सहारा को झटका : सुप्रीम कोर्ट ने सेबी से जांच करने को कहा

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: दो कंपनियों के ओएफडीसी से पैसा जुटाने का मामला : शेयर बाजार नियामक सेबी सहारा समूह की डिबेंचर स्कीम की जांच आगे बढ़ाए। सुप्रीम कोर्ट ने समूह की दो कंपनियों द्वारा जारी वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह व्यवस्था दी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि निवेशकों को शायद इस निवेश योजना की कोई जानकारी नहीं हो और वे वैसा ही ठगा हुआ महसूस कर सकते हैं, जैसा कि हर्षद मेहता शेयर घोटाले में हुआ था।

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी है। सहारा समूह ने सेबी के उस आदेश को वहां चुनौती दी है, जिसमें कंपनी से निवेशकों का ब्योरा देने को कहा गया है। मुख्य न्यायाधीश एसएच. कपाडि़या की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा, 'हमारी राय में ओएफसीडी के सवाल पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सेबी के फैसले की जरूरत है। सेबी मामले को सुने और कोई आदेश जारी करे।'

हालांकि, खंठपीठ ने स्पष्ट किया कि सेबी के आदेश इस बारे में न्यायालय के अगली व्यस्था आने तक लागू नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट समूह के इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखा रहा था कि ओएफसीडी योजना सेबी कानून के दायरे में नहीं आती है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सहारा से जानना चाहा कि वह किस कानून के तहत अपनी ओएफसीडी योजनाएं चला रहा है।

खंडपीठ ने कहा, 'हम जानना चाहते हैं कि आप किस आधार पर ओएफसीडी में निवेश आमंत्रित कर रहे हैं। यह योजना ग्रामीण लोगों के लिए है और वे इसके बारे में जानते ही नहीं हैं। आखिर में एक दिन वे यहां आएंगे और कहेंगे की उन्हें ठग लिया गया है..आप हर्षद मेहता मामले को जानते हैं, वहां भी इसी तरह धन जुटाया गया था, निवेशकों को योजना के बारे में कुछ पता नहीं था।'  सहारा के वकील ने ओएफसीडी की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन पीठ इससे संतुष्ट नहीं हुई और कहा, आज तक हमें नहीं मालूम की ओएफसीडी क्या है। कुछ निवेशक कैसे जानेंगे। हम चाहते हैं कि सेबी फैसला करे।

क्या है मामला यह मामला :  सहारा समूह की कंपनियों- सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेंस्टमेंट कॉरपोरेशन के निर्गम (इश्यू) पर सेबी के आदेश से जुड़ा है। समूह की दोनों कंपनियां ओएफसीडी के जरिये पूंजी जुटा रही हैं। इनमें ऋणपत्रों (डिबेंचरों) को बाद में शेयरों में बदलने का विकल्प रखा गया है। इसी वजह से सेबी ने निर्गमों को अपने अधिकार क्षेत्र में बताते हुए इनका ब्योरा मांगा था।

सहारा समूह ने इसे डिबेंचर इश्यू बताकर सेबी के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पहले नियामक के आदेश पर अमल रोक दिया था। बाद में उसने पहले के आदेश को निरस्त कर सेबी को दोनों ओएफसीडी निर्गमों का ब्योरा तलब करने की अनुमति दे दी थी। सहारा ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। साभार : जागरण


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