निशंक का न्योता- रामदेव उत्तराखंड में सत्याग्रह करें, दिक्कत न होगी

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दिल्ली के रामलीला मैदान से पुलिस कार्रवाई के जरिए सत्याग्रह-अनशन खत्म कराके बाबा व उनके भक्तों को बेदखल किए जाने के बाद जो ताजी स्थिति है, उसके मुताबिक रामदेव को सेना के हेलीकाप्टर से हरिद्वार ले जाया जा रहा है.  केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई भी बता चुके हैं कि आपरेशन रामदेव के तहत बाबा को हरिद्वार भेजा जाएगा. उधर, बाबा के हरिद्वार पहुंचने की भनक मिलते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अंदर की राजनीतिक आत्मा जाग चुकी है.

उन्होंने तुरंत बयान दे दिया कि काले धन के खिलाफ बाबा रामदेव चाहें तो उत्तराखंड की धरती से अपना सत्याग्रह जारी रख सकते हैं. निशंक ने बाबा को न्योता भेजते हुए कहा कि उन्हें यहां आंदोलन चलाने पर कोई दिक्कत न आएगी. अब जरा कोई निशंक से पूछे कि अगर बाबा रामदेव ने अगर उत्तराखंड में सरकार द्वारा किए गए घपले-घोटालों की जांच तय समय में कराने और दोषियों को फांसी देने की मांग के साथ भूख हड़ताल शुरू कर दी तो क्या होगा. करीब दर्जन भर छोटे-बड़े घोटाले के आरोपी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक मीडियाकर्मियों के उत्पीड़न और दमन के भी अपराधी हैं.

स्टर्डिया घोटाला से लेकर जाने कौन-कौन से घोटाले हुए और निशंक के दामन बार बार दागदार हुए पर भाजपा के इस नेता व मुख्यमंत्री को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अभयदान दे रखा है, सो निशंक अभी तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन है. पर राजनीति के खेल में निशंक को लगता है कि बाबा रामदेव का आंदोलन कांग्रेस की केंद्र सरकार के खिलाफ है, इसलिए उन्होंने फटाफट बयान दे डाला कि रामदेव चाहें तो अपना सत्याग्रह उत्तराखंड की धरती से जारी रख सकते हैं.

कोई इन राजनेताओं से पूछे कि करप्शन चाहे कांग्रेस का हो या भाजपा का, वह तो करप्शन ही है. कांग्रेस से कम करप्ट नहीं है भाजपा. और भाजपा के जिन कुछ राज्यों में सर्वाधिक करप्शन की चर्चा होती है, उनमें एक उत्तराखंड भी है. पर नेताओं को शरम और लाज कहां आती है. अपने को उजला बताकर दूसरी पार्टियों को कालिख पुता बताएंगे. कांग्रेस और भाजपा, दोनों की सरकारों के भ्रष्टाचार और दोनों के नेताओं की अकूत संपत्ति का पता लगाकर सारे धन का राष्ट्रीयकरण कर लिया जाना चाहिए.


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