इंदौर प्रेस क्‍लब के महासचिव अन्‍नादुराई की प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त

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इंदौर प्रेस क्‍लब की मैनेजिंग कमेटी ने संस्‍था की गरिमा गिराने तथा अनुशासनहीनता के मामले में क्‍लब के महासचिव अन्‍नादुराई की प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त कर दी है. गुरुवार को मैनेजिंग कमेटी की बैठक में महासचिव को कारण बताओ नोटिस पर सफाई देने का अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन वे बैठक में उपस्थित नहीं हुए. जिसमें बाद कमेटी ने यह निर्णय लिया.

अन्‍नादुराई को फोन करके भी अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया परन्‍तु उन्‍होंने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद प्रबंध कमेटी उनकी प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त करने के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी. बैठक में तीन पूर्व अध्‍यक्ष ओमी खंडेलवाल, सतीश जोशी और जीवन साहू भी मौजूद थे, इन्‍होंने भी फैसले पर सहमति जताई. मैनेजिंग कमेटी ने 27 अप्रैल को अन्‍नादुराई को कारण बताओ नोटिस जारी करके पंद्रह दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था.

नोटिस पर न तो महासचिव अन्‍नादुराई ने जवाब दिया और ना ही बैठक में उपस्थित हुए. महासचिव अन्‍नादुराई प्रेस क्‍लब में लाए गए उस संशोधन से खिन्‍न और नाराज थे, जिसमें लगातार दो मर्तबा के कार्यकाल के बाद चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी. समिति ने ये फैसला नए लोगों को भी प्रेस क्‍लब के विभिन्‍न पदों पर मौका देने के लिए लिया था. इसके बाद से ही अन्‍नादुराई नाराज चल रहे थे.

मैनेजिंग कमेटी के इस फैसले के बाद महासचिव का पद खाली हो गया है. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि क्‍लब के संविधान के अनुसार छह महीने से पहले महासचिव पद के लिए उपचुनाव करा लिया जाए. इसके लिए शीघ्र मीटिंग बुलाए जाने का भी निर्णय लिया गया. प्रेस क्‍लब की कमेटी का चयन तीन साल के लिए होता है. यह कार्यकाल भी मई 2012 तक रहेगा. पिछले चुनाव में महासचिव पद छोड़कर सरस्‍वती समूह ने सभी पदों पर कब्‍जा जमाया था.

प्रेस क्‍लब के संविधान संशोधन से लोगों की नाराजगी पर प्रवीण खारीवाल ने कहा कि क्‍लब के इस संशोधन से सबसे ज्‍यादा परेशानी उन लोगों को हुई है, जो पिछले 20-25 सालों से प्रेस क्‍लब पर अपना कब्‍जा जमाए बैठे हैं. उन्‍होंने कहा कि सभी को मौका मिलने के लिए इस तरह का संशोधन जरूरी था. कुछ लोगों को छोड़कर सभी ने इसका स्‍वागत किया है.


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