एचयूजे फिर विवादों में, दूसरे गुट ने तदर्थ समिति बनाई

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हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स यानी एचयूजे एक बार फिर विवादों में हैं। यूनियन के एक गुट ने हिसार में बैठक कर तदर्थ समिति का गठन कर लिया है। इसी के साथ चुनाव की घोषणा कर दी गई है। यह गुट वर्तमान प्रधान एवं यूनियन के राष्ट्रीय सचिव संजय राठी का विरोधी माना जाता है। इस बैठक में यूनियन के पूर्व अध्यक्ष एवं हरिभूमि रोहतक के ब्यूरो चीफ सोमनाथ शर्मा की अध्यक्षता में तदर्थ समिति का गठन कर दिया गया।

वहीं, पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं दैनिक ट्रिब्यून सिरसा के संवाददाता भूपेंद्र धर्माणी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। चुनाव के लिए 29 मई का दिन निर्धारित किया गया है। यह चुनाव हिसार में होगा। दरअसल यूनियन में प्रधान पद को लेकर पिछले काफी समय से कवायद चल रही है। वर्तमान प्रधान संजय राठी का कार्यकाल दो साल का था, जिसे छह माह बढ़ा दिया गया था। यह कार्यकाल भी अब दिसम्बर में खत्म हो चुका है। वहीं श्री राठी अब यूनियन के राष्ट्रीय सचिव भी बन चुके हैं।

यूनियन का एक गुट शुरुआत से ही संजय राठी का विरोधी रहा है। जब से वे प्रधान बने हैं, तभी से यह गुट लगातार उनका विरोध करता आ रहा है। यह गुट इसी कोशिश में लगा रहता है कि किसी तरह संजय राठी के खिलाफ मुहिम चलाई जाए। इसी का नतीजा हिसार में हुई यह बैठक थी। इस बैठक में महासचिव बलजीत सिंह ने भी शिरकत की। वे प्रधान पद की दौड़ में शामिल हैं। सोमनाथ शर्मा को भी प्रधान पद का दावेदार माना जा रहा है। इस गुट को सरकार विरोधी माना जाता है क्योंकि इसमें वे पत्रकार शामिल हैं, जिन्हें विपक्ष का समर्थन हासिल है। वहीं, संजय राठी की गिनती प्रदेश सरकार के समर्थक के तौर पर होती है। ऐसे में अब यह विवाद विपक्ष बनाम सरकार होकर रह जाएगा।

कोषाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा : उधर, हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के कोषाध्यक्ष लोकेश जैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधान संजय राठी और महासचिव बलजीत सिंह को अपना इस्तीफा ई-मेल कर दिया है। इस इस्तीफे का कारण उन्होंने अपनी व्यवस्तता को बताया है। साथ ही कहना है कि वे लेखा-जोखा का ब्यौरा प्रधान व महासचिव को दे देंगे। कोषाध्यक्ष को भी सोमनाथ शर्मा गुट का समर्थक माना जाता है।

बैठक पर भी उठे सवाल : वहीं, हिसार में हुई इस बैठक पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। राठी गुट का मानना है कि यूनियन की इस बैठक में कार्यकारिणी के 31 सदस्यों में से मात्र दस ही मौजूद थे। ऐसे में इस बैठक का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही कुछ ऐसे सदस्य भी बैठक में थे, जो कार्यकारिणी के सदस्य ही नहीं हैं। जो लोग अगुवाई कर रहे हैं, वे ही कार्यकारिणी में नहीं हैं।

विरोध करने वाले रहे हैं सहयोगी : विरोधी गुट में शामिल कुछ सदस्य पूर्व में संजय राठी के सहयोगी ही रहे हैं। वे उनके साथ हर बैठक और आयोजनों में मौजूद रहे। यहां तक कि इन आयोजनों में सम्मान भी पाया और गिफ्ट भी। अब वे अचानक ही राठी के विरोधी और दूसरे गुट में शामिल हो गए। हालांकि शुरुआत से ही ये संदिग्ध भी रहे हैं। ये वे लोग हैं जो यूनियन की तरफ से संजय राठी के साथ थाईलैंड की यात्रा भी कर चुके हैं। अब शायद माजरा खुद राठी को भी समझ नहीं आ रहा। जिन साथियों को वे इतना मान-सम्मान देते थे, वे ही विरोधी क्यों हो गए।

रोहतक से दीपक खोखर की रिपोर्ट.


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