हिंदुस्‍तान ने खोली सहारा के फर्जीवाड़े की पोल

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: सेबी ने लगा रखी हैं सहारा की दो फर्मों पर रोक,  7 अप्रैल को हट चुका है सहारा को मिला स्‍टे : पूंजी बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के प्रतिबंध के बावजूद सहारा इंडिया परिवार समूह की दो कंपनियां सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड व सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड अभी भी आम लोगों से पैसा एकत्र कर रही हैं।

गौरतलब है कि सेबी ने इन दोनों कंपनियों पर नवंबर में आम लोगों से पैसा एकत्र करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन सेबी का यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा कंपनी को मिले स्टे को निरस्त करने के बाद सात अप्रैल से पूर्ण रूप से प्रभाव में आया। अपने बचाव में सहारा समूह का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्णय की जानकारी उसे चार दिन पूर्व ही प्राप्त हुई है। कंपनी ने पैसा एकत्र करने की प्रक्रिया पर रोक के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्णय की जानकारी कंपनी को 11 अप्रैल को हुई। 11 व 12 अप्रैल को छुट्टी रहने के चलते इस प्रक्रिया पर पूर्ण रूप से रोक नहीं लगाई जा सकी। रोक लगाने के लिए कंपनी को उचित समय चाहिए। सहारा की आधिकारिक एजेंसी के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने की कंपनी की कोई मंशा नहीं है। कंपनी उच्चन्यायालय के आदेशों का पालन करने के लिए वचनबद्ध है।

मिंट ने अपनी पड़ताल में पाया कि प्रतिबंध के बावजूद अभी भी पूरे देश में सहारा समूह के एजेंट्स विवादित डिबेंचर्स बेंच रहे हैं। इन डिबेंचर्स को आम तौर पर सहारा की दो कंपनियों द्वारा जारी हाउसिंग बांड के रूप में जाना जाता है। उत्तर प्रदेश,  महाराष्ट्र व गुजरात में सैकड़ों एजेंट्स के अनुसार उन्हें कंपनी से इन डिबेंचर्स की बिक्री रोकने के संबंध में अब तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। सेबी के सलाहकार आरएन त्रिवेदी के अनुसार यह पूर्ण रूप से उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है। यदि हमें किसी प्रकार के सबूत मिलते हैं कि सहारा की इन फर्मों द्वारा अभी भी आम लोगों से पैसा एकत्र किया जा रहा है तो हम उच्च न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन का मामला उठाएंगे। मिंट के प्रतिनिधियों ने ऐसे तीन डाक्यूमेंट देखे जिनके द्वारा लोगों से पैसा एकत्र करने की बात सामने आई। इन दोनों फर्मों ने स्टे खत्म होने के बाद भी निवेशकों को उनकी जमा स्वीकार करने की रसीदें जारी की हैं।

मुम्बई में रहने वाले 38 वर्षीय भुपेंद्र अलोपी को सहारा के एजेंट ने 13 अप्रैल, को सहारा इंडिया रियल एस्टेट द्वारा जारी 5000 रुपए के एडोब बांड बेचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने चेक के जरिए एजेंट् को यह पैसा दिया। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि अगले दस वर्षों में यह पैसा तीन गुना हो जाएगा। मिंट ने उनके द्वारा दिए गए चेक की कॉपी व उनके द्वारा भरे गए फार्म की भी पड़ताल की। सूरत के एक निवेश जो अपना नाम नहीं बताना चाहते, ने बताया कि उन्होंने 11 अप्रैल को 1000 रुपए के पांच बांड़ों में निवेश किया। उन्हें सहारा हाउसिंगग इनवेस्टमेंट की ओर से रसीद संख्या 189311313490 दी गई। इस पर 15 वर्षों के बाद 28700 रु पए की वापसी की बात भी लिखी है। इस रसीद पर सूरत के शाखा प्रमुख अशोक कुमार सिंह के हस्ताक्षर भी हैं। इस रसीद की कॉपी की भी मिंट ने पड़ताल की। अलोपी को ये बांड सहारा के मुम्बई स्थित अंधेरी इलाके के एजेंट आरबी मौर्या ने बेचे थे। उन्होंने बताया कि वो पिछले कई वर्षों से सहारा के उत्पाद बेच रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सहारा के एजेंट जीएन दीक्षित ने बताया कि कंपनी ने अब तक बांडों की बिक्री रोक ने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए हैं। हम निर्माण, अबोड व हाउसिंग बांड बेच रहे हैं। यदि आपके पास फोटो पहचान पत्र है तो आप इसमें निवेश कर सकते हैं। सहारा समूह की फर्मों के लिए तीन स्कीमों अबोड बांड, निर्माण व रियल एस्टेट स्कीमों के जरिए पैसा एकत्र किया जाता है। पूरे देश में सहारा के एजेंट किसी प्रकार की रोक के बारे में नहीं जानते हैं और लगातार आम लोगों से पैसा एकत्र कर रहे हैं। सहारा इंडिया रियल स्टेट व सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट द्वारा कंपनी रजिस्ट्रार के यहां दी गई पिछली वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इन्होंने बाजार से जून 2009 तक आपश्नली फुल्ली कनवर्टेबल बांडों के जरिए 4843 करोड़ रुपए जुटाए।

सेबी के अनुसार सेबी एक्ट व कंपनी लॉ के अधीन पब्लिक इशू मानकों का उल्लंघन कर यह बांड जारी किए जा रहे हैं। सेबी पब्लिक इशू रेगुलेशन के तहत आम निवेशकों से पैसा एकत्र करने के लिए आवश्यक है कि कंपनी व उसके प्रमोटर्स पर मर्चेंट बैंकर्स के बकाए, कंपनी की रेटिंग व अन्य जानकारियां डिस्कलोजर नियमों के तहत सार्वजनिक की जाए। जबकि सहारा के इन डिबेंचर्स को जारी करने में किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। मुम्बई स्थित इनवेस्टर एंड कंज्यूमर गाइडेंस सोसाइटी के जनरल सेक्रेट्री अनिल उपाध्याय ने बताया कि इन कंपनियां द्वारा जमा की गई राशि को फ्रीज कराने और मामले में निवेशकों को पार्टी बनाने के लिए वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करने पर विचार कर रहे हैं। यहां आम लोगों का काफी पैसा डूबता दिख रहा है इसके चलते यहां एक एडमिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग भी की जाएगी। इस मामले में लोगों का काफी पैसा लगा है। अगर कंपनी पैसा वहां से निकाल लेगी तो फिर कार्यवाही करने का क्या फायदा होगा। मुझे यह डर है कि यह काम शुरू हो गया है। सोसाइटी का आरोप है कि आरओसी कानपुर ने इस केस में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को अंधेरे में रखा। आरओसी ने न्यायालय को बताया कि प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए सभी निवेशक सहारा समूह से जुड़े हुए हैं। निवेशकों द्वारा इस बाबत लिखित घोषणा जारी की जा चुकी है।

आरओसी को इनवेस्टर बाडी द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया कि जिन बांड होल्डर्स के बारे में बताया गया उनमें कोई भी सहारा समूह से जुड़ा हुआ नहीं है। इसलिए समूह ने इस मामले पर कोई लिखित घोषणा नहीं की है। निवेशकों के समूह ने मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स व आरओसी को लिखा कि इस पहलू को न्यायालय के सामने रखें। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के आरओसी एमपी शाह ने बुधवार व मंगल को फोन नहीं उठाया एसएमएस का जवाब भी नहीं दिया। सहारा के प्रवक्ता अभिजीत सरकार ने बताया कि निवेशकों के समूह द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में कंपनी पहले ही अपना पक्ष रख चुकी है। निवेशकों द्वारा हस्ताक्षर किए गए आवेदन के आधार पर ही निवेशकों ने डिक्लेरेशन जारी किया। यदि यह कहीं पाया गया कि निवेशक को घोषणा-पत्र नहीं दिया गया है तो वहां के स्टाफ के खिलाफ कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

यदि किसी मामले में आवेदन पत्र में गलती पाई जाएगी तो सर्विस सेंटर के कर्मचारियों व आवेदन निवेशक के सहयोग से गलती को सुधारा जाएगा। यदि किसी सर्विस सेंटर से किसी कर्मचारी के सहयोग न करने की सूचना मिलती है तो तत्काल कड़े कदम उठाए जाएंगे। यदि निवेशक के स्तर पर गलती पाई जाती है तो प्रधान कार्यालय निवेशक को एकाउंट पेई चेक के जरिए उसके फार्म में भरे पते के आधार पर पैसा वापस कर दिया जाएगा।

रसीदें उन्हीं निवेशकों को जारी की जाती हैं जो कंपनी के मानकों के तहत एप्लीकेशन फार्म भरते हैं। उन्होंने कहा कि फोरम ने अपने निहित स्वार्थों के चलते कंपनी को बदनाम करने की मंशा से ऐसे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जिससे कंपनी की छवि खराब हो। हमें ऐसे समूहों को बढ़ावा नहीं देना है। यदि सहारा समूह निवेशक की कोई भी समस्या है तो हम उसके भ्रम को दूर करने के लिए तैयार है। साभार : हिंदुस्‍तान


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