रतन टाटा, अनिल अंबानी, प्रशांत रुईया, दयालू अम्मा, सुब्रत रॉय सहारा और नीरा राडिया को बचा रही है सीबीआई

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: टू जी तंरग घोटाले की जांच कमोवेश 1991 में सामने आए हवाला कांड जैसा होता दिख रहा है जिसमें शामिल सभी रसूखदार आरोपी कानूनी फंदे से निकल गए : सुप्रीम कोर्ट के बरसते डंडे के बीच टूजी तरंग घोटाले की सख्त जांच को मजबूर हुई सीबीआई रतन टाटा, अनिल अंबानी, प्रशांत रुईया, दयालू अम्मा, सुब्रत रॉय सहारा और नीरा राडिया को बचा रही है।

बड़ी साफ इबारत में लिखा पढा जा रहा है कि सीबीआई की जांच सत्ता प्रतिष्ठान से आ रही आंच की लौ में झुलस रही है। अब सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर है कि वह जांच एजेंसी को तेज आंच की तपन से कैसे बचा पाती है और सीबीआई को एक हजार 76 सौ करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी करने दे पाती है या नहीं। सीबीआई से बचने वाले रसूखदारों के नाम अब अदालत के संज्ञान में है। सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की विशेष अदालत को आने वाले दिनों में इस पर फैसला करना है। मशहूर कहावत है, खेत खाए गदहा, मार खाए जुलाहा। यानी जिसने हजम किया वो तो बच गया पर साथ लगा बेचारा जुलाहा फंस गया। तिहाड़ जेल में सड़ रहे रिलायंस अनिल धीरुभाई अंबानी कंपनी के गौतम घोष, सुरेन्द्र पिपरा और हरि नायर ऐसे ही जुलाहा हैं जो करोड़ों रुपए की खेत चट गए गदहे के साथ थे। गदहे के भरोसे पल रहे थे इसलिए सीबीआई ने गदहे पर डंडा बरसाने के बजाए गदहे के इन मुलाजिमों को पकड़ कर जेल में ढूंस दिया है।

इसी तरह शाहिद उस्मान बलवा को जिस स्वॉन टेलीकॉम का प्रमोटर होने की जुर्म में टू जी तरंग घोटाले में शामिल किया गया है उस स्वॉन टेलीकॉम में अनिल अंबानी और ईस्सार ग्रुप के कर्ताधर्ता प्रशांत रुईया का पैसा लगा है। घोटाले का आर्थिक फायदा भी इन दोनों को ही सबसे ज्यादा हुआ है। अनिल अंबानी और प्रशांत रुईया को सीबीआई ने आरोपी नहीं बनाया है। रुईया का सत्ता प्रतिष्ठान पर असर है और अनिल अंबानी के बारे में खबर है कि मां कोकिला बेन के निर्देश पर भाई मुकेश अंबानी में छोटे भाई के प्रति असीम प्रेम फूटने लगा है। मुकेश अंबानी ने प्रंधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर वित्ता मंत्री प्रणव मुर्खजी और अंबानी के पैसे पर पले बढे पूरे तंत्र को अनिल अंबानी को बचाने के लिए झोंक दिया है।

यही हाल नीरा राडिया को गवाह बनाने की कहानी में है। गवाह बनकर सुपर दलाल राडिया ने खुद के साथ अपने अजीज रतन टाटा पर मेहरबानी की। सीबीआई के अस्सी हजार पेज की चार्जशीट के पहले खेप में साफ लिखा है कि टू जी लाइसेंस लेने के साथ ही रतन टाटा ने बतौर दलाली श्तमिल मेयमश् संस्था को करोडों रुपए का अनुदान दे दिया। एनजीओ श्तमिल मेयमश्  मुख्यमंत्री करुणानिधि की पत्नी दयालू अम्मा और सांसद बेटी कनिमोझी की एनजीओ है। महादानी टाटा ने यह दान किस हित में किया यह समझने बूझने के बावजूद सीबीआई की चार्जशीट में न तो रतन टाटा और न ही उनकी सहेली नीरा राडिया आरोपी बनाया गया हैं। शायद टाटा का रसूख सीबीआई के हौसले को पस्त कर गया।

82 साल की दयालू अम्मा के साथ सीबीआई का सलूक तो और भी हस्यास्पद है। चार्जशीट में लिखा है कि बूढी अम्मा को एकमात्र तमिल भाषा जानने की वजह से आरोपी नही बनाया गया। मासूमियत को उकेरते हुए अनकहे में कह दिया गया है कि इस देश में हिंदी और अंग्रेजी नहीं जानने वाला यानी सिर्फ तमिल समझने वाला शख्स अपराधी नहीं हो सकता है। यह सत्तर की दशक में राष्ट्रभाषा के खिलाफ हिंसक आंदोलन करके सत्ता के केंद्र में आए करुणानिधि के लिए बड़े सकून की बात है। उनको चालीस-पचास साल के बाद आंदोलन के स्लोगन का निजी सिला मिल रहा है।

ऐसे में तमिल बोलने वालों की मदद से रेंगती केंद्र सरकार को आगे किसी एक ही भाषा  यानी तमिल में बोलने समझने वाले को अपराधी ठहराने में मुश्किल आनी चाहिए। खैर तब की तब देखी जाएगी। तथ्य है कि कलैगनार टीवी में दयालू अम्मा की साठ फीसदी हिस्सेदारी है। टीवी को दो सौ करोड रूपए टूजी स्पेक्ट्रम के लाभान्वितों से मिला। घोटाले का पर्दाफाश होने के बात तुरंत गिरफ्तारी और पैसे को वसूलने की तैयारी होनी चाहिए थी। यह जांचकर्ताओं की मेहनत का असली सिला होता पर सीबीआई को कसूरवार कलैगनार टीवी में साठ फीसदी के हिस्सेदार को छोडकर बस बीस-बीस फीसदी की हिस्सेदारी कनिमोझी और शरत कुमार को आरोपी नजार आ रहे हैं। इस मजबूरी को क्या कहेंगे?

इतना ही नही आरोपी कनिमोझी को गिरफ्तार करने गई सीबीआई को अब तक के सबसे बडे नाटक को झेलना पडा है। आरोपपत्र के आधार पर सीबीआई की विशेष अदालत में जब आरोपी कोनिमोझी को गिरफ्तार कर जेल में भरने की बारी आई तो कोनिमोई ने ए राजा पर खुद को बरगलाने का आरोप खुद के वकील के जरिए ही लगवा लिया। शनिवार को भरी अदालत में लोगों ने देखा कि किस तरह से कनिमोझी के वकील सामने बैठे कैदी राजा पर कनिमोझी को फंसाने का आरोप लगा रहे थे और मंद मंद मुस्कुराते ए राजा को बखूबी समझ आ रहा था कि यह सच नहीं बल्कि कानूनी दांवपेंच है। कनिमोझी के वकीलों ने अदालत को बचाव की बहस में पूरे दो दिनों तक उलझाए रखा। अब कनिमोझी की गिरफ्तारी पर अदालत के सुरक्षित फैसले की घोषणा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजा आने के बाद वाले दिन यानी 14 मई को की जाएगी।

कई गवाह हैं जब कोनिमोझी के सौतेले भाई अजागिरी ने ए राजा को सरेआम कालर पकडकर धमकाया था कि वो कनिमोझी से दूर रहे और उनकी सबसे छोटी बहन को बरगलाने की जुर्रत नहीं करे। कन्याकुमारी इलाके में अजागिरी का खौफ है। अजागिरी के कहने का मतलब होता है कि वो जो कह रहे हैं वही होगा। पर कनामोझी के सहारे उतरोत्तर चढे जा रहे ए राजा को अजागिरी की बात समझ में नहीं आई। जाहिर है कनिमोझी को भी अजागिरी ने समझाई होगी। काश कनिमोझी मान गई होती। तो शायद मोहब्बत के रास्ते मिल रहे रुपयों के लिए जेल जाने की नौबत नही आती। पर सब जानते हैं कि प्यार और पैसे के खेल में ऐसा होता नहीं है। पर जो हो रहा है वह और भी भयंकर है और टू जी तंरग घोटाले की जांच कमोवेश 1991 में सामने आए हवाला कांड जैसा होता दिख रहा है जिसमें शामिल सभी रसूखदार आरोपी कानूनी फंदे से निकल गए।

लेखक आलोक कुमार सरोकार वाले पत्रकार हैं. उनका यह लिखा 'डेटलाइन इंडिया' से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.


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