विवेक सहाय को एमटी/सीआरबी बनाने के खिलाफ याचिका मंजूर

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नयी दिल्ली : विवेक सहाय को एमटी/सीआरबी बनाये जाने के खिलाफ एक जनहित याचिका (W.P.C. NO. 3327/2011) दिल्ली हाई कोर्ट में आज  स्वीकृत कर ली गई. यह जनहित याचिका 'रेलवे समाचार' के सम्पादक सुरेश त्रिपाठी ने दायर की है. यह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्र और जस्टिस श्री संजीव खन्ना के समक्ष प्रस्तुत हुई.

याचिका में सचिव, रेलवे बोर्ड, विवेक सहाय, सीवीसी, डीओपीटी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीएमओ को प्रतिवादी बनाया गया है. विद्वान न्यायाधीश द्वय ने याचिका स्वीकृत करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने और हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया है. याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 10 अगस्त  2011 को होगी. श्री त्रिपाठी के अनुसार श्री सहाय को मेम्बर ट्रैफिक बनाने के लिए यह सारा मेनिपुलेशन किया गया था. सबसे पहले तत्कालीन मेम्बर ट्रैफिक श्रीप्रकाश को उनके रिटायर्मेंट से 15 दिन पहले वीआरएस दिलाई गई जिसका एसीसी से अप्रूवल नहीं मिला था. श्री सहाय को एलिजिबल बनाने के लिए श्रीप्रकाश को वीआरएस दिलाई गई.

इसके बाद मेम्बर ट्रैफिक के पैनल में बिना विजिलेंस क्लियरेंस के ही विवेक सहाय का नाम डाला गया, इसके लिए प्रोविजनल विजिलेंस क्लियरेंस का इस्तेमाल किया गया जो की नियमानुसार गलत था क्योंकि बिना प्रोपर विजिलेंस क्लियरेंस के पैनल में नाम नहीं डाला जा सकता है. मेनिपुलेशन की हद ये है की पीएमओ में प्रधानमंत्री से भी यह ब्यूरोक्रेटिक लॉबी श्री सहाय के नाम के आगे 'सब्जेक्ट टू विजिलेंस क्लियरेंस' लिखवाने में कामयाब रही. इसका मतलब यह है कि चोर चोरी करता रहे मगर पकड़ा न जाए तो प्रधानमंत्री को कोई आपत्ति नहीं है. सब्जेक्ट टू विजिलेंस क्लियरेंस लिखवाने के बाद चार दिन की राष्ट्रीय छुट्टियाँ हो गईं उसी में श्री सहाय का विजिलेंस क्लियरेंस सीवीसी से मैनेज कर लिया गया.

सीवीसी 28.12.2009 को श्री सहाय का विजिलेंस क्लियरेंस देता है और 22 दिन बाद 20.01.2011 को इसे यह कहते हुए नकार देता है की रेलवे बोर्ड द्वारा दी गई दलीलों से वह सहमत नहीं है, मामले की पुनः जांच करके 15 दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट सीवीसी के सामने प्रस्तुत की जाए. आरटीआई में दी गई जानकारी में सीवीसी ने 2 मार्च 2010 तक श्री सहाय के खिलाफ सारे मामले जांच के अधीन होने की बात स्वीकार की है. सीवीसी द्वारा आरटीआई में दिए गए सम्बंधित पेपर हमारी वेबसाईट www.railsamachar.com में देखे जा सकते हैं.

श्री त्रिपाठी का कहना है कि श्री सहाय को मेम्बर ट्रैफिक बनाने का खास उद्देश्य जैसे ही पूरा हो गया वैसे ही सीवीसी ने 20.01.2010 को एक पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड विजिलेंस कि सारी जांच और टिप्पणियों को नकार कर अपनी खाल बचा ली. न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास जताते हुए श्री त्रिपाठी का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा ब्यूरोक्रेटिक मेनिपुलेशन है जो कि अब हाई कोर्ट के सामने खुलकर आएगा.


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