आईएसआई के एजेंट डा. फई के प्यारे इन ग्यारह भारतीय विभूतियों से हो सकती है पूछताछ

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नई दिल्ली : डा. गुलाम नबी फई को पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से खूब पैसा मिलता था. फई पैसे का इस्तेमाल भारतीय बुद्धिजीवियों को कश्मीर पर कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए बुलाने, उनकी आवभगत करने, कई देशों के सांसदों को कश्मीर पर पाकिस्तानी रुख रखने को मजबूर करने के लिए रिश्वत देने जैसे भारत विरोधी कामों में करता था.

अमेरिका में पकड़े गए लॉबिस्ट और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर कश्मीर विवाद पर नजरिया बदलने के उद्देश्य से सेमिनारों की कड़ी चलाने वाले डॉ. गुलाम नबी फई के आयोजनों में कई भारतीय हस्तियां भी हिस्सा रही हैं. सूत्रों के अनुसार भारत सरकार ने जिन प्रख्यात पत्रकार दिलीप पडगांवकर को जम्मू-कश्मीर मामले में प्रमुख वार्ताकार बनाया है वह भी फई के सेमिनार में हिस्सा ले चुके हैं. आईएसआई के सहयोग से आयोजित होने वाले सेमिनार में भाग लेने वालों में प्रख्यात पत्रकार कुलदीप नैय्यर, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, राजेंद्र सच्चर, पत्रकार गौतम नवलखा, हरिंदर बवेजा, मनोज जोशी, हामिदा नईम, वेद भसीन, जेडी मोहम्मद समेत तमाम भारतीय रहे हैं.

सेमिनार में न केवल कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा होती थी बल्कि पाकिस्तान का समर्थन करने वाला प्रस्ताव भी पारित होता था. आईएसआई की सहायता से फई द्वारा चलाए जा रहे इस षडयंत्र का अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने भंडाफो़ड़ किया है और भारत सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है.  केंद्रीय गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि एफबीआई के साथ-साथ भारत भी फई से संपर्क रखने वालों की तह तक जाएगा. इस सूचना के आने के बाद मीरवाइज उमर फारूक के कश्मीर स्थित आवास के बाहर सुरक्षा बलों का घेरा ब़ढ़ गया है. खुफिया एजेंसियां इस संदर्भ में पूरी जानकारी एकत्र करने में लग गई हैं और समझा जा रहा है कि जल्द ही अमेरिका जाकर सेमिनार में हिस्सा लेने वाले कुछ प्रमुख लोगों से पूछताछ भी हो सकती है.

कुल मिलाकर पाकिस्तान के लिए लॉबिंग करने के आरोप में अमेरिका में पक़डे गए कश्मीरी लॉबिस्ट गुलाम नबी फई के खनसनीखेज खुलासे से बवाल खड़ा हो गया है. अब सुरक्षा एजेंसियां फई के आयोजनों में शामिल हुए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुदि्धजीवियों, पत्रकारों और कश्मीरी अलगावादी नेताओं से पूछताछ कर सकती हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने बिना पंजीकरण पाकिस्तान सरकार की ओर से कश्मीर के लिए लॉबी करने के आरोप में फई को गिरफ्तार किया था. एफबीआई ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में फई पर आरोप लगाया है कि उसे पाकिस्तान सरकार के तत्वों, खासकर उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से ऐसे कार्यक्रमों और लॉबिंग करने के लिए पैसे मिलते थे. गृह मंत्रालय एफबीआई की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही कई लोगों से इस संबंध में पूछताछ हो सकती है.

आरोप है कि फई की ओर से कश्मीर पर आयोजित कई कार्यक्रमों में भारत के कई बुदि्धजीवी, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और अलगाववादी नेताओं ने भी हिस्सा लिया. इस बीच, कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने फई की गिरफ्तारी की आलोचना की है और इसे भारत की कूटनीतिक साजिश करार दिया है. गिलानी ने कहा, फई पिछले 32 वर्षों से कश्मीरी लोगों के पलायन का मुद्दा उठा रहे थे. कश्मीर के लिए निर्भीक समर्थन की वजह से वह भारत की आंखों की किरकिरी बन गए थे. जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने भी फाई की गिरफ्तारी की आलोचना की है. उसने कहा है कि फई की गिरफ्तारी अहिंसा के लोकतांत्रिक रास्ते के खिलाफ है.


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