इंदौर प्रेस क्‍लब के महासचिव की सदस्‍यता समाप्‍त करने के लिए जारी होगा नोटिस

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इंदौर प्रेस क्लब की प्रबंधकारिणी समिति ने बुधवार को संपन्न अधियाचित बैठक में इंदौर प्रेस क्लब के महासचिव अन्नादुराई की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने के लिए नोटिस जारी करने का फैसला लिया। यह आपात बैठक महासचिव द्वारा प्रेस क्लब की गरिमा गिराने एवं विधान विरोधी कृत्य करने के मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए बुलाई गई थी। बैठक में प्रबंधकारिणी समिति के 18 में से 13 सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने सर्वानुमति से इन मामलों के लिए महासचिव को दोषी निरुपित करते हुए नोटिस जारी करने का निर्णय लिया।

दरअसल, महासचिव ने 24 अप्रैल को संपन्न विशेष साधारण सभा को अवैधानिक बताते हुए इसकी शिकायत सीधे उपपंजीयक फर्म्स एंड सोसायटी तथा इंदौर के जिला प्रशासन को कर दी थी। प्रेस क्लब का विधान कहता है कि किसी भी मामले में असहमति या विवाद होने पर पहले प्रबंधकारिणी समिति की बैठक और फिर साधारण सभा की बैठक में वह विवाद रखा जाए। दोनों जगह फैसला नहीं होने पर बाहरी हस्तक्षेप किया जा सकता है, लेकिन महासचिव 27 अप्रैल की अधियाचित बैठक में उपस्थित होकर अपनी बात रखने के बजाय बाहरी हस्तक्षेप करना उचित समझा।

यह प्रेस क्लब की धारा  16 का सीधा-सीधा उल्लंघन है। सदस्यों ने इस बात पर भी एतराज उठाया कि जिस विशेष साधारण सभा का संचालन खुद महासचिव ने किया वह बैठक अवैध कैसे हो सकती है। ज्ञात रहे कि इंदौर प्रेस क्लब की विशेष साधारण सभा ने लगातार दो मर्तबा से अधिक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। महासचिव इस फैसले से खिन्न है। याद दिला दे कि अन्नादुराई विगत 20 वर्षों से प्रेस क्लब के विभिन्न पदों पर निर्वाचित होते आए हैं। महासचिव की सदस्यता के मामले में अंतिम फैसला लेने के लिए प्रबंधकारिणी समिति ने तीन पूर्व अध्यक्ष सर्वश्री ओमी खंडेलवाल, सतीश जोशी और जीवन साहू की समिति को अधिकृत कर दिया है।

विशेष साधारण सभा : इंदौर प्रेस क्लब की विशेष साधारण सभा में रविवार 24 अप्रैल को प्रेस क्लब के हित में ऐतिहासिक फैसला लिया। फैसले के तहत अब प्रेस क्लब चुनाव में कोई भी सदस्य लगातार दो मर्तबा से अधिक चुनाव नहीं लड़ सकेगा। अभी तक अध्यक्ष और महासचिव के पद पर यह पाबंदी थी। प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल का कहना है कि सरस्वती समूह ने दो चुनाव पहले वादा किया था कि क्लब में नए सदस्यों को मौका दिया जाएगा, जिसके तहत पहले अध्यक्ष और महासचिव के पद पर लगातार दो मर्तबा से अधिक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी। विशेष सभा ने सभी पदों पर इस प्रावधान को लागू कर दिया।

प्रेस क्लब के विधान के अनुसार विशेष सभा में उपस्थित सदस्यों में सर्वानुमति से हाथ उठाकर इस प्रस्ताव को पारित किया। बैठक में पूर्व अध्यक्ष सर्वश्री शशीन्द्र जलधारी, ओमी खंडेलवाल, जीवन साहू, सतीश जोशी सहित वरिष्ठ सदस्य विनय तिवारी, हृदयेश दीक्षित, अनिल त्यागी, बाबूलाल कुलवाल, रोहित तिवारी आदि ने प्रस्ताव को समयानुकूल बताते हुए समर्थन किया। विशेष सभा ने प्रेस क्लब की सदस्यता को भी सामान्य, मानद और सहयोगी तीन श्रेणी में विभाजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। नियमानुसार इस प्रस्ताव को 14 दिन के भीतर फर्म्स एंड सोसायटी विभाग को प्रेषित कर दिया जाएगा।

महासचिव द्वारा विरोध : विशेष साधारण सभा की बैठक में जब महासचिव ने मंच से इस प्रस्ताव पर एतराज उठाया तो पूर्व अध्यक्ष सतीश जोशी एवं वरिष्ठ सदस्य विनय तिवारी ने कहा कि यदि महासचिव को कोई आपत्ति थी तो उन्हें इस्तीफा देकर साधारण सदस्य के रूप में बैठना था। 25 अप्रैल को महासचिव ने उपपंजीयक फर्म्स एवं सोसायटी को शिकायत पत्र भेजकर इस विशेष सभा को अवैध बताया और प्रेस क्लब का रिकॉर्ड जब्त कर लेने का अनुरोध किया।


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