पहुंचा कर. चलिए अब बात कर लेते हैं केडी सिंह और नगद रुपयों की बानगी की. इस बार जब केडी सिंह 57 लाख रुपयों के साथ हवाई अड्डे पर पकड़े गए तो उन्होंने इन्कम टैक्स वालों को ये जवाब दिया की ये पैसे एकाउंटेड मनी है और वो इसे लेकर असम जा रहे हैं जहाँ उनका टी-गार्डेन है. पर अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि असम के रास्ते केडी सिंह ये पैसा बंगाल चुनाव में ममता दीदी की मदद के लिए ले जा रहे थे.

अगर वक़्त के चक्र को थोड़ा पीछे घुमाया जाये तो बाबू केडी सिंह के चंडीगढ़ के ठिकाने पर इन्कम टैक्स वालों ने पहले भी दस्तक दी थी और उस वक़्त कुल 22 लाख रुपये पकड़े गए थे जिसका केडी सिंह साहेब कोई जवाब नहीं दे पाए थे. इतना ही नहीं, इनके ऊपर बंगाल की भोली भाली जनता को चिटफंड के धंधे में ठगने के भी आरोप लगते रहे लेकिन आज उसी पश्चिम बंगाल की जनता का रहनुमा बनने का ख्वाब बाबू केडी सिंह देख रहे हैं. ऐसे कितने ही आरोप हैं बाबू केडी सिंह पर. हिन्दुस्तान में तो सब माया का खेल है. अगर बगल में नोटों की पोटली हो तो आप कुछ भी कर लो कुछ नहीं होता. खैर हम तो फिर दुआ करेंगे की श्री सिंह अपने मायाजाल को पूरे हिंदुस्तान में सफलतापूर्वक फैलाएं. भ्रष्टाचार के परचम को जितनी उंचाई तक ले जा सके, ले जाएँ, ताकि इनके असली सच को जानकर इन धन-दौलत वालों के खिलाफ भारतीय जनता जल्दी से जल्दी गोलबंद हो व क्रांति का बिगुल बजा सके.

लेखक श्रीनिवास प्रतिभाशाली टीवी जर्नलिस्ट हैं. इन दिनों भड़ास के माध्यम से छुट्टा पत्रकारिता कर रहे हैं.


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