''35 हजार दो नहीं तो परीक्षा में बैठना कैंसिल''

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: सुधाकर महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने जिलाधिकारी को सुनाया दुखड़ा : बीएड में दाखिले और उसके बाद भी कालेजों द्वारा छात्र-छात्राओं से मनमाना फीस वसूलने का खेल जारी है। परीक्षा फार्म भरने के नाम पर पाण्डेयपुर स्थित सुधाकर महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा 35 हजार रुपयों की मांग करने पर शनिवार को छात्राओं के होश उड़ गए। घबरायी दर्जनों छात्राएं जिलाधिकारी और मण्डलायुक्त से गुहार लगाने उनके कार्यालय पहुंच गई।

जिलाधिकारी कार्यालय पर नहीं मिले तो छात्राएं विकास भवन जा पहुंची जहां जिलाधिकारी किसी जरूरी बैठक में भाग ले रहे थे। जिलाधिकारी से मिली छात्राओं ने कहा कि महाविद्यालय के प्रार्चाय उन पर 35 हजार रुपये परीक्षा फार्म भरे जाने के नाम पर मांग रहे हैं। न देने पर परीक्षा में न बैठने देने की धमकी दे रहे हैं। जिलाधिकारी द्वारा मामले को देखे जाने के आश्वसन के बाद छात्राएं लौट गईं।

पाण्डेयपुर स्थित सुधाकर महिला महाविद्यालय की छात्रओं का कहना है कि प्रवेश के लिए काउंसिलिग के दौरान ही उनसे 30359 रूपये जमा करवा लिए गए थे। लेकिन इसके बाद भी पूरे साल भर उनसे विभिन्न मदों में पैसों की मांग की जाती रही। यूनिफार्म, परिचय पत्र, स्काउट एवं गाइड के नाम पर भी उनसे हजारों रुपये समय-समय पर लिए जाते रहे लेकिन कभी कोई रसीद महाविद्यालय प्रशासन ने उन्हें नहीं दी। उपस्थिति के नाम पर भी उनसे सादे कागज पर दस्तख्त करवाया जाता रहा,  विरोध करने पर उपस्थिति काट दी जाती है।

छात्राएं

न्याय की आस लिए जिलाधिकारी से मिलने पहुंची छात्राओं का कहना था कि उन्होंने बड़ी उम्मीद से जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जिला प्रशासन इस मामले में उनकी मदद करेगा। छात्राओं को डर है कि अगर जिला प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो उनका भविष्य खराब हो सकता है। गौरतलब हो कि प्रदेश में संयुक्त रूप से होने वाली बीएड की प्रवेश परीक्षा से लेकर दाखिला तक हमेशा से ही विवादों को घेरे में रहा है। सरकार द्वारा फीस निर्धारित किए जाने के बाद भी कालेजों द्वारा मनमाना फीस वसूली किए जाने की खबर आम है।

बनारस से भास्‍कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.


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