निशीथ राय के घर पर पुलिसिया तांडव की देश भर में निंदा

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: बौखला गयी है मायावती सरकार : लोकतंत्र में निरंकुशता के लिए जगह नहीं- नीतीश : यूपी में लगाया जाए राष्ट्रपति शासन- एनयूजेआई : पटना। हिन्दी दैनिक ‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट’ के चेयरमैन डा. निशीथ राय और ख्यातनाम साहित्यकार स्व. प्रो. रामकमल राय के इलाहाबाद स्थित पैतृक आवास पर की गयी पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्ति की गयी है।

राजनेताओं से लेकर पत्रकार संगठनों ने यूपी पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतंत्र और मीडिया का गला घोटना बताया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना की निन्दा करते हुए कहा कि सत्ता खिसकने का भय जब सताने लगता है तो ऐसी ही बौखलाहट सामने आती है। मगर लोकतंत्र के लिए इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में जब इस तरह की स्थिति पैदा हो जाए और लोकतंत्र पर संकट महसूस होने लगे तो संविधान के दायरे में विचार करना जरूरी हो जाता है। केन्द्र को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए। लोकतंत्र में निरंकुशता के लिए कोई जगह नहीं है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी यूपी पुलिस की कार्रवाई को अनुचित और अलोकतांत्रिक ठहराते हुए कहा कि यह सरासर मानवाधिकार का उल्लंघन है। आधी रात में हुई कार्रवाई निश्चित तौर पर सत्ता के इशारे पर हुई प्रतीत होती है। सरकार को ऐसे हत्थकंडे से बाज आना चाहिए। अपने विरोधियों को दबाने का यह तरीका न केवल आपत्तिजनक है बल्कि अलोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों का हनन करने वाली भी है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद राधामोहन सिंह ने कहा कि मायावती हमेशा अपने विरोधियों के खिलाफ पुलिस तंत्र का उपयोग करती रही है। मगर लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। मीडिया पर प्रहार एक तरह से लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश होती है मगर समय आने पर जनता हिसाब बराबर कर लेती है।

लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने भी डेली न्यूज एक्टिविस्ट के चेयरमैन डा. निशीथ राय और कांग्रेस नेता उत्पल राय के पैतृक आवास पर आधी रात बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई की निन्दा की है। दिल्ली से पटना आने पर उन्होंने कहा कि यूपी की मायावती सरकार बौखला गयी है। अनियंत्रित हो गयी कानून-व्यवस्था की स्थिति को बहाल करने में विफल रही सरकार बौखलाहट में अनाप-शनाप कार्रवाई कर रही है। हत्या, बलात्कार, किसानों के शोषण और गरीबों का जैसा उत्पीड़न यूपी में हाल के दिनों में देखने को मिला है, उससे साफ हो गया है कि मायावती सरकार की विदाई तय है। रेत की तरह हाथ से सत्ता को फिसलते देख मायावती सरकार पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर लोगों में भय और दहशत पैदा करना चाहती है। ऐसी सरकार को अविलम्ब बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक गतिविधियों में लिप्त रहने वाली सरकार को एक क्षण भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए।

वहीं, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स,इंडिया की बिहार इकाई की हुई आपातकालीन बैठक में हिन्दी दैनिक ‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट’ के चेयरमैन के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर यूपी पुलिस की ओर से की गयी कार्रवाई की तीखी आलोचना की गयी। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष आर के विभाकर और संगठन मंत्री प्रमोद दत्त ने यूपी सरकार की कार्रवाई की निन्दा करते हुए इसे मीडिया की स्वतंत्रता का हनन करार दिया। यूनियन ने महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेज कर यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। यूनियन का मानना है कि पुलिसिया कार्रवाई से न केवल मीडिया को भयभीत किया गया है बल्कि मानवाधिकार का उल्लंघन भी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट को अविलम्ब इस घटना को संज्ञान में लेकर यूपी सरकार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।


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