जर्मन रेडियो डायचे वेले की भी छुट्टी

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बीबीसी के बाद जर्मन रेडियो डॉयचे वेले ने भी भारत को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है. डॉयचे वेले के हिन्दी विभाग में जबरदस्त छंटनी होने वाली है. इसके साथ ही रेडियो से 47 साल पुराना उसका नाता पूरी तरह टूट जाएगा. जर्मन रेडियो के मुख्यालय ने एक जुलाई से बदलाव की घोषणा कर दी है और इस दिशा में एक सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है. इससे पहले वॉयस ऑफ अमेरिका अपनी हिन्दी सर्विस बंद कर चुका है.

बीबीसी ने भी ऐसी ही कोशिश की थी लेकिन ब्रितानी संसद में सवाल उठाए जाने के बाद उसे रेडियो का हिन्दी कार्यक्रम जारी रखने का फैसला करना पड़ा. डॉयचे वेले ने यह निर्णय ऐसे समय में किया है, राजनयिक रिश्तों के 60 साल पूरा होने पर जर्मनी और भारत में खास कार्यक्रम हो रहे हैं और हाल ही में उनकी चांसलर अंगेला मैर्केल को नेहरू शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. जर्मन रेडियो के एक सूत्र ने बताया कि प्रबंधन रेडियो और वेबसाइट के जमे जमाए क्षेत्र को छोड़ कर वीडियो और टेलीविजन की तरफ जाना चाहता है. हालांकि इसके लिए उनके पास जरूरी सुविधाएं नहीं हैं.

इस फैसले के साथ ही हिन्दी विभाग के आधे पत्रकारों की छंटनी की भी योजना है, जिसका असर उनकी वेबसाइट पर भी पड़ेगा. डॉयचे वेले रेडियो का हिन्दी कार्यक्रम भारत में बेहद लोकप्रिय हुआ करता था. उसकी सेवा बंद होने के बाद हिन्दी बेल्ट में शॉर्ट वेब रेडियो का विशाल मैदान बीबीसी और रेडियो चाइना के लिए साफ हो गया है. रेडियो चाइना अपनी सेवा में लगातार विस्तार कर रहा है.

डॉयचे वेले का यह फैसला चौंकाने वाला है क्योंकि हाल ही में जर्मनी की बेहद लोकप्रिय टेलीविजन चैनल आरटीएल ने भारत की रिलायंस के साथ मिल कर बड़े पैमाने पर शुरुआत करने के एलान किया है. समझा जाता है कि डॉयचे वेले का यह कदम जर्मन रेडियो की हिन्दी सेवा को पूरी तरह बंद करने की दिशा में उठाया गया है.


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