सरकार का फरमान मास्टरी करो या पत्रकारिता, दो बर्खास्‍त

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पूर्वोत्तर राज्य असम में दो शिक्षकों को इसिलए बर्खास्त कर दिया गया है कि वे शिक्षण कार्य के साथ पत्रकारिता भी कर रहे थे। राज्य के नए शिक्षा मंत्री डा. हिमंत विश्च शर्मा ने कहा है कि दोनों कार्य एक साथ नहीं हो सकता। या तो मास्टरी करें या फिर पत्रकारिता। बर्खास्त दोनों शिक्षक कदर्प सहारिया और राजेन्द्र नाथ हजारिका दोनों शिक्षक मंगलदै के हैं।

ये दोनों शिक्षक पैसों के लिए कम शौक के लिए ज्यादा पत्रकारिता से जुडे़ हुए थे। इनका कहना है कि कस्बाई या जिले के पत्रकारों को कितना पैसा मिलता है। हम तो पत्रकारिता को एक समाज सेवा मान कर कभी-कभार लिखा करते थे। इससे शिक्षण का कार्य  कदापि प्रभावित नहीं हो रहा था। यहां बताते चलें कि असम के ज्यादा कस्बाई पत्रकार शिक्षक हैं। इनका लिखने का शौक भी पूरा हो जाता है और दो-चार पैसे (सेंटीमीटर से न्यूज को माप कर) मिल भी जाता है।

क्योंकि ये बेचारे शिक्षक ऐसे प्रदेश के शिक्षक हैं जहां वेतनमान देश के अन्य सभी राज्यों के शिक्षकों से कम है। यानी यहाँ के शिक्षकों का वेतनमान देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है. सो ये लोग दो-चार पैसे के जुगाड़ में रहते हैं। और यदि यह पत्रकारिता से आ जाता है तो फिर इसमें बुराई क्या है। वैसे बताते चलें कि इस अहिन्दी प्रदेश में जहां हिन्दी लिखने वाले पत्रकारों की भारी कमी है, वहीं ज्यादातर शिक्षक हिन्दी अखबारों से जुडे़ हैं और सरकार का यह फरमान हिन्दी अखबारों के लिए एक मुसीबत खड़ा कर दिया है।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.


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