रजिस्‍ट्रार ने सहारा की कंपनी को नोटिस जारी किया

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विवादों के बीच वैकल्पिक तौर पर पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) जारी कर 4,843 करोड़ रुपये उगाह चुकी सहारा समूह की एक प्रमुख कंपनी इस रकम की देखरेख के लिए अपना खाता इस्तेमाल नहीं कर रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कंपनी पंजीयक निवेशकों से मिली रकम किसी तीसरे पक्ष के खाते में रखने के मामले में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प को मार्च में ही नोटिस भेज चुके हैं।

रजिस्ट्रार ने यह कदम मार्च में इस सिलसिले में एक निवेशक की शिकायत मिलने के बाद उठाया। निवेशक ने बताया कि हाउसिंग बॉन्ड के नाम से चर्चित ओएफसीडी के जरिये उगाहा गया धन तीसरे पक्ष के बैंक खाते में है। ये डिबेंचर सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ने जारी किए थे। लेकिन निवेशकों से चेक 'सहारा इंडिया' के नाम पर लिए गए।

शिकायतकर्ता के मुताबिक निवेशकों ने निर्माण बॉन्ड और रियल एस्टेट बॉन्ड में रकम लगाई थी। एजेंट के निर्देश के मुताबिक निवेशकों ने 'मैसर्स सहारा इंडिया' के नाम चेक काट दिए। लेकिन जब उन्हें रसीद मिलीं तो उन्हें महसूस हुआ कि उन पर तीसरे पक्ष का नाम है। निवेशक ने अपनी शिकायत में पूछा, 'चेक सहारा इंडिया के नाम पर लिए गए। लेकिन रसीदें तीसरी कंपनी के नाम से मिलीं। कंपनी पंजीयक ने किस आधार पर इसे मंजूरी दे दी?'

इस बारे में सहारा के प्रवक्ता अभिजित सरकार को बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से ईमेल भेजा गया, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। अलबत्ता 19 अप्रैल 2011 के लिखित जवाब में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प ने पंजीयक को बताया, 'मैसर्स सहारा इंडिया के साथ एक समझौते के तहत सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन ओएफसीडी के निजी आवंटन के लिए उस कंपनी के बैंक खातों समेत बुनियादी ढांचे और दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकती है।'

कंपनी ने यह भी बताया कि इससे कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 297 का उल्लंघन नहीं होता है क्योंकि कंपनी का कोई भी निदेशक उसका साझेदार नहीं है। साभार : बिजनेस स्‍टैंडर्ड


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