जीजा-सालावाद और साढूवाद के फेर में फंसा चंडीगढ़ प्रेस क्‍लब

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आदरणीय सदस्यगण, चंडीगढ़ प्रेस क्लब मौजूदा समय एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले करीब एक दशक से अधिक समय से प्रेस क्लब को कुछ निहित स्वार्थी लोग अपने हितों के लिये प्रयोग कर रहे हैं। आज मुझे यह पत्र बडे़ दुःखी हृदय से जारी करने पर मजबूर होना पड़ा है। कुछ दिन पूर्व ही मेरी ई-मेल पर मुझे क्लब के एक पूर्व प्रधान सरबजीत पंधेर द्वारा जारी एक पत्र मिला है, जिस में 11 अप्रैल 2011 को एक प्रतिष्ठित अखबार ट्रिब्यून समूह से कुछ पत्रकारों तथा गैर-पत्रकारों को निलम्बित किये जाने के मामले में प्रेस क्लब में मीटिंग बुलाई गई थी।

मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि पिछले एक दशक के दौरान बहुत से समाचार पत्रों ने अनेकों पत्रकारों को अपनी संस्था से बाहर कर दिया या उन्हें प्रताड़ित करने के लिये उनका तबादला दूर-दूर के स्थानों पर किया जाता रहा है। इन पत्रकारों में बलजीत बल्ली,  जगमोहन फुटेला,  स्वतंत्र सक्सेना,  संजीव चोपड़ा,  राजेन्द्र खत्री,  भूपेन्द्र नागपाल तथा एसपी सिंह आदि के अलावा क्लब के सदस्यों के अनेकों नाम शामिल हैं। आप यह भी अच्छी तरह जानते हैं कि क्लब में पिछले एक दशक से अधिक समय से एक ही ग्रुप के लोग तरह-तरह के अवैध तरीके अपनाकर काबिज होते रहे हैं, जब इन लोगों के सामने पत्रकार साथियों के साथ अखबार मालिकों द्वारा ज्यादती किये जाने का मामला उठाया जाता रहा है, तो यही लोग यह कहकर पल्ला झाड़ते रहे हैं कि प्रेस क्लब के संविधान में क्लब के प्रांगण में यूनियन गतिविधियां चलाने का प्रावधान नहीं है।

आखिर आज क्यों इन चुनिन्दा लोगों को पत्रकार साथियों के हितों की याद आ गई। इसके कारणों का खुलासा होना जरूरी है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पिछले दस वर्षों के दौरान पंजाब, हिमाचल, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, मुख्य संसदीय सचिवों, संसदीय सचिवों, सांसदों आदि से करोड़ों रूपये अनुदान के रूप में प्राप्त हुये हैं। इसके अलावा भी प्रेस क्लब को अनेक राजनेताओं, सामाजिक संस्थाओं तथा प्राइवेट लोगों द्वारा राशि दान के रूप में दी गई है। इस करोड़ों रूपये की राशि को चंडीगढ़ प्रशासन से बिना अनुमति, चंडीगढ़ प्रेस क्लब के सदस्यों की आम सभा में मंजूरी लिये बिना तथा प्रेस क्लब के संविधान को ताक पर रखकर बिना कायदे-कानून के अपने चहेतों को गैर-कानूनी ठेके देकर खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। इस भ्रष्‍टाचार में जीजा-सालावाद तथा साढूवाद के तहत प्रेस क्लब में गैर-कानूनी हेरा-फेरी से प्रेस क्लब के सदस्यों का ध्यान हटाने के लिये सरबजीत पंधेर आज पत्रकारों के हितों के रक्षक बनने के लिये ढोंग रच रहे हैं, लेकिन मैंने फैसला किया है कि हम इस भ्रष्‍टाचार से पर्दा उठाकर रहेंगे।

गौरतलब होगा कि जो लोग वर्ष 2010 के मार्च महीने की चंडीगढ़ प्रेस क्लब की जनरल हाऊस की बैठक में मौजूद थे,  उन्हें अच्छी तरह याद होगा कि श्री पीडी महेन्द्रा ने मामला उठाया था कि क्लब के प्रधान सरबजीत पंधेर हाऊस में मौजूद लोगों को बता दें कि क्लब में उनके साढू की फर्म को कितने ठेके दिये गये हैं। मैं ने भी मामला उठाया था कि क्लब के तत्कालीन कोषाध्‍यक्ष इंद्रप्रीत सिंह के साले जसवंत सिंह जो कभी पहले ठेकेदार नहीं रहे, उनकी गैर-कानूनी फर्म को क्लब से हेराफेरी करने के लिये 6 लाख रूपये से अधिक का चेक जारी किया गया है, लेकिन तत्कालीन प्रधान सरबजीत पंधेर ने हाऊस को गुमराह करते हुये कहा था कि जसवंत सिंह की फर्म को केवल 30 हजार रुपये का रिपेयर का ठेका दिया गया है। मैं फिर दावे के साथ कह रहा हूं कि मेरे पास इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि कोषाध्यक्ष इंद्रप्रीत सिंह के साले जसवंत सिंह को क्लब से एक बार में ही तिथि 12 दिसम्बर 2009 को 6 लाख 41 हजार 850 रूपये का चेक जारी किया गया है, फिर सरबजीत पंधेर ने मौजूदा प्रधान तथा तत्कालीन महासचिव नवीन ग्रेवाल की मौजूदगी में यह झूठ क्यों बोला। इस मामले में नवीन ग्रेवाल भी महासचिव होने के नाते चेक जारी करने की जिम्मेवारी से नहीं बच सकते हैं।

जाहिर है कि क्लब में यह भष्‍टाचार तत्कालीन प्रधान सरबजीत पंधेर, महासचिव नवीन ग्रेवाल तथा कोषाध्यक्ष इंद्रप्रीत सिंह की मिलीभगत से हुआ है। मुझे क्लब की आम बैठक में भ्रष्‍टाचार का मुद्दा उठाने के एवज में सबक सिखाने के लिये आज तक चंडीगढ़ प्रेस क्लब से निलम्बित रखा गया है, ताकि मैं आने वाली किसी क्लब की आम बैठक में प्रेस क्लब की प्रबंधक समिति से इंद्रप्रीत सिंह के साले जसवंत सिंह की फर्म अरस इन्टरप्राइजिज तथा सरबजीत पंधेर के साढू की फर्म साहर फाऊडेंशन आर्किटेक्‍ट इंजीनियर्स एण्ड़ प्लानर्स को दिये गये ठेकों का ब्यौरा न मांग सकूं। मजे की बात यह भी है कि मुझे, चंचल मनोहर सिंह तथा संजीव पांडे को गत वर्ष के चुनाव अधिकारी जीसी भारद्वाज को टेलीफोन पर जान से मारने की धमकी की झूठी शिकायत के आधार पर निलम्बित किया गया था। जीसी भारद्वाज चंडीगढ़ प्रशासन को झूठा एफिडेविट देकर पत्रकारिता के नाम पर दो फ्लैट हड़पने के दोषी ठहराये जा चुके हैं, लेकिन प्रेस क्लब की आड़ में प्रशासन पर दबाव डलवाकर आज तक दोनों फ्लैटों को बचाने में कामयाब चल रहे हैं। जीसी भारद्वाज पुलिस को दी गई अपनी शिकायत वापिस ले चुके हैं।

सह चुनाव अधिकारी आरके भार्गव सेक्टर 26 थाने के एसएचओ तथा चंडीगढ़ प्रेस क्लब को चिट्ठी लिखकर साफ कह चुके हैं कि हम तीनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत रंजिश में तथा मनगढंत आधार पर दर्ज करवाई गई है। चंडीगढ़ के एसएसपी द्वारा करवाई गई जांच में भी मुझे,  चंचल मनोहर सिंह तथा संजीव पांडे को निर्दोष करार दिया जा चुका है। इस संबंध में हम प्रेस क्लब की प्रबंधक समिति, चुनाव अधिकारी  शाम सिंह तथा चंडीगढ़ प्रेस क्लब की सलाहकार समिति को भी पुलिस जांच रिपोर्ट के साथ अपना निवेदन सौंप चुके हैं। चंडीगढ़ प्रेस क्लब के कुछ चुनिन्दा ठेकेदार धक्केशाही करके प्रेस क्लब को अपनी जायदाद समझ रहे हैं तथा हम तीनों को लोकतांत्रिक प्रणाली में हिस्सा लेने से रोकने के लिये क्लब में बहाल नहीं कर रहे हैं। अब फैसला हम जनता की अदालत में लेकर आ रहे हैं। आज प्रेस क्लब को किसी सलाहकार समिति की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रेस क्लब बचाओं संघर्ष समिति गठित करने का मौका आ गया है, ताकि निहित स्वार्थी लोगों के कब्जे से क्लब को मुक्त कराया जा सके तथा क्लब में भ्रष्‍टाचार से अपने घर ले गये धन को वापिस क्लब में लाया जा सके। मैं जल्दी ही क्लब में हुये भ्रष्‍टाचार के पुख्ता सबूतों के साथ दूसरा पत्र जारी करूंगा। इन सबूतों को देखने के बाद आपके रौंगटे खडे़ हो जायेंगे तथा आप खुद तय करने को मजबूर हो जायेंगे कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ 'चंडीगढ़ प्रेस क्लब बचाओ संघर्ष समिति' के आन्दोलन में आदरणीय अन्ना हजारे बनकर कूद पड़ेंगे।

सतीश कुमार भारद्वाज

स्थायी आजीवन सदस्य

चंडीगढ़ प्रेस क्लब


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