सहारा ने खुद को बेदाग बताया

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: ईडी अधिकारी पर दबाव बनाने का मामला : राजेश्वर सिंह से पत्रकार सुबोध जैन ने पूछे थे 25 सवाल : सहारा इंडिया के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करता है। मामले से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी के खिलाफ वह तब तक कुछ कहने की स्थिति में नहीं है जब तक कि सुप्रीम कोर्ट से उसे इसकी इजाजत न मिल जाए। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स की ओर से लखनऊ में जारी एक बयान में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सहारा बेदाग है।

2 जी स्पेक्ट्रम मामले या अन्य किसी प्रकरण में उसका मेसर्स स्वान से कोई लेना-देना नहीं है। उसने मीडिया की उन रिपोर्टों का भी खंडन किया है जिनमें कहा गया है कि सहारा ने मेसर्स स्वान में 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स ने सहारा पर लगाए गए आरोपों को निराधार और बदनीयती भरा बताया है। उसने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद वह मामले की सच्ची तस्वीर सबके सामने प्रस्तुत करेगा। उसने कोर्ट से यह भी निवेदन किया है कि यदि सहारा पर लगाए गए आरोप झूठे और निराधार साबित होते हैं तो वह इसके लिए जिम्मेदार लोगों को भी सजा दे।

उल्लेखनीय है कि सहारा ग्रुप के सीएमडी को मनी लांड्रिंग निवारण अधिनिमय के तहत दो फरवरी और उसके बाद समन जारी किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक राजेश्वर सिंह को जिस घटिया तरीके से डराया-धमकाया गया और ब्लैकमेल करने की कोशिश गई, उसे पीठ ने बहुत गंभीरता से लिया। व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी राजेश्वर सिंह ने कोर्ट से कहा है कि पत्रकार सुबोध जैन ने उन्हें 25 सवाल भेजे हैं।

ये सवाल उनकी व परिवार की संपत्ति, संपर्क और अन्य मुद्दे से जुडे़ हैं। इसके साथ ही उनके खिलाफ सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित-प्रसारित कराने का अभियान चलाने की धमकी दी। पत्रकार सुबोध जैन द्वारा सिंह को पत्र लिख कर व्यक्तिगत सवाल पूछने को अदालत ने बहुत गंभीर मामला माना है। अदालत ने कहा कि यह बहुत हास्यास्पद है कि सहारा के सीएमडी को नोटिस जारी करने के बाद जांच अधिकारी राजेश्वर सिंह की निजी जिंदगी को कलुषित करने का प्रयास किया गया। पीठ ने कहा कि मामला जितना नजर आता है, उससे कहीं अधिक है। एक अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश भी की गई। अदालत ने कहा कि सीबीआइ, ईडी और आयकर विभाग बगैर किसी से प्रभावित हुए अपनी जांच करेंगे। कितनी भी बड़ी ताकत इसमें बाधा डालने की कोशिश करेगी तो उससे कठोरता से निपटा जाएगा।

2जी स्पेक्ट्रम प्रकरण की जांच में अड़ंगेबाजी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुब्रत रॉय और दो पत्रकारों उपेंद्र राय और सुबोध जैन को अवमानना नोटिस जारी कर छह हफ्ते के अंदर जवाब तलब किया है। न्यायाधीश जीएस सिंघवी और एके गांगुली की पीठ ने कहा-'दस्तावेजों को देखने के बाद प्रथम दृष्ट्या हमारा मानना है कि राजेश्वर सिंह द्वारा की गई जांच में हस्तक्षेप की कोशिश की गई है। इसलिए हमने स्वत: संज्ञान लिया और उन्हें नोटिस भेजा है।'

पीठ ने सहारा इंडिया न्यूज नेटवर्क और उसकी आनुषांगिक इकाइयों द्वारा राजेश्वर सिंह से संबंधित किसी भी कार्यक्रम या खबर के प्रकाशन या प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। पीठ ने कहा कि कोई भी स्टोरी प्रकाशित नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो कोई बड़ा आदमी 'सरकारी मेहमान' बनेगा। उन्हें मालूम होना चाहिए कि 'लक्ष्मण रेखा' क्या है। पीठ ने इस पर दुख जताया कि ईडी द्वारा सुब्रत रॉय को चेन्नई की कंपनी एस-टेल के साथ लेन-देन के दस्तावेजों के साथ पेश होने के लिए नोटिस जारी करने के बाद पत्रकार उपेंद्र राय और सुबोध जैन इस जांच में हस्तक्षेप करने के लिए सक्रिय हो गए। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को लेकर एस-टेल सीबीआइ के जांच के दायरे में है।


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