अन्ना के मंच से उतारी गईं वामपंथी नेता

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कविता कृष्णननई दिल्ली : राजघाट पर जुटे अन्ना हजारे के हजारों समर्थकों ने जंतर-मंतर की तरह ही एक बार फिर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में अन्य दलों के नेताओं को किसी भी तरह से जुड़ने नहीं दिया। अगर कोई पार्टी से जुड़ा व्यक्ति मंच पर दिखा भी तो उसे लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा और मजबूरन उस नेता को चुपचाप वहां से खिसक लेना पड़ा।

नेताओं से मोहभंग की अपनी इन भावनाओं का लोगों ने पोस्टरों, नारों और गानों के माध्यम से इजहार भी किया। अन्ना के पिछले आंदोलन के दौरान जहां चौटाला और उमा भारती को अपमानित होना पड़ा था तो इस बार के आंदोलन के दौरान एक महिला कम्युनिस्ट नेता की दुर्गति हो गई। राजघाट पर अन्ना हजारे के अनशन के दौरान जब मंच संचालक ने मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी विचारधारा से जुड़ी एक महिला नेता को बोलने के लिए आमंत्रित किया तो लोग अन्ना के मंच से नेता को बोलने का मौका दिए जाने की बात सुनकर भड़क गए। इस महिला नेता ने मंच से जैसे ही लोगों को संबोधित करना शुरू किया तो वैसे ही अन्ना समर्थकों के एक बड़े हुजूम ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध के स्वर बढ़ते गए। आखिरकार भाकपा माले नेता को अपना वक्तव्य बीच में ही बंद करके मंच से उतर जाना पड़ा।

इस महिला नेता का नाम है कविता कृष्णन। ये कभी जेएनयू में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की नेता हुआ करती थीं। इन दिनों भाकपा माले की केंद्रीय समिति की सदस्य हैं। जानकारी के मुताबिक राजघाट पर अन्ना के अनशन के दौरान मंच संचालक ने भाकपा माले और आइसा से जुड़ीं कविता कृष्णन को बोलने के लिए आमंत्रित किया। कविता ने जब मंच पर आकर लोगों को संबोधित करना शुरू किया तो कई लोग उन्हें मंच से उतारने की आवाज उठाने लगे। थोड़ी ही देर में काफी संख्या में लोग इस नेता को मंच से हटाने की मांग करने लगे। माहौल बिगड़ता देख वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और मंच संचालक ने कविता कृष्णन से मंच से उतरने की अपील की। अंततः कविता को अन्ना के मंच से हटना पड़ा और इसी के बाद वहां मौजूद भीड़ शांत हुई।

गौरतलब है कि अन्ना हजारे और उनके समर्थक पहले भी इस बात को कहते रहे हैं कि उनके अनशन में मंच पर किसी राजनेता या राजनीतिक विचारधारा से जुड़े व्यक्ति को नहीं आने दिया जाएगा। इससे पहले चार अप्रैल से जंतर मंतर पर हुए अन्ना के अनशन में भी उमा भारती और ओम प्रकाश चौटाला जैसे नेताओं को लोगों ने मंच पर नहीं चढ़ने दिया था। यही नहीं, यहां मौजूद कई लोगों में इस बात को लेकर भी रोष देखने को मिला है कि बाबा रामदेव के कार्यक्रम में साध्वी रितंभरा और संघ परिवार के करीबी लोगों को क्यों मंच से जोड़ा गया।


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