गोरखपुर में पांच सौ रुपये मूल्‍य के पत्रकार!

E-mail Print PDF

: स्‍वतंत्र भारत के पत्रकार ने किया पैसा देने का विरोध : अभी तक अखबारों में विज्ञापनों की कीमत होती थी. पेड न्‍यूज में समाचारों की कीमत लगने लगी. अब लगाने वाले पत्रकारों की भी कीमत लगाने लगे हैं. कहीं सौ रुपये,  कहीं पांच सौ रुपये तो कहीं औकात देखकर. और जगह भी पत्रकारों की कीमत लगती होगी, जहां सभी बिक जाते होंगे. पर कुछेक जगह के इक्‍का-दुक्‍का पत्रकार अपनी कीमत लगने से भड़क जाते हैं, जो खबर बनते हैं. ताजा मामला गोखरपुर का है, जहां पत्रकारों की कीमत लगाई गई पांच सौ रुपये.

समाजवादी पार्टी के नेता लाल अमीन खान, जो बसपा में रहने के बाद सपा में आ गए हैं तथा गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र से विधानसभा टिकट की दावेदारी में लगे हुए हैं, ने कल एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी. गौरतलब है कि 15 अप्रैल को पिपराइच विधानसभा उप चुनाव के लिए पार्टी के घोषित उम्मीदवार श्रीमती राजमती देवी के पक्ष में उनकी पत्रकार वार्ता थी. प्रेस कांफ्रेंस में बड़े-छोटे अखबारों और सिटी केबल से जुड़े लगभग बीस पत्रकार पहुंचे थे. प्रेस कांफ्रेंस में बातें हुई. मुलाकातें हुईं, नाश्‍ता मिला, पानी मिला. इसके बाद जब सभी पत्रकार बंधु चलने लगे तो डग्‍गा के रूप में एक लिफाफा थमाया जाने लगा.

कुछ पत्रकार लिफाफे के भीतर मौजूद संभावना को समझते-बूझते-अनुमान लगाते निकल लिए.  सभी पत्रकारों को उनके अखबारों की हैसियत और औकात के अनुसार लिफाफे दिए गए. किसी ने इस लिफाफा को मौके पर खोलकर देखने या पूछने की हिम्‍मत नहीं किया कि इसमें क्‍या है. जब ऐसा ही एक लिफाफा स्‍वतंत्र भारत के पत्रकार शिवम सिंह को पकड़ाया गया तो उन्‍होंने पूछ‍ लिया इसमें क्‍या है. जवाब मिल कुछ ज्‍यादा नहीं पांच सौ रुपये हैं. बस तोहफा समझकर रख लीजिए.

इसके बाद शिवम सिंह ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए लिफाफा वापस कर दिया तथा चेतावनी देते हुए कहा कि कम से कम उन्‍हें तो इस तरह का लिफाफा देने की कोशिश आइंदा न किया जाए. शिवम ने कहा कि समाचार बिना पैसा के छपता है और आपका भी छपेगा. हालांकि इस दौरान वहां मौजूद अन्‍य पत्रकारों ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया और पैसा चुपचाप लेकर चलते बने. क्‍योंकि सिर्फ पांच सौ ही नहीं औकात देखकर पचीस सौ तक रुपये दिए गए.

अभी ऐसा ही मामला पिछले दिनों बनारस और गाजियाबाद में घटा था, जब बनारस में सौ रुपये और गाजियाबाद में पांच सौ रुपये पकड़ाए जा रहे थे. दोनों जगहों पर कुछ पत्रकारों ने इसका विरोध किया था. जिसके बाद आयोजक क्षमा मांग कर अपनी लाज बचाए थे.


AddThis