सोनिया गांधी की नाक के नीचे रेल कोच भर्ती घोटाला!

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: रायबरेली रेल कोच फैक्‍टरी में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले जा रहे हैं लाखों : सोनिया के जनसंपर्क कार्यालय में भी नहीं हो रही पीडि़तों की सुनवाई :  रायबरेली की मीडिया भी मैनेज :  पत्रकारों का एक दल भी है नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने में सक्रिय : अपने ही संसदीय क्षेत्र के लोगों की परेशानी नहीं सुन पा रही हैं यूपीए चेयरपरसन :  मामला खुलने पर दिये जाने वाले अधिकमांश चेक हो जाते है बाउंस :

सोनिया गाँधी की यूपीए सरकार संकट से गुजर रही है और तमाम मुद्दों से घिर चुकी है और इस मुसीबत की जड़ उनके ही सिपाहसलार हैं, जो शायद चाहते ही नहीं हैं कि ये सरकार मुसीबत से निकले. शायद इसलिए क्यूं कि खाली होते ही सुप्रीमों का ध्यान उनके काले कारनामों की तरफ चला जायेगा. मामले रायबरेली का है, जहाँ से वो चुनाव जीत कर देश की सर्वोच्च संस्था संसद तक पहुंचती हैं.  यहीं उनके कारिंदे अपने जाल के जरिये कर रहे हैं करोड़ों के वारे न्यारे. और इनके शिकार सिर्फ दर दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

सोनिया गाँधी को तो पता भी नहीं होगा कि उनके हर दौरे में साथ-साथ चिपके रहनेवाले कल्याण सिंह गाँधी उनके नाम के गाँधी शब्द का कितना फायदा ले रहे हैं,  लोगों से खुद को उनका रिश्तेदार बतानेवाले ये गाँधी जी वैसे तो व्यवसायी हैं, किन्तु रायबरेली में खुल रही रेल कोच फैक्टरी में भर्ती के नाम पर लोगों का करोड़ों डकार कर बैठे हैं. इन्होंने बाकायदा यहाँ पर एक टीम बना रखी है और उस टीम में मेम्बर सिर्फ कांग्रेसी ही नहीं बल्कि कुछ पत्रकार भी शामिल हैं,  जो इसी कांग्रेस के रहमोकरम पर कहने के लिए तो दूरदर्शन दिल्‍ली में पत्रकार हैं,  किन्तु अगर रोहित सिंह सोनिया के जन संपर्क कार्यालय में आप कभी भी पहुंच कर देखें तो वहां इलाज के पैसे दिलाने से लेकर नौकरी लगवाने तक में दलाली करते नज़र आ जायेंगे और यही वो लोग हैं जिनके अकाउंट में पैसे ट्रान्सफर कर ये पूरा खेल होता है.

इनके नाम हैं विकास सिंह (दूरदर्शन),  कल्याण सिंह गाँधी (स्वम्भू कांग्रेसी और व्यवसायी),  रोहित सिंह (कांग्रेसी). रेल कोच ही नहीं बल्कि एसबीआई सहित वो तमाम संस्था,  जिस में केंद्र का इन्वाल्मेंट हो सब में काम कराने की जिम्मेदारी इस ग्रुप की होती है.  यही नहीं जब कोई मामला खुल जाता है तो उसको ये फर्जी अकाउंट की चेक भी दे देते हैं, लेकिन चेके तो कैश होती नहीं हैं. लिहाज़ा पीडि़त पक्ष सोनिया गाँधी के जनसंपर्क कार्यालय में अक्सर रोते बिलखते धरना देते मिल जायेंगे.  घर में अपने बच्चों का पेट काट- काट कर इतनी बड़ी रकम इन्होंने अपने परिवार के उज्ज्‍वल भविष्य के लिए दी थी,  न कि अपनी ज़िन्दगी नरक करने के लिए.

कल्‍याण

इतनी बड़ी लूट जिले में हो और जनसम्‍पर्क कार्यालय को हिस्सा न मिले ऐसा नहीं हो सकता,  तभी तो यहाँ मौजूद कार्यालय प्रभारी इनको बेइज्जत कर के भगा भी देते हैं.  ऐसे में सोनिया गाँधी के क्षेत्र में खुल रहे कोच कारखाने के खुलने के पहले ही हो रही इस कथित भर्ती पर, गरीबों की गाढ़ी कमाई के वारे न्यारे करनेवालों को सजा कौन देगा?  सोनिया गाँधी जैसी शख्सियत को बदनाम करने में उनके लोग ही बड़ी भूमिका निभा रहे हैं,  अब इनको सजा कौन देगा जिनके साथ पत्रकारों की बड़ी फ़ौज खड़ी हो,  तभी तो ये पीडि़त लोग बच्चों के साथ हफ़्तों से भूखे प्यासे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होकर कांग्रेस कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं और देश का चौथा स्तम्भ एक लाइन खबर लिखने में भी शर्म महसूस कर रहा है.  शायद हम इंतज़ार कर रहे हैं देश का अगले बड़े भर्ती घोटाले का लेकिन रायबरेली की बिकाऊ मीडिया इस पर मौन क्यूं है?

पीडित

चेक

 


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