अपनी-अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं जामिया प्रशासन और छात्र

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कम हाजिरी के चलते परीक्षा देने से रोके गए एजेके मास कम्युनिकेशन एंड रिसर्च सेंटर के 17 छात्रों का आंदोलन गम्भीर रूप लेता जा रहा है। रविवार को मामले में स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप के चलते मचे हंगामे के बाद सोमवार को फिर छात्र-प्रशासन अपने-अपने पक्ष पर अड़ गए हैं। जामिया प्रशासन ने साफ कर दिया कि किसी भी छात्र के साथ अनुचित कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र आज भी मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं।

जामिया की मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ.सिमी मल्होत्रा ने बताया कि छात्रों को बार-बार जामिया प्रशासन इस बात की सूचना देता रहा है कि 75 फीसदी से कम हाजिरी वाले छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। बावजूद इसके छात्रों ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और जब उनके रोल नम्बर रोके गए तो उन्होंने मेडिकल के आधार पर राहत की गुहार लगाई। जांच में कई मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए, जिनकी शिकायत जामिया प्रबंधन ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से भी की है। मल्होत्रा ने बताया कि एजेके मास कम्युनिकेशन एंड रिसर्च सेंटर के छात्रों के लिए सेंटर प्रमुख प्रो.उबेद सिद्दीकी का कार्यालय खुला है। वह जब चाहें, अपने रोल नम्बर रोके जाने की जांच कर सकते हैं।

उधर, सोमवार तीसरे दिन भी छात्रों की भूख हड़ताल जारी रही। पीडि़त छात्रा नाबिला जैदी ने बताया कि हड़ताली छात्रों की हालत बिगड़ रही है। प्रशासन अपनी बात पर अड़ा हुआ है। प्रशासन मेडिकल दस्तावेजों की जांच करें तो अवश्य छात्रों को परीक्षा देने का हक मिल सकता है। छात्रों के समर्थन में सोमवार को जामिया के जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी के नेतृत्व में वीसी आफिस पर प्रदर्शन किया गया। संगठन से जुड़े शाह आलम ने बताया कि नियमों की दुहाई देने वाले जामिया प्रशासन को छात्रों की बातों पर भी गौर कर अपने फैसले पर पुन: विचार करना चाहिए। साभार : भास्‍कर


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