ईटीवी के कार्यक्रम में हंगामा शूट करने वाले पत्रकारों को कमरे में बंद किया गया

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पत्रकारिता जगत के बड़े नाम हैं संतोष भारतीय. देश भर में ईमानदारी, निर्भिकता के दावों के साथ बैनर-पोस्‍टर पर इनकी तस्‍वीरें दिखती हैं. पर गुरुवार को पटना में जो घटना हुआ उसने इनके ईमानदारी पर सवालिया निशान खड़ा किया. ईटीवी द्वारा पटना के रविंद्र भवन में ईटीवी के द्वारा अल्पसंख्यकों की समस्याओं पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. भारतीय साहब उस कार्यक्रम के प्रस्‍तोता यानी सूत्रधार थे.

कार्यक्रम ठीक ठाक चल रहा था. जब जदयू सांसद एवं पसमांदा समाज के नेता अली अनवर ने भाषण देना शुरू किया तो नीचे बैठे दूसरे मुस्लिम नेता बवाल काटने लगे. अनवर अली की हूटिंग शुरू हो गई. दरअसल अनवर साहब की बात उन नेताओं को नागवार गुजर रही थी. स्थिति जूतम पैजार की हो गयी. मंच पर ही धक्का मुक्की भी होने लगी. कार्यक्रम चूंकि एक मीडिया हाउस का था, इसलिए पटना के मिजाज के हिसाब से किसी दूसरे चैनल का कोई बंदा वहां मौजूद नहीं था.

अलबत्ता एक प्रोडक्‍शन हाउस नाइटशेड मीडिया के दो पत्रकार मौजूद थे. जो एक चैनल के लिए पड़ताल नाम से कार्यक्रम बना रहा है. मुसलमानों पर बनने वाले एक एपिसोड के लिए बाइट और फुटेज का जुगाड़ करने के लिए उसके कैमरापर्सन और रिपोर्टर वहां मौजूद थे. दोनों नये नये थे. इन दोनों ने पूरे बवाल को पूरी तरह रिकार्ड कर लिया. सारा मामला कैमरे में सूट कर लिया गया. ईटीवी ने भी हंगामें के बाद अपना लाईव प्रसारण रोक दिया.

इसी बीच ईटीवी के लोगों और संतोष भारतीय साहब की नजर इन दो मीडियाकर्मियों पर पडी. उन्होंने आनन फानन में दोनों को बुलवाया तथा कैसेट देने को कहा. दोनों मीडियाकर्मियों द्वारा कैसेट देने से इनकार करने के बाद उन्‍हें रविंद्र भवन के ही एक कमरे में बंद कर दिया गया. उनके इशारे पर उनके लोगों ने दोनों पत्रकारों के टेप से उन दृश्‍यों को जबरिया मिटवा दिया जिसमें उन लोगों ने जूतमपैजार की घटना को शूट किया था.

इस संबंध में नाइटशेड मीडिया के आउटपुट हेड प्रमोद दत्‍त ने कहा कि उनके पत्रकारों से कहा गया कि ये चैनल का प्रोग्राम था तो तुम लोग कैसे चले आए. जब एक चैनल का प्रोग्राम था तो फिर उसे सेमिनार बताकर अखबारों में छपवाने की क्‍या जरूरत थी. यह तो पत्रकारों के अभिव्‍यक्ति के स्‍वतंत्रता पर हमला है. वह भी संतोष भारतीय जी जैसे बड़े पत्रकार के सामने हुई, जो और भी अधिक चितंनीय है. मेरे पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव किया गया.

इस संबंध में जब संतोष भारतीय से बात की गई तो उन्‍होंने इस तरह की बात से साफ इनकार करते हुए कहा कि ऐसी तो कोई घटना ही नहीं हुई थी. मैं खुद आपके मुंह से यह बात सुन रहा हूं कि मैंने किसी के टेप से फुटेज डिलीट करवाईं. यह सरासर झूठ है, और जिस मीडिया हाउस का नाम बताया जा रहा है, उसे भी पहली बार सुन रहा हूं. वैसे भी यह ईटीवी का कार्यक्रम था. मुझे क्‍या जरूरत पड़ गई कि मैं ऐसा काम करूं.


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