इस महाचोर, झुट्ठा और मक्कार पवार से अब तो मुक्ति पाओ

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चीनी घोटाला हो या स्टांप घोटाल, 2जी स्पेक्ट्रम हो या महंगाई घोटाला... ज्यादातर में नाम है शरद पवार का. फिर भी यह चोट्टा अपनी कुर्सी पर बना हुआ है. हर घोटाले के बाद आरोप लगने पर कहता है कि उसका कोई लेना-देना नहीं है. और, अपने सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी ऐसे कमजोर नेता हैं कि सरकार चलाने की खातिर इस चोर, ठग और घोटालेबाज शरद पवार को कुछ नहीं कहते.

या हम यह भी कह सकते हैं कि शरद पवार घोटाले से कमाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा इन कांग्रेसी नेताओं को भी देता होगा, इसी कारण उसको सरकार से नहीं हटाते ये दिग्गज कांग्रेसी नेता. नीरा राडिया ने जो ताजातरीन खुलासा किया है, उससे शरद पवार फिर एक नए घोटाले के सरगना के रूप में सामने आया है. शरद पवार ने हमेशा की तरह इस बार भी घोटाले में कोई हाथ होने से इनकार किया है. परंतु अब जो रोज नए खुलासे हो रहे हैं, उससे पता चल रहा है कि यह शरद पवार नहीं, झुट्ठा पवार है. आईबीएन7 की वेबसाइट से एक स्टोरी हम यहां साभार प्रकाशित कर रहे हैं जिसे पढ़कर आपको लग जाएगा कि पवार कितना बड़ा चोर व झुट्ठा है.

दस्तावेज तो कुछ और ही कहानी कहते हैं पवार साहब!

नई दिल्ली। टेलीकॉम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई से कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने कहा है कि डीबी-रियल्टी से शरद पवार के रिश्ते हो सकते हैं। इससे मचे बवाल के बाद पवार ने दावा किया कि उनका दागी कंपनी डीबी रियलिटी से आर्थिक तौर पर कोई लेना-देना नहीं है लेकिन दस्तावेज तो कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से ने बाकायदा विधानसभा में ये दस्तावेज पेश कर जांच की मांग की है।

पुणे के यरवाडा इलाके में बन रहा पांच सितारा होटल किसी और का नहीं बल्कि डीबी रियलिटी के मालिक शाहिद बलवा का है। पांच सितारा होटल की ये इमारत इस बात का सबूत है कि पवार और बलवा के रिश्ते हैं। और ये रिश्ते बेहद करीबी हैं। दरअसल शरद पवार जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने मुकुंद ट्रस्ट को ये जमीन दिलवाई थी। जमीन मिली थी करीब 3.26 एकड़। लेकिन मुकुंद ट्रस्ट ने फर्जीवाड़े से तीन दशमलव दो छह एकड़ के बजाए 326 एकड़ जमीन हथिया ली। मुकुंद ट्रस्ट किसी और का नहीं विनोद गोयनका परिवार का है जिसका नाम टू जी स्पेक्ट्रम में सामने आया है और इसी जमीन पर बन रही इमारतों से शरद पवार औऱ उनके परिवार के रिश्ते भी जुड़ते हैं।

होटल के करीब पंचशील टेकपार्क भी बनाया जा रहा है। ये टेक पार्क जो कंपनी बना रही है उसमें शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले औऱ उनके पति सदानंद सुले की भागीदारी रही है। इतना ही नहीं जिस मुकुंद ट्रस्ट को जमीन दिलाई गई उसके मालिकों में विनोद गोयनका शाहिद बलवा के अलावा डीबी रियलिटी का दूसरे पार्टनर भी शामिल हैं। इनमें से शाहिद फिलहाल दू जी स्पेक्ट्रम घोटाले में जेल में हैं। यानी सीधे तौर पर तो नहीं। लेकिन घुमा फिरा कर केंद्रीय मंत्री शरद पवार और उनके परिवार का कहीं न कहीं शाहिद बलवा औऱ विनोद गोयनका से रिश्ता जरूर है।

पवार और उनके परिवार के शाहिद बलवा औऱ विनोद गोयनका से रिश्तों की तस्दीक करते हैं वो दस्तावेज जो खड़से ने विधान सभा में पेश किए। दरअसल शाहिद बलवा जो पांच सितारा होटल बनवा रहा है। उसकी मंजूरी के लिए सरकारी विभागों में अर्जी शाहिद बलवा की तरफ से ही दी गई है। इसी शाहिद बलवा ने पंचशील टेक पार्क की मंजूरी के लिए भी सरकारी विभागों में अर्जी दी है। पंचशील टेक पार्क में शरद पवार की बेटी और दामाद की हिस्सेदारी भी थी। बात यही खत्म नहीं होती श्रीनिवास पाटिल नामके जिस कलेक्टर ने मुकुंद ट्रस्ट को जमीन दिलवाई वो बाद में शरद पवार की पार्टी एनसीपी से सांसद भी बन गया।

अब सवाल ये उठते हैं कि

1-अगर शरद पवार सही हैं तो फिर उनकी बेटी औऱ दामाद की उस कंपनी में कैसे हिस्सेदारी रही जो कि विनोद गोयनका के ट्रस्ट को मिली जमीन पर टेक पार्क बना रही है?

2-पंचशील टेक पार्क बना रही जिस कंपनी में पवार की बेटी औऱ दामाद की हिस्सेदारी थी उसके लिए सरकारी मंजूरी की अर्जी आखिर शाहिद बलवा ने कैसे दी।

3-शरद पवार के मुख्यमंत्री रहते विनोद गोयनका के ट्रस्ट को आखिर जमीन कैसे मिली?

4-आखिर जिस मुकंद ट्रस्ट को केवल तीन दशमलव छब्बीस एकड़ जमीन मिलनी थी उस 326 एकड़ जमीन कैसे मिल गई?

5-क्या इतने पेचीदे तरीके से विनोद गोयनका और शाहिद बलवा को मदद करने का मकसद असलियत को छुपाना था?


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