अजय सेतिया की चाटुकारिता का ऋण उतार रहे हैं राजनाथ सिंह

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दीपक आजाद: दिल्‍ली बेस्‍ड पत्रकार को सूचना आयुक्त बनाने पर उत्तराखंड में छिड़ा विवाद :  राज्यपाल ने लौटाई नियुक्ति फाइल :  उत्तराखंड में इन दिनों राज्य सूचना आयोग में दिल्ली से आयातित और उत्तराखंड के लिए एक अनाम से पत्रकार अजय सेतिया को सूचना आयुक्त बनाए जाने को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। विवाद की जड़ मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की वह जिद है,  जिसके तहत वे हर हाल में सेतिया को सूचना आयोग का दामाद बनाने पर तुले हुए हैं।

इसके बावजूद कि एक करोड़ बीस लाख आबादी वाले उत्तराखंड में मुख्य सूचना आयुक्त समेत चार सूचना आयुक्त पहले से ही नियुक्ति हैं, ऐसे में सूचना आयोग में आयुक्तों की फौज खड़ी करने की यह जिद किसी के गले नहीं उतर रही है। सवाल उठ रहा है कि अगर निशंक को आयोग में पांचवें आयुक्त की नियुक्ति करना इतना जरूरी लगता भी है तो क्या उत्तराखंड में उन्हें ऐसा कोई शख्स नजर नहीं आता जिसे आयुक्‍त बनाया जा सके?

जाहिर सी बात है कि इस राज्य में जनता की दुःख-तकलीफों और जनजीवन के संघर्षों में साथ देने वाले ऐसे पत्रकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है, जिनकी जनता के प्रति निष्ठा असंदिग्ध रही है और है। हां उनका दोष यह हो सकता है कि वे सत्ता की चाटुकारिता नहीं करते और निशंक जैसों को यह रास नहीं आता। एक सूचना आयुक्त की नियुक्ति का सीधा सा मतलब है राज्य पर महीना डेढ़ से दो लाख रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ना। राज्य की माली हालत निरंतर खराब होती जा रही है। एक दशक में ही यह राज्य बाइस हजार करोड़ रुपये के भारी भरकम कर्ज में सांसें ले रहा है।

बहरहाल पिछले दिनों मुख्यमंत्री निशंक ने सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए बनी कमेटी की अनुसंशा के आधार पर राज्यपाल को सूचना आयुक्त के पद पर दिल्ली में पत्रकारिता करने वाले अजय सेतिया की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा। लेकिन जिस कमेटी की सिफारिश के आधार पर निशंक ने राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा, उस कमेटी के एक सदस्य नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत इसका मुखर विरोध कर रहे हैं। रावत ने यह कहते हुए राज्यपाल से इस नियुक्ति का विरोध किया है कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सरकार ने उनकी सहमति नहीं ली। इसके साथ ही रावत ने हिमाचल, हरियाणा और उत्तर पूर्व के कई राज्यों का हवाला देकर राज्य सूचना आयोग में पांचवे आयुक्त की नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा है कि इसकी राज्य को कोई जरूरत नहीं है। राज्य की जरूरत के मुताबिक पहले ही चार आयुक्त नियुक्ति हैं।

वहीं, राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एनएस नपल्चयाल पहले ही आयोग में और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को गैर जरूरी बता चुके हैं। राज्य में दूसरे राजनीतिक दल भी इसका विरोध कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति के बाद राज्यपाल ने अजय सेतिया की नियुक्ति फाइल सरकार को लौटा दी है। अजय सेतिया को भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कृपापात्र माना जाता है। वरिष्ठ पत्रकार राजन टोडरिया बताते हैं- 'अजय सेतिया का पत्रकारिता में ऐसा कोई योगदान नहीं है जिसे सम्मान की नजर से देखा जाय, हां इतना जरूर है कि सेतिया की गिनती राजनाथ सिंह के चाटुकार किस्म के खास चमचों में होती रही है। लगता है सेतिया को सूचना आयुक्त बनवाकर राजनाथ सिंह, निशंक के जरिये इसी का त्रण चुकता कर रहे हैं।'

लेखक दीपक आजाद हाल-फिलहाल तक दैनिक जागरण, देहरादून में कार्यरत थे. इन दिनों स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं.


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