भ्रष्टों को सेवा विस्तार का सिफारिशी पत्र लिखवाने का रेट चालीस लाख!

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भारतीय जनता पार्टी में कौन नेता है जो दागी नहीं है? आप अंदाजा लगाते रहिए. शायद ही कोई माई का लाल दूध का धुला मिले. और, ये हालात किसी एक नहीं बल्कि हर बड़ी राजनीतिक पार्टी का है. लेकिन भाजपा की चर्चा इसलिए जरूरी है क्योंकि वे लोग अपने चरित्र, चाल, चेहरा, चलन को लेकर बहुत दावे करते हैं और परंपरा व संस्कृति पर काफी हायतौबा मचाते हैं.

कभी कोई भाजपा अध्यक्ष नोटों की गिनती करता हुआ पकड़ा जाता है... तो कभी कोई भाजपा अध्यक्ष किसी भ्रष्ट अफसर की सिफारिश करता हुआ मिलता है.... ताजा मामला भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गडकरी का है. इन महोदय ने मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी के एक करप्ट अफसर को सेवा विस्तार देने के लिए मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री नागेंद्र सिंह को सिफारिशी पत्र भेज दिया है. इस मामले में भाजपा के एक विधायक का नाम भी चर्चा में है जिनके प्रभाव के चलते लोक निर्माण मंत्री नागेंद्र सिंह के नाम सिफारिशी चिट्ठी लिखी गई.

पता चला है कि इस भाजपा विधायक ने भ्रष्ट अफसर से चालीस लाख रुपये की डील की जिसके बाद विधायक ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से पत्र लिखवाया. ये पता नहीं चल सका है कि इस चालीस लाख रुपये में नितिन गडकरी का कितना हिस्सा था या फिर विधायक ने अकेले ही माल हजम कर लिया. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा इस मामले को फर्जी बताते हैं.  फिर भी भाजपा दिल्ली आफिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है. होना-जाना क्या है, ये तो आप भी जानते हैं.

देखिए, ये है सिफारिशी पत्र.  और पत्र के नीचे हैं दो खबरें, जो विभिन्न अखबारों में छपी हैं...


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