बेचैन आत्मा की तरह भटक रहे हैं युसूफ अंसारी

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: हर महीने बनाते-बदलते हैं नया प्लान : करने से पहले जोर-शोर से करते हैं ऐलान : जी न्यूज से युसूफ अंसारी को अलग क्या होना पड़ा, उनकी गाड़ी बेचैन आत्मा की माफिक भटक रही है. हर महीने एक नई घोषणा युसूफ अंसारी की तरफ से की जाती है. जी न्यूज के बाद युसूफ अंसारी चैनल वन के साथ जुड़े. फिर महुआ के साथ. फिर उसके बाद कहां कहां क्या क्या करते रहे, यह ठीक ठीक किसी को याद नहीं.

पर पिछले एक महीने में युसूफ अंसारी की तरफ से दो प्रेस रिलीज जारी की गईं. एक में उन्होंने कहा है कि वे दो चार महीने में एक नया चैनल लांच करने वाले हैं. चैनल के लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया चल रही है. और अब ताजी प्रेस विज्ञप्ति जो युसूफ अंसारी की तरफ से जारी कराई गई है उसमें उन्होंने घोषणा की है कि वे लखनऊ में पीस पार्टी में शामिल हो चुके हैं.

युसूफ अंसारी क्या क्या करेंगे, और जो उनकी घोषणाएं हैं, कितनी खरी व सही हैं, यह तो वक्त बताएगा, पर इतना तय है कि युसूफ अंसारी प्रयोग जारी रखने के मूड में हैं और हर काम वह जोरशोर से हल्लाबोल अंदाज में कर रहे हैं. प्रेस विज्ञप्तियों में युसूफ अंसारी की महानता की कहानी विस्तार से वर्णित है. लीजिए, युसूफ की तरफ से जारी की गईं महीने भर की दो प्रेस विज्ञप्तियों को वाचन करिए...

यूसुफ़ अंसारी पीस पार्टी में शामिल

देश के जाने माने वरिष्ठ टीवी पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विशलेषक यूसुफ़ अंसारी आज पीस पार्टी मे शामिल हो गए। लखनउ स्थिति पीस पार्टी के दफ्तर में आज उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मोहम्मद अय्यूब की मौजूदगी में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। यूसुफ़ सारी को पीस पार्टी मे राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। उन्हे मीडिया एंव पब्लिसिटी विभाग को साथ प्लानिंग और को-ओर्डिनेशन विभाग का ज़िमम् सौंपा गया है। यूसुफ़ अंसारी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी होंगे। उन्हें पार्टी के संसदीय बोर्ट के साथ राजनीतिक मामलो की समिति की भी सदस्य बनाया गया है।

पार्टी में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय में हुई प्रेस वार्ता में यूसुफ़ अंसारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश मे पार्टी को सत्ता में लाना उनका एक मात्र मक़सद है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश मे अगली सरकार पीस पार्टी की ही बनेगी। प्रदेश की जनता ने आज़ादी के बाद तमाम पार्टियों की सरकारों को आज़मा लिया है। कोई भी सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। लंबे समय तक कांग्रेस के कुशासन के बाद जनता ने सपा, बसपा का भी कुशासन झेला है। अब जनता पीस पार्टीको एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है और उससे बेहतर प्रशासन की उम्मीद कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पीस पार्टी जनता की इस उम्मीद पर खरी उतरेगी।

यूसुफ़ अंसारी का पीस पार्टी में शामिल होना अप्रत्याशित नहीं है। यूसुफ़ अंसारी की शुरू से ही राजनीकि महत्वाकांक्षा  रहीं हैं। उन्होंने कभी इस सच्चाई को छुपा. भी नहीं।  पिछले महीने पीस पार्टी के अध्यक्ष डा. अय्यूब अंसारी पर जानलेवा हमले के बाद यूसुफ़ अंसारी डा. अय्यूब का हाल-चाल जानने के लिए बड़हलगंज (गोरखपुर) उनके निवास पर गए थे। क़रीब तीन घंटे की इस मुलाक़ात में दोनों के बीच देश के सियासी हालात, मुसलमानों का समस्याओं और उनके हल के साथ दलित मुसलमानों को दलित श्रेणी में आरक्षण जैसे तमाम मुद्दों पर बातचीत हुई। बताया जाता है कि इसी मुलाक़ात में पीस पार्टी के मुखिया डा. अय्यूब ने यूसुफ अंसारी को पार्टी में शामिल होने का न्यौता दिया था। इस पर यूसुफ़ अंसारी ने विचार करके जवाब देन की बात कह थी।

यूसुफ़ अंसारी के बडहलगंज से लौटने के बाद से ही उनके पीस पार्टी में शामिल हो कर कोई बड़ी ज़िम्मेदारी संभालने के क़यास लगाए जा रहे थे। इन दिनों पीस पार्टी के बड़े नेताओं के साथ उनकी कई मुलाक़ाते भी हुई। यूसुफ अंसारी पिछले एक दशक से पसमांदा आदोलन से जुड़े हुए हैं। मीडिया में रहते हुए भी वो पसमांदा मुसलमानों के हक़ की बात ज़ोर शोर से उठाते रहे रहैं। पिछले कई साल से वो पसमांदा फ्रंट नाम से सामाजिक संगठन भी चला रहे हैं। पसमांदा फ़्रटं के ज़रिए उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में “पंसमाद जगाओ अभियान” भी चलाया हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वो पसमांदा मुसलमानों की आजवाज़ बन चुके हैं। पिछले साल यूसुफ़ अंसारी ने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंप्लाइज़ एसोसिएशन “आईबेफ़ ” के साथ मिल कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में “पिछड़ा-पिछड़ा एक समान, हिंदू या मुसलमान” नारे के साथ हिदूं-मुस्लिम पिछड़ों को एक मंच पर लाने की मुहिम भी शुरू की। पिछले साल नवंबर में मेरठ में पहला अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग सम्मेलन किया गया । इस सिलसिले का पांचवा सम्मेलन 17 जुलाई को बिजनौर में हुआ।

क़रीब पांच साल पहले पसमांदा  मुसलमानों से संबधित पूछे गए उनके एक सवाल पर दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुख़ारी भड़क गए थे और उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर प्रधानमंत्री निवास पर ही यूसुफ़ पर हमला कर दिया था। ये मामला कई दिन मीडिया में छाया रहा था। देश भर मे यूसुफ़ सारी के हक़ में और इमाम बुखारी कि खिलाफ़ धरना प्रदर्शन हुआ। बाद मे शाही इमाम ने पत्रकारों से माफी मांग कर अपनी जान छुड़ाई थी।

यूसुफ अंसारी पीस पार्टी के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद हो सकते है। पीस पार्टी की पकड़ अभी सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना वजूद बनाने के लिए अभी वो संघर्ष कर रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 ज़िलों में मुस्लिम आबादी 20 से 50 फ़ीसदी तक है। इस इलाक़े में पसमांदा मुसलमानों की आबादी कुल मुस्लिम आबादी का 80 फ़ीसदी है। पसंमादा बिरादरियों में अपनी लीडरशिप खड़ी करने की बेचैनी उन्हें यूसुफ़ अंसारी के नेतृत्व मे पीस पार्टी से जोड़ सकती है। पशचिमी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी अंसारी बिरादरी का वोट का झुकाव पीस पार्टी की तरफ़ हो सकता है। क़ुरैशी, मंसूरी, सलमानी, क़सग़र, क़स्सार, अब्बासी, राइन जैसी बाक़ी पसमांदा बिरादरियों के मुसलमान भी साथ आ सकते हैं। यूसुफ़ अंसारी पीस पार्टी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली (एनसीआर) में खेवनहार साबित हो सकते है।

यूसुफ अंसारी की गिनती देश के चुनिंदा बड़े पत्रकारों  में होती है। वो पिछले ढेड़ दशक से ज्यादा समय से राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता से जुड़े हुए है। यूसुफ़ अंसारी ने करीब 12 साल जी न्यूज़ में एक बड़े राजनैतिक पत्रकार की हैसियत से काम किया है। उसके बाद वो चैनल वन न्यूज़ में मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं। चैनल वन से नाता तोड़ने के बाद उन्होंने हाल ही में सलाम इंडिया नाम से इंटरनेट चैनल शुरु किया है। देश की सियासत की नब्ज़ पर यूसुफ़ अंसारी की उनकी ज़बर्दस्त पकड़ है। अपने पत्रकारीय जीवन में मे उन्होने कई बड़ी राजनीतक ख़बरे ब्रेक की हैं। उन्होंने कशमीर से कर्नाटक तक चुनावी कवरेज किया है लिहाज़ वो देश सके अलग-अलग हिस्सोंके स्यासी मिज़ाज को बखूबी समझते हैं। पत्रकारीय कैरियकर के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और कई पार्टियों के बड़े नेताओं के साथ देश-विदेश के बहुत से दौरे भी किये हैं। यूसुफ अंसारी ने इराक़ और अफगानिस्तान में अपनी जान जोखिम में डाल कर अमेरिकी हमलों की कवरेज़ भी की है। यूसुफ़ अंसारी ने भारतीय टीवी चैनलों पर आतंकवादियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ लाइव दिखान की परंपरा शुरु की। 2002 में कश्मीर चुनाव में पुलिस के सुरक्षा बलों के साथ आतंकवादियों की मुठभभेड़ को उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर लगातार 4 घंटे लाइव दिखाया था।

यूसुफ अंसारी ने पत्रकारिता के साथ-साथ ग़रीब पिछड़े लोगो की आवाज़ उठाने में भी आगे रहे हैं। मीडिया मे रहते हुए देश के कमज़ोर तबक़े, दलित पिछड़े वर्गों और पसमांदा मुसलमानों की आवाज़ उठाने के लिए इसी साल उन्हें बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्म दिन के मौक़े पर मुंबई में अम्बेडकर सम्मान से नवाज़ा गया। इससे पहले उन्हें पत्रकारिता में राष्ट्रीय एकता पुरुस्कार और राजीव गांधी एक्सिलेंस एवार्ड समेत देश विदेश में दो दर्ज़न से ज़्याद एवार्ड मिल चुके हैं। कांग्रेस के साथ तमाम पार्टियों के नेताओं के साथ यूसुफ अंसारी के बहुत घनिष्ट संबध हैं। इन संबंधों का फ़ायदा भी पीस पार्टी को मिल सकता है।

नया चैनल लाने वाले हैं युसूफ अंसारी

जाने माने वरिष्ठ टीवी पत्रकार  और लेखक यूसुफ़ अंसारी जल्द ही एक न्यूज़ चैनल लाने की तैयारी कर रहे हैं। चैनल अभी लाइंसेस की प्रक्रिया से गुज़र रहा है। अगले दो-तीन महीने में इसे लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इस न्यूज़ चैनल के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ऑन एअर हो जाएगा। शुरु में ये चैनल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में दिखेगा। यूपी और उत्तराखंड के चुनाव के बाद इसे राष्ट्रीय चैनल के रूप में तब्दील किए जाने की योजना है। खबरों के मुताबिक न्यूज़ चैनल के अलावा उनकी एक पाक्षिक पत्रिका और हिंदी व उर्दू के दैनिक अखबार लाने की भी योजना है जिसकी तैयारी शुरु हो चुकी है।

यूपी में ज़िला बिजनौर के रहने वाले यूसुफ़ अंसारी टीवी पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना चेहरा है। ज़ी न्यूज़ में एक दशक की लंबी पारी खेलने और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद उन्होंने एक नवोदित नैशनल न्यूज चैनल, चैनल वन में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कमान संभाली और चैनल को एक नई पहचान दिलाई। लेकिन क़रीब छह महीने पहले उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से चैनल वन से नाता तोड़ लिय़ा था। देश की राजनीतिक नब्ज़ पर उनकी ज़बरदस्त पकड़ और सत्ता के गलियारों में गहरी पैठ है।

यूसुफ़ ने देश भर में चुनावी कवरेज के साथ ही कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की प्रमाणिक रिपोर्टिंग की है। उन्होंने इराक़ पर अमेरिकी हमले की क़रीब महीने भर तक टर्की और इराक़ से कवरेज की। संसद पर आतंकवादी हमले की रिपोर्टिंग के साथ ही देश मे हुई तमाम बड़ी राजनीतिक घटनाओं की कवरेज भी उन्होंने बखूबी की है। यूसुफ़ अंसारी ने हाल ही में सलाम इंडिया न्यूज़ मीडियी प्रा. लि. नाम से कंपनी बनाई है और www.salaamindialive.tv नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरु किया है। अभी वो इसके विस्तार में जुटे हुए हैं। उन्हें बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड और राष्ट्रीय एकता पुरुस्कार के साथ ही देश विदेश मे दो दर्ज़न से ज़्यादा अवार्ड मिल चुके हैं।


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