''भ्रष्‍टाचार की प्रतीक बन चुकी है मायावती सरकार''

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लखनऊ : मायावती सरकार प्रदेश में अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रही है। उत्‍तर प्रदेश में भ्रष्टाचार की प्रतीक बन चुकी मायावती की सरकार तानाशाही पर उतर आयी है। प्रदेश में धरना-प्रदर्शन और आम सभा जैसी न्यूनतम लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी प्रतिबंधित किया जा रहा है। ग्रेटर नोएड़ा में जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत किसानों पर बर्बर हमले किए गए, बुजुर्गो, महिलाओं तक को बुरी तरह मारा गया, किसानों के घरों को जला दिया गया।

 

पहली बार प्रदेश में आंदोलन करने वाले नेताओं पर ईनाम घोषित किया जा रहा है। सरकार की इस तानाशाही का प्रदेश की वाम-जनवादी ताकतें चौतरफा विरोध करेंगी। इसके खिलाफ 18 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होगा और आगामी 3 जून को लखनऊ में विकल्प रैली व आमसभा की जायेगी। इस आशय का निर्णय आज जन संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद इलियास आजमी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में जन संघर्ष मोर्चा के घटक दलों के अलावा सीपीएम के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक में मायावती सरकार द्वारा किसान आंदोलन के नेताओं पर ईनाम घोषित करने के फैसले का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गयी। बैठक में कहा गया कि प्रदेश में आंदोलन के लिए अनुमति प्राप्त करने का आदेश तानाशाही का फरमान है और जनांदोलन की ताकतें इसे खारिज करती हैं।

बैठक में जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश की हालत बेहद खराब है। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी मायावती सरकार से जनता में गहरा आक्रोश है। प्रदेश की जनता कांग्रेस-भाजपा, सपा-बसपा से हटकर नया जनपक्षधर राजनीतिक विकल्प चाहती है। जन संघर्ष मोर्चा प्रदेश में जनवादी विकल्प के लिए काम करने वाली सभी तरह की ताकतों की गोलबंदी करेगा। बैठक में मौजूद सीपीएम के राज्य सचिव एसपी कश्‍यप ने कहा कि प्रदेश में नए विकल्प के निर्माण के प्रयासों में उनकी पार्टी पूरे तौर पर साथ है। बैठक में लिए राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि उत्‍तर प्रदेश में मुलायम ने ही जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के दमन की शुरुआत की थी। आज भी जो किसानों पर दमन हो रहा है उसकी जबाबदेही कांग्रेस की है, क्योकि आज तक उसने अंग्रेजों के बनाए 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द करने का काम तक नहीं किया। बैठक में जब तक 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द कर नया कानून न आ जाए तब तक किसानों से एक इंच भी जमीन न लेने, किसान पक्षधर भूमि अधिग्रहण कानून बनाने, नोएड़ा में किसानों पर गोली चलाने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर दण्ड़ित करने और किसानों पर लादे मुकदमों और किसान नेताओं पर घोषित ईनाम को तत्काल वापस लेने की मांग पर दिल्ली में 18 मई को प्रदर्शन करने का निर्णय हुआ।

बैठक में सोनभद्र के अनपरा तापीय परियोजना में सार्वजनिक सम्पत्ति की लूट व भ्रष्टाचार के खिलाफ और अपने अधिकारों के लिए जारी ठेका मजदूरों की विगत 15 दिनों से जारी हड़ताल और गोरखपुर में मजदूरों के आंदोलन का समर्थन किया गया। बैठक में लिए राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि कि अनपरा तापीय परियोजना में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सम्पत्ति की लूट हो रही है। यहां अनुरक्षण के कामों में 40 लाख का टेंडर होता है और उसका 4 करोड़ रुपया भुगतान होता है, परियोजना में नट, बोल्ट, कोयला समेत करोड़ों के सामानों की चोरी हो रही है, मात्र कमीशनखोरी के लिए ठेकेदारी प्रथा चलायी जा रही है। मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी तक में लूट हो रही है 30 दिन के मजदूरों द्वारा किए गए कामों को 20 दिन की हाजिरी दिखा कर मजदूरी को हड़पा जा रहा है, मजदूरों के ईपीएफ को भी लूट लिया गया है। इस लूट व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर मजदूरों का उत्पीड़न किया जाता है। भ्रष्टाचार और लूट को बनाए रखने के लिए वहां प्रबंधन किसी नियम कानून को नहीं मानता है।

बैठक में सरकार से मांग की गयी कि वह अनपरा में सार्वजनिक सम्पत्ति की लूट व भ्रष्टाचार के खिलाफ और अपने अधिकारों के लिए जारी ठेका मजदूरों की हड़ताल में शामिल मजदूर प्रतिनिधियों से तत्काल वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान करें। बैठक में पूर्व सासंद अखिलेश सिंह, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्व मंत्री कौशल किशोर, सीपीएम सचिव मण्ड़ल सदस्य दीना नाथ यादव, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह, परचम पार्टी के अध्यक्ष सलीम पीरजादा, इंकलाब पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल, पूर्व विधायक अनिल सिंह, पूर्व आईजी व दलित चितंक एसआर दारापुरी, लखनऊ विश्‍वविद्यालय अध्यापक संघ के महामंत्री आरबी सिंह, आदिवासी महासभा के गुलाब चंद गोड़, लालबहादुर सिंह, दिनकर कपूर, एहसान अहमद आजमी, यशवंत सिंह, राज नारायण मिश्र आदि लोगों ने अपने विचार रखे। प्रेस रिलीज


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