केंद्रीय हिंदी संस्थान और वर्धा विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच शुरू!

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प्रीति सागर नामक किसी सज्जन या सज्जनी ने एक मेल भड़ास4मीडिया के पास भेजा है जिसमें कुछ गंभीर किस्म की जानकारियां दी गई हैं. कुछ घपलों-घोटालों के बारे में उन्होंने बात कही है. उनकी बातों की चपेट में वर्धा स्थित अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय भी है जो अपनी आंतरिक राजनीति के कारण अक्सर चर्चा में रहता है पर हाल के कई महीनों से वर्धा से किसी नए बखेड़े की कोई खबर नहीं आई. वर्धा से बहुत दिनों से सिर्फ अच्छी-अच्छी खबरें ही आ रही हैं.

कई तरह के आयोजन हो रहे हैं. नामचीन लोगों का जमावड़ा होता रहता है. साहित्य से लेकर राजनीति और संस्कृति पर गंभीर चिंतन किया जाता रहा है. पर यह चिट्ठी वर्धा के शांत जल में कंकड़ की तरह है. इस चिट्ठी में कही गई बातों में कितनी सच्चाई है, ये तो वर्धा के अधिकारी और प्रबंधन तंत्र के लोग बताएंगे. फिलहाल यहां प्रीति सागर का पत्र प्रकाशित किया जा रहा है. इस पत्र में कही गई बातों पर अगर कहीं से कोई सफाई या जवाब आता है तो उसे भी इतने ही सम्मान से प्रकाशित किया जाएगा. चाहें तो अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए भी कह सकते हैं. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


उल्टी गिनती शुरू!

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के ब्लॉग ''हिन्दी-विश्व'' पर केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के सांस्कृतिक कार्यक्रम की कुछ झलकियों के चित्र आए हैं. चित्रों की पृष्ठभूमि पर लिखा दिख रहा है "गरिमामय उपस्थिति श्री कपिल सिब्बल, मानव संसाधन विकास मंत्री" ... इस बारे में सच्चाई यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इस कार्यक्रम में आए ही नहीं थे. दरअसल कपिल सिब्बल केंद्रीय हिंदी संस्थान के हिंदी में मैट्रिक पास कार्यवाहक निदेशक के. बिजय कुमार से इस बात से नाराज़ थे कि उन्होंने तकनीकी शब्दावली आयोग के एक अधिकारी को ग़लत फँसाया..

सिब्बल के आदेश पर बिजय कुमार के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सतर्कता विभाग ने जाँच शुरू कर दी है.. इस मामले में भाषा प्रभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गाज़ गिर सकती है... महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले में भी राष्ट्रपति भवन ने जाँच का जिम्मा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी, अमित खरे को सौंप दिया है. अमित खरे वही अधिकारी हैं जिन्होंने लालू यादव को चारा घोटाले में प्रारंभिक जाँच के बाद जेल तक पहुँचाया था.. महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले की जाँच के लपेट में विश्वविद्यालय के कुलपति भी आ रहे हैं जिन्होंने सारे प्रकरण में जानबूझ कर भी कोई कार्रवाई नहीं की.... अब सबकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है.. बस देखते जाइए.....

प्रीति सागर

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