जमीन की जंग लड़ने वाले पत्रकारों की संस्‍था में ही करोड़ों का घोटाला

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इन्दौर । जमीन की जंग लड़कर भूमाफियों के सरदार बाबी छाबड़ा को भले ही मीडिया ने जेल की हवा खिला दी हो मगर हजारों सदस्यों को अभी तक भूखंड नहीं मिल सके। वहीं पत्रकार खुद अपनी जमीन ही नहीं बचा सके। पत्रकारों की गृह निर्माण संस्था ही पूरी भूमाफियों के हाथों बिक गई और एक भी पात्र पत्रकार भूखंड हांसिल नहीं कर सका।

संवादनगर एक्सटेंशन के नाम पर काटी जाने वाली कालोनी की इन्दौर के बिचौली हप्सी एवं टिगरियाराव की 8.30 एकड़ जमीन पर 199 फर्जी सदस्यों के नाम रजिस्ट्री हो गई, अब सहकारिता विभाग 365 सदस्यों की सूची को टांग कर दावे आपत्ति बुलाने की खानापूर्ति में जुटा हुआ है। नवलखा के पास जो संवादनगर बसा है उसमें 37 भूखंडों पर मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल ने मकान बनाए थे, जो पत्रकारों को आवंटित किए गए। उसके बाद संवादनगर एक्सटेंशन के नाम पर इसी संस्था ने ग्राम बिचौली हप्सी और टिगरियाराव में आवासीय जमीन खरीदी और 1993 से 1997 तक इन जमीन की रजिस्ट्री संस्था के पक्ष में हो गई।

संस्था का पंजीकृत पता 80 वल्लभनगर इन्दौर था, जो बदलकर वर्तमान में 6 एमजी रोड इन्द्रप्रस्थ टॉवर हो गया। हालांकि पता परिवर्तन की कोई सूचना सहकारिता विभाग को नहीं दी गई। संस्था के 2008-09 के आडिट में सहकारिता विभाग ने भी जबर्दस्त अनियमितताएं पाई हैं। इस आडिट रिपोर्ट के अनुसार संस्था में जहां वरीयता क्रम का उल्लंघन किया गया और नए सदस्यों को भूखंड देकर उनकी रजिस्ट्रीट कर दी गई। ये सभी गैर पत्रकार सदस्य थे। साल 2008-09 में संस्था ने 365 सदस्य बनाए जो विधान के विपरीत थे।

संस्था ने 8.30 एकड़ भूमि पर 276 भूखंड विकसित करना बताए,  जिसमें से संवादनगर एक्सटेंशन में 120 और तिलकनगर एनएक्स में 79 इस तरह कुल 199 भूखंडों को फर्जी सदस्यों को आवंटित कर उनकी रजिस्ट्रियां करवा दी और संस्था के जो पत्रकार सदस्य बनाए गए उसमें से एक को भी भूखंड हांसिल नहीं हुआ। वर्तमान में 27 भूखंड बचे हैं। अब सहकारिता विभाग सभी 365 नए पुराने सदस्यों की सूची टांगकर दावे आपत्तियां बुला रहा है, जिसकी समयावधि समाप्त होने पर कई पत्रकार सदस्यों ने हल्ला मचाया तब दावे आपत्तियों की सुनवाई की अवधि को बढ़ाया गया।

आडिट रिपोर्ट में सहकारिता विभाग ने यह भी पाया कि कालोनी के विकास में जो 65 लाख 83 हजार रुपये खर्च किए गए, उसका भी विधिवत अनुबंध विकास करने वाली फर्म के साथ नहीं किया गया और ना ही चेक से भुगतान हुआ। जबकि 20 हजार से अधिक का भुगतान अकाउंट पेई चेक से होना चाहिए। संस्था के कर्ताधर्ताओं ने एमके कंस्‍ट्रक्‍शन कम्पनी से विकास करवाकर लाखों का भुगतान नकद कर दिया, सालों पूर्व संस्था भूमाफियों के हाथ में बिक गई। इस संस्था में इन्दौर के पत्रकार जयकिशन गौड, प्रेस क्लब के अध्यक्ष सतीश जोशी जैसे लोग पदाधिकारी रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इन्दौर का जिला प्रशासन जिन 25 दागी संस्थाओं की जांच कर रहा है उसमें संवादनगर भी शरीक है। बहरहाल इन्दौर के अधिकांश पत्रकार अपनी किस्मत को कोस रहे हैं, सालों पहले सदस्य बने ये पत्रकार अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इन्दौर की पत्रकारिता में यह सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है।

इंदौर से अर्जुन राठौर की रिपोर्ट.


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