युवाओं ने पेड न्‍यूज छापने वाले दैनिक जागरण के खिलाफ मोर्चा खोला

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: सोनभद्र में अखबार के खिलाफ प्रदर्शन : मैं मीडिया की कोख से पैदा हुआ लीडर नहीं हूँ, संघर्ष, चरित्र और त्याग के प्रतीक शहीद भगत सिंह के सपनों का भारत सजाना हमारा मकसद है. ये कहना है सोनभद्र में पिछले चार दिनों से पेड़ न्यूज को लेकर दैनिक जागरण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे संगठनों के संयोजक विजय शंकर का. एक वक्त उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की आँखों का तारा, जिसने सिर्फ सिद्धांतों की वजह से समाजवादी राजनीति को बाय-बाय कर दिया. इस बार मीडिया के रवैये से न सिर्फ खफा हैं बलिक जनसमूह के साथ कम्प्लीट बायकाट के मूड में आ गया है.

आलम ये है कि दैनिक जागरण के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शन,  जुलूस की ख़बरों के स्थानीय अखबारों में नदारद होने की कमी भड़ास में छपी खबर की फोटो स्टेट प्रतियाँ वितरित कर पूरी की जा रही है. पूरे जनपद में मीडिया शुद्धिकरण अभियान के पर्चे बांटे जा रहे हैं वही कड़कती धूप में जनसभाएं की जा रही हैं. युवाओं की मीडिया के प्रति नाराजगी बहुत कुछ कह रही है. दैनिक जागरण द्वारा पैसे लेकर लोकप्रियता बेचने और आसन्न स्थानीय निकाय और विधान सभा चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश के खिलाफ उठा जनाक्रोश अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गया है.

बताया जाता है कि इस पूरे मामले की जानकारी जागरण वाराणसी के स्थनीय संपादक वीरेन्द्र कुमार और कानपुर बैठे संपादक संजय गुप्ता तक को है,  लेकिन गलती को सुधारने की बजाय अखबार जानबूझ कर पूरे मामले पर सफ़ेद चादर बिछाने की कोशिश कर रहा है. हालाँकि अलग-अलग तरीकों से आंदोलकारियों के मान-मनौवल का सिलसिला जारी है, लेकिन आंदोलनकारियों ने पीछे हटने से साफ़ इनकार कर दिया है.  उधर बहुजन समाज पार्टी के घटक युवा बहुजन छात्र मोर्चा के सदस्य भी बैनर तख्ती लेकर धरना स्थल पर जा बैठे हैं. मोर्चा के पूर्व प्रदेश सचिव रामफेर मौर्या ने कहा है कि दलितों आदिवासियों के इस जनपद में मीडिया सामंतों की तरह व्यवहार कर रहा है.

जागरण

दैनिक जागरण जैसे अखबारों की साजिश है कि गरीब दलित जनता को चुनावों से बेदखल कर दिया जाए, अगर संसद, विधान सभाओं में अपराधी जा रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी राजनैतिक पार्टियों की कम मीडिया की अधिक है. गुरुवार को छात्र संघर्ष समिति ने अपने पांच अलग-अलग टीमों को पूरे जनपद में मीडिया शुद्धिकरण अभियान के पर्चे बांटने को भेज दिया है. इन पर्चों में साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि "मीडिया अब पैसे वालों का हो गया है. मीडिया में विज्ञापनदाता नेताओं को प्रमुख स्थान एवं आर्थिक तौर से कमजोर सामाजिक जीवन जीने वाले लोगों की उपेक्षा देखने को मिल रही है. हमने कभी नहीं सोचा था कि हमें मीडिया से भी लड़ाई लड़नी होगी, मगर अफ़सोस हमारी आवाज को मीडिया में जगह नहीं मिल रही है बल्कि जब हम धरने पर बैठे हैं तो हम लोगों को धमकी दी जा रही है, अब आप ख़बरों का हिस्सा नहीं बन सकते.''

आंदोलनकारियों ने ऐलान किया है कि वो मीडिया को बिकने नहीं देंगे, परिणाम चाहे जो भी हो. जिस वक्त ये खबर दी जा रही थी, धरना स्थल पर हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, गांडीव और अन्य अखबारों के प्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचे हुए थे, लेकिन आंदोलनकारियों ने उन्हें खाली हाँथ लौटा दिया. इसके पहले दिन में मोटरसाइकिल जुलूस निकला गया और सभा की गयी.


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