चैनल के मालिकों कनी-शरद को जेल, अमर भी जाएंगे जेल

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: कलेंगनर टीवी के जरिए 2जी घोटाले का पैसा बटारने वालों की जमानत याचिका खारिज : अमर सिंह की काली कमाई की जांच और गिरफ्तारी के लिए रास्ता खुला :  दो अदालतों के फैसले से देश के करोड़ों दिलों में ठंड पहुंची : आज का दिन शुभ है. दो बड़ी मछलियां कानून के शिकंजे में आई हैं. तमिलनाडु में करुणानिधि के चुनाव हारते ही उनकी बेटी कनी जेल चली गईं.

विधानसभा चुनाव नतीजों तक के लिए कनी को जिस तरह राहत दी गई थी, उससे लोग चौंके थे.  इसके कई अर्थ लगाए जा रहे थे. कुछ का कहना था कि सीबीआई और कोर्ट कुछ अदृश्य लेकिन बहुत बड़े रुतबे वाली ताकतों के हिसाब से संचालित होती हैं. फिर भी, देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर कनी को जेल भेज दिया गया है. साथ ही उनके चैनल के एमडी शरद को भी. हालांकि जिस घोटाले के मामले में इन लोगों को जेल भेजा गया है, उसके कई (खल)नायक दिल्ली-मुंबई में अब भी खुलेआम व मजे में घूम रहे हैं. इसमें मीडिया से लेकर राजनीत व उद्योग घराने तक के बड़े लोग शामिल हैं.

उधर, विवादित अमर सिंह की संपत्ति की जांच के लिए आदेश कर दिए गए हैं. यह आदेश भी अदालत ने दिया. साथ ही यह भी कहा कि अमर सिंह की गिरफ्तारी से रोक हटाई जा रही है. मतलब, जरूरत पड़ने पर ब्लैकमनी के मामले में अमर को जेल भेजा जा सकता है. कह सकते हैं कि अदालतों की सक्रियता से थोड़ी बहुत उम्मीद इस देश की जनता में शेष है अन्यथा जांच एजेंसियां और मंत्री-अफसर-मीडिया के लोग तो बड़े-बड़ों की कठपुतली बन अब घोटालेबाजों को पकड़ने की जगह घोटाले छुपाने, राज मिटाने में लगे हैं. पहले बात करते हैं राज्यसभा सांसद अमर सिंह की.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी सीडी के जरिए हाल में विवादों में आए अमर सिंह की कंपनियों में काले धन को सफेद बनाने के मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराने के आदेश दिए. कोर्ट ने ईडी को दो हफ्ते में इनवेस्टीगेशन शुरू करने के आदेश दिए. साथ ही यह भी कहा कि एक माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट जुलाई के पहले हफ्ते में कोर्ट को सौंपी जाए. न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा और न्यायमूर्ति एसएस तिवारी की बेंच ने इस प्रकरण में अमर सिंह की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा ली.

कोर्ट ने ईडी को आदेश दिया कि पहली रिपोर्ट पेश करते समय अधिकारी खुद कोर्ट में मौजूद हों. बेंच ने इसे राष्ट्रीय महत्व का मसला बताते हुए प्रवर्तन निदेशालय से इसकी जांच कराने को उचित कहा. अमर सिंह की कंपनियां कई राज्यों में हैं इसलिए इसकी जांच केन्द्रीय एजेंसी से ही कराना उचित होगा. कोर्ट ने यह आदेश अमर सिंह की उस याचिका पर दिया जिसमें 15 अक्टूबर 2009 को शिवाकान्त त्रिपाठी की बाबूपुरवा में दर्ज रिपोर्ट को निरस्त करने के लिए दाखिल की गई थी. शिवाकांत त्रिपाठी ने भी कोर्ट से इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने का आग्रह किया था.

कानपुर के व्यापारी शिवकांत त्रिपाठी ने 2007 में अमर सिंह के खिलाफ़ आरोप लगाए थे कि उन्होंने उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते हुए 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेरफेर की थी. 15 अक्टूबर 2007 को अमर सिंह के खिलाफ कानपुर में हवाला प्रणाली से पैसों के हेरफेर का मामला दर्ज हुआ था. इसी मामले में अपनी गिफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर रद करने के लिए अमर सिंह ने हाईकोर्ट में मामले को उठाया था.

ये तो रहा अमर कांड. अब बात कनी की. 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पटियाला हाऊस कोर्ट स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद डीएमके सांसद कनीमोझी और कलैगनार टीवी के प्रमुख शरद कुमार को शुक्रवार को गिरफ्तार लिया गया. विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा कि जमानत याचिका खारिज की जाती है, दोनों आरोपियों को तुरंत हिरासत में लिया जाए. अदालत ने निर्देश दिया कि 43 वर्षीय कनीमोझी और कुमार को कल पूर्वाह्न दस बजे उसके समक्ष पेश किया जाएगा. अदालत ने अपने 144 पृष्ठों के आदेश में कहा कि द्रमुक सांसद के खिलाफ गवाही देने वाले अधिकतर लोग कलेंगनर टीवी के कर्मचारी है लिहाजा उन्हें प्रभावित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

सीबीआई न्यायाधीश ने कहा, 'अपराध की व्यापकता पर विचार करते हुए और इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कई गवाह कलेंगनर टीवी के कर्मचारी है, इस बात की आशंकाएं हैं कि यदि आरोपियों को जमानत पर छोड़ दिया तो गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है.'

अदालत ने कनीमोझी और शरद कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपराध की व्यापकता पर भी विचार किया. न्यायाधीश ने कहा, 'अपराध की गंभीरता तथा आरोपों के स्वरूप और व्यापकता एवं रिकार्ड में मौजूद सबूतों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए यदि आरोपियों को रिहा किया जाता है तो आशंका है कि गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है. मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि दोनों ही आवेदक आरोपी जमानत के लिए प्रथम दृष्टया मामला बना पाने में विफल रहे. जमानत याचिका में कोई योग्यता नहीं है और उन्हें खारिज किया जाता है.'

सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में कनीमोझी की भूमिका के कारण उनके खिलाफ 25 अप्रैल को आरोपपत्र दाखिल किया था. इसमें कहा गया कि कनिमोझी ने 200 करोड़ रुपये की रिश्वत ली. यह कलेंगनर टीवी के जरिए हासिल की गई जिसमें कनीमोझी की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है. यह धनराशि टीवी चैनल को शाहिद उस्मान बलवा के डीबी रियल्टी के जरिए पहुंचाई गई. बलवा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में से लाभ हासिल करने वाले व्यक्तियों में एक है. उसकी एक अन्य फर्म स्वान टेलीकाम ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस हासिल किया था.

कनीमोझी के अलावा करूणानिधि की पत्नी दयालू अम्मा की कलेंगनर टीवी में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है. बहरहाल, सीबीआई ने मामले के आरोपपत्र में उनका नाम शामिल नहीं किया. जांच एजेंसी के अनुसार दयालू टीवी चैनल के रोजमर्रा के कामकाज में दखलंदाजी नहीं करतीं. कनीमोरी के साथ टीवी चैनल के प्रबंध निदेशक शरद कुमार का नाम भी आरोपपत्र में शामिल किया गया है. शरद कुमार की भी टीवी चैनल में 20 प्रतिशत भागीदारी है.

कनिमोझी डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की बेटी हैं. डीएमके केंद्र की यूपीए सरकार का महत्वपूर्ण घटक है. हाल ही में कांग्रेस और डीएमके ने तमिलनाडु में मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन इस गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. कनी पर आरोप है कि उन्होंने 2जी घोटाले में फायदा उठाने वाली कंपनियों से 209 करोड़ रुपये की घूस ली. ये रकम उनकी टीवी को दी गई. कोर्ट ने कनि और शरद कुमार को इस मामले में बराबर का आरोपी माना है.


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