अन्ना के खराब स्वास्थ्य की खबर से यूपी के अफसरों के चेहरे खिले

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: फीकी रही इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन की लखनऊ रैली : इंडिया अंगेस्ट करप्‍शन की लखनऊ में आयोजित रैली का रंग फीका ही रहा। अन्ना के न आने की खबर से लखनऊ के वाशिंदे अन्ना की टीम को सुनने के लिए घरों से नहीं निकले। देश भर से अन्न्ना को मिले समर्थन के मददेनजर यूपी सरकार के हाथ-पांव फूले हुए थे कि सुलतानपुर, वाराणसी और लखनऊ में अन्ना की रैली के दौरान अपार जन समूह उमड़ेगा लेकिन अन्ना के न आने के कारण एक बड़ा आयोजन छोटी-मोटी मीटिंग में तब्दील हो गया।

पिछले लगभग दो हफ्तों से लखनऊ में जिस तरह अन्ना की रैली को लेकर प्रचार-प्रसार और जन समर्थन जुटाने की मुहिम चलाई जा रही थी वो अन्ना के न आने की खबरों के चलते बेअसर ही साबित हुई। गोमती तट स्थित झूलेलाल पार्क रैली स्थल पर बमुश्किल सात-आठ सौ की भीड़ ही जुट पाई जिसमें पुलिस-प्रशासन और मीडिया वालों की अच्छी-खासी तादाद भी शामिल थी। अन्ना की टीम के सदस्य अरविंद केजरीवाल, स्वामी अग्निवेश, जसपाल भट्टी को सुनने को लेकर लखनऊ वालों में उत्साह नजर नहीं आया। जबकि प्रदेश में अन्ना की प्रस्तावित रैलियों को लेकर यूपी सरकार की चिंता का आलम ये था कि उसने रातों-रात धरना प्रदर्शन नियमावली ही बदल डाली थी।

लखनऊ विश्‍वविद्यालय ने तो सरकारी रूख भांपते हुए लखनऊ टीचर एसोसिशन द्वारा अन्ना के लिए आयोजित कार्यक्रम हेतु आंवटित मालवीय सभागार और गेस्ट हाउस के कमरों की बुकिंग ही निरस्त कर दी थी। लेकिन जैसे ही अन्ना की अस्वस्थता का समाचार फैला यूपी सरकार ने राहत की सांस ली और जो सरकारी मशीनरी कल तक कार्यक्रम को असफल बनाने में प्रयासरत थी, वही रैली के सफल आयोजन और व्यवस्था की वाहवाही लूटने को बेताब नजर आ रही थी।

वैसे सिविल सोसाइटी के सदस्यों का लखनऊ में दिन भर व्यस्त कार्यक्रम रहा, सुबह दस बजे सेंट फ्रांसिस कालेज में शहर के प्रबुद्वजनों से बातचीत के बाद दोपहर साढे़ बारह बजे कैथड्रल स्कूल में प्रेस कांफ्रेस, दोपहर तीन बजे गोमतीनगर में सिटी मांटेसरी स्कूल में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से जुड़े विभिन्न जिलों के समन्वयकों, कार्यकर्ताओं की ओर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं की मीटिंग और शाम पांच बजे राजभवन में टी-पार्टी के बाद निर्धारित कार्यक्रम से लगभग आधा घंटा लेट शाम साढे़ छह बजे अन्ना की टीम रैली स्थल पर पहुंची।

इंडिया अंगेस्ट करप्‍शन की लखनऊ रैली को कवर करने के लिए मीडिया प्रतिनिधियों की अच्छी- खासी भीड़ के अलावा सभी प्रमुख चैनलों की ओबी वैन भी रैली स्थल पर तैनात थी, लेकिन रैली स्थल पर सन्नाटा देखकर सभी को निराशा ही हाथ लगी। रैली में लखनऊ शहर के छात्र, टीचर, रंगकर्मियों, समाजसेवियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और सीनियर पत्रकारों ने शिरकत तो की लेकिन जिस स्तर के जनसमर्थन, सहयोग और उत्साह की उम्मीद लखनऊ से थी उस मुकाबले में आयोजन फीका ही रहा।

रैली में जसपाल भट्टी ने अपने चिर-परिचित चुटीले अंदाज में बात रखी तो वहीं स्वामी अग्निवेश और अरविंद केजरीवाल ने भी जोश जगाने का प्रयास किया, मीटिंग को अन्ना हजारे ने डा. आशीषफोन से संबोधित किया। मंच पर अन्ना की टीम के अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारी श्रीप्रकाश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान के अलावा रैली के स्थानीय समन्वयक आरके अग्रवाल के अलावा शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे। अगर रैली के आयोजक वीडियो कांफ्रेसिंग के द्वारा अन्ना के संबोधन का इंतजाम करवा देते तो रैली का रंग कुछ बदल सकता था।

लेखक डा. आशीष वशिष्‍ठ स्‍वतंत्र पत्रकार तथा लखनऊ के निवासी हैं.


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