झूठे दावों की मशीन हैं श्री सुब्रत रॉय

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प्रकाश हिंदुस्तानीश्री सुब्रत रॉय जो भी दावा करें, कम है. उन्हें बढ़ा चढ़ाकर बातें करने का शगल है. वे जिस धंधे में हैं, वहां यह बहुत ज़रूरी है. अगर आपके पास सहारा इण्डिया की डायरी हो तो उसमें देखें, और अगर ना हो तो सहारा इण्डिया परिवार डॉट ओआरजी पर जाकर मीडिया वाले पेज पर जाएँ.

वहां सहारा समय के रीजनल न्यूज़ चैनल के लोगो के नीचे कुछ दावा किया गया है. इसमें कहा गया है कि  'सहारा समय राउंड दी क्लॉक ३६ सिटी स्पेसिफिक रीजनल न्यूज चैनल'. सहारा के कौन से ३६ रीजनल चैनल हैं?  कोई बताये तो सही. हमें केवल पांच के बारे में पता है :  १- एनसीआर, २- मप्र-छतीसगढ़, ३- बिहार झारखण्ड,  ४-यूपी-उत्तराखंड,  ५ मुंबई-महाराष्ट्र.

कहाँ गए ३१ रीजनल चैनल?

सवाल यह है कि अगर सहारा के 'राउंड दी क्लॉक ३६ सिटी स्पेसिफिक रीजनल न्यूज चैनल'. हैं तो बाकी ३१ न्यूज़ चैनल कहाँ दिखाए जा रहे हैं?  भारत में या होनोलूलू में? मंगल पर या चाँद पर?  क्या वे चैनल  चोरी हो गए? सीबीआई, सेबी या आरबीआई ने ज़ब्त करवा दिए? राजस्थान का तो सुना था कि चैनल २००५ में शुरू होने को था कि वहां के किसी छोटे से अखबार ने छाप दिया कि श्री सुब्रत रॉय को एड्स हो गया है. अलबत्ता श्री सुब्रत रॉय को टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में इंटरव्यू देना पड़ा जो १० जून २००५ को पहले पेज पर  `I got an HIV test done. I do not have AIDS' शीर्षक से छपा था. उसके बाद  राजस्थान चैनल शुरू नहीं हुआ. अब सवाल यही है कि ये रीजनल चैनल कहाँ गए?

परिवार का ढोंग

''I am very proud to be the Gaurdian or world's largest family''  यह दावा करते हुए वे कहते हैं कि सहारा विश्व में सबसे बड़ा ';परिवार' है. कौन सा  परिवार? किसका  परिवार?  यह कैसा परिवार है जिसके सदस्य प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं? अंशकालिक बताकर पूर्णकालिक  कर्मचारियों की तरह उनसे काम लेना और उनकी मौत पर जिम्मेदारी से मुंह फेर लेने का काम कौन करता है? बी एम द्विवेदी की आत्महत्या के बाद उनके वृद्ध पिता,  विधवा पत्नी और मासूम बेटी की किसी ने खोज खबर ली क्या? युवा पत्रकार अनिल सक्सेना (शाजापुर) की असमय मौत के बाद एक पैसे की मदद भी इस परिवार ने की क्या? नॉएडा के रेडिसन होटल में हुई मीटिंग में जब मैंने और मेरे साथियों ने श्री सुब्रत रॉय का ध्यान दिलाया था तो किस सफाई से उन्होंने उन्हें  स्ट्रिंगर बताकर टाल दिया था? क्या अनिल सक्सेना सहारा का पूर्णकालिक पत्रकार नहीं था? दूसरे कर्मचारियों (जिन्हें कर्मयोगी कहा जाता है, हालाँकि सभी को 'इम्प्लाई कोड' यानी नौकर नंबर दिया जाता है.) ने दो दो हजार करके मुट्ठीभर मात्र मदद की. कहाँ गया परिवार, कहाँ गया अभिभावक? श्री रतन टाटा से कुछ सीखें श्री सुब्रत रॉय, जिन्होंने मुंबई के ताज होटल पर आतंकी हमले के बाद हर कर्मचारी के घर खुद जाकर मदद की थी और हर मृत  कर्मचारी के परिजन को ३६ से ७५ लाख रुपये के साथ ही पूरी तनख्वाह आजीवन देने का दायित्व निभाया. सहारा में कल्पना में भी ऐसा कभी हो सकता है? दरअसल सहारा परिवार में केवल पांच ही सदस्य हैं सुब्रत रॉय खुद, उनकी पत्नी श्रीमती स्वप्ना रॉय जी, बेटे सुशांतो और सीमान्तो रॉय (जिन्हें लोग राजकुमार कहते हैं) और भाई जयब्रत. इस परिवार का एक्सटेंशन ज्यादा से ज्यादा दोनों बहुओं, बहन और बहनोई तक जाता है. बस. यह है परिवार, बाकी लोग कर्मचारी.

कंपनी या एस.आई.जी.?

सहारा कंपनी हर महीने कभी परिवार बन जाती है और कभी प्रोफेशनल कंपनी. यह कब परिवार  बने और कब प्रोफेशनल कंपनी यह इसके मालिकों पर निर्भर है. अगर कर्मचारियों से काम लेना हो अनुशासन का कोड़ा मारना हो तो प्रोफेशनल, अगर कर्मचारियों के हक में कुछ देना हो तो परिवार. दरअसल सहारा एक संगठन नहीं, एक एसआईजी (स्पेशल इन्ट्रेस्ट ग्रुप) है, जिसमें सभी के हित सीमित हैं और यह ग्रुप अपने हितों के लिए एक हो जाता है. (इसकी पुष्टि इस लेख के साईट पर आने के बाद के कमेंट्स से हो जायेगी.). सहारा में सारे अधिकार केन्द्रित हैं. लखनऊ में ही सहारा का सबकुछ है.

यूनियन ना होना गर्व या शर्म की बात?

सहारा कंपनी में इसकी स्थापना से ही दावा किया जाता रहा है कि यहाँ कभी भी यूनियन नहीं बनी. अंशकालिक - पूर्णकालिक कर्मचारियों और कमीशन एजेंटों का इतना बड़ा   समूह, मैनेजमेंट के तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ कभी बोल ना पाए, इसके लिए यूनियन ज़रूरी थी और है. दरअसल जिस बात पर श्री सुब्रत रॉय गर्व करते हैं, वह  गर्व की नहीं, शर्म की बात होनी चाहिए, लोकतान्त्रिक ना होने में कैसा गर्व? जहाँ  कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के लिए कर्तव्य कौंसिल नाम का  फर्जी गिरोह अधिकारिक रूप से बना दिया गया हो, जिसका एक और एकमात्र काम पुराने कर्मचारियों को एच आर विभाग की मदद से तंग करना है, ताकि किसी कर्मचारी को अनुशासन के नाम पर, किसी को आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप में, किसी को अक्षमता के नाम पर हटाया जा सके. कानूनी प्रावधानों से बचने का आसान तरीका पहले तबादला और फिर प्रताड़ना आम है. तीन  माह में चार चार तबादले भी किये गए हैं, कानपुर के आदमी को गुवाहाटी भेजा जाए और गृहस्थी ले जाने को तीन हजार रुपल्ली ही मिले तो कर्मचारी किससे तकलीफ बताये?  ये सब कानूनी तरीके हैं, लेकिन संवेदना इसमें कहाँ है?

सेबी को दी जानकारी यह रही :

श्री सुब्रत रॉय नॉन बैंकिग फाइनांस कंपनियों के इतने बड़े नेता हैं लेकिन वे खुद निवेशकों से शायद ही कभी मिलते हों. उनका सारा कारोबार एजेंटों और ब्रोकरों के माध्यम से चलता है. सभी इन्वेस्टर्स और ब्रोकर्स सहारा की वेबसाईट पर सेबी को भेजे गए सफाइनामे को ज़रूर पढ़ लें (http://www.saharaindiapariwar.org/sebi-pdf)  जिसमें ग्रुप के लायबिलिटीज स्टेटमेंट में बताया गया है कि ग्रुप पर ३० जून २०१० को  कुल ३४, ३२८ करोड़ रुपये की देनदारियां थीं. सहारा प्राइम सिटी का पब्लिक  इश्यु लाने  के लिए सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इण्डिया को सहारा कंपनी ने जो जानकारियां दी थीं,  वे भी दिलचस्प हैं. इंडियन कंपनीज़ एक्ट १९५६ की  धारा ६०-बी के तहत  ९ सितम्बर  २००९ को जमा किये गए  कुल ९३४ पेज के इस  दस्तावेज में (पेज १६)बताया गया है कि  श्री सुब्रत रॉय की चेयरमैनशिप वाली ग्रुप कंपनियों पर कुल १३० अपराधिक मामले आई पी सी की धारा 405, 406,408, 409, 418, 420, 467, 468, 471 और  474 के तहत चल रहे हैं. इसी रिपोर्ट में पेज २२ पर  बताया गया है कि हमारे २१७ प्रोजेक्ट्स में से १६ पर काम चल रहा है और ७७ पर भविष्य में काम होगा.  हम इनमें से कई प्रोजेक्ट  कई साल तक पूरे नहं कर पायेंगे. हमारे कई प्रोजेक्ट्स विकास की दशा में हैं और कई ख़तरो से जूझ रहे हैं. इसी दस्तावेज़ में पेज 31 पर बताया गया है कि सहारा ग्रुप की कंपनियों पर आर्बीट्रेशन  प्रॉसिडिंग के २, उपभोक्ता मामलों के ८१४, आर्थिक  अपराध के ६, श्रम मामलों के १६०, कानूनी तौर पर भुगतान रोकने के १० केस चल रहे हैं. इनकम टेक्स और दूसरे टेक्स सम्बन्धी मामलों के ३५२ प्रकरण चल रहे हैं जो  ४,574  करोड़  ३४ लाख रुपये के हैं.  सुप्रीम कोर्ट में ३ और विभिन्न  हाईकोर्ट में ६७ केस अलग हैं. इस दस्तावेज़ में सहारा कंपनी ने साफ़ साफ़ लिखा है कि ५,२४० करोड़ १६ लाख रुपये की उसके पास कोई व्यवस्था नहीं है. इसी दस्तावेज़ में आगे लिखा है कि सहारा की कंपनियों, सहायक  कंपनियों, प्रमोटर्स और फुल टाइम तथा पार्ट टाइम डायरेक्टर्स के लिए आकस्मिक दायित्व के रूप में ९,८२३ करोड़ ३६ लाख ८८ हजार की व्यवस्था ही नहीं की गयी है. यानी ३४, ३२८ करोड़ रुपये की देनदारियां तो हैं  ही, ९,८२३ करोड़ के दायित्व भी कभी भी आ सकते हैं. सहारा कंपनी ने सेबी को अपनी बुक वेल्यु के मान से ५४, ९६८ करोड़ रुपये की संपत्तियां भी बताई हैं. सहारा कंपनी ने आठ साल पहले 217 शहरों  में मकान बनाकर  बेचने के लिए बुकिंग शुरू की थी, इतने साल में कई बिल्डर्स आये और एक एक दर्जन प्रोजेक्ट्स पूरे करके मुनाफा कमाकर निकल गए, लेकिन सहारा केवल एक शहर में ही मकान बनाकर दे पाया.  सहारा एयर लाइन का जो हश्र हुआ, सबको पता ही है.

इन्वेस्टर्स के हित में रिटायर हों

श्री सुब्रत रॉय को ६० साल का हुए तीन साल हो चुके हैं. उन्होंने १८ घंटे तक रोजाना काम किया है. वे हजार साल तक जीयें, यही दुआ है, लेकिन दुआओं से कुछ होता नहीं. जिस तरह से वे अपने एजेंटों और कर्मचारियों से बर्ताव करते हैं, अपने आप को लाखों लोगों का अभिभावक कहते हैं, सुबह के दस बजे से अगली सुबह के तीन बजे तक के भाषण (या प्रवचन) देते हैं और लखनउ में सहारा शहर में सैकड़ों एकड़ के भव्य महल में सफ़ेद वस्त्रों में और घोड़े पर सवार अंगरक्षकों के बीच रहते हैं और राष्ट्रपति की तरह बिना नंबर की कार में घूमते हैं, उसे देखकर लगता है कि उन्हें अब आराम की ज़रुरत है और उन्हें अपना उत्तराधिकारी खोज लेना चाहिए. कहीं ऐसा ना हो कि एन. बी. बोंड्स के नवभारत समूह के मालिक श्री रामगोपाल माहेश्वरी के बाद जैसे वहां परिवार में संघर्ष शुरू हो गया था, वैसा ही कुछ सहारा में हो और लाखों इन्वेस्टर्स भटकते रहे. इन्डियन एक्सप्रेस ग्रुप जैस भी ना हो कि संपत्ति के विवाद कोर्ट तक जाएँ, यों भी मायावती उनके पीछे पड़ी हैं और सेबी, आरबीआई, प्रवर्तन निदेशालय में मामले पेंडिंग हैं. मुलायम, अमर, अमिताभ, अनिल सब दूर हैं और बेटों से मतभेद की खबरें भी आती रहती हैं.

लेखक प्रकाश हिंदुस्तानी इंदौर के निवासी हैं. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ और जाने-माने पत्रकार हैं. कई मीडिया हाउसों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन दिनों स्वतंत्र पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं. उनसे संपर्क 09893051400 या This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए किया जा सकता है.


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