'भ्रष्टाचारी' कृपाशंकर पर कांग्रेस की कृपा कब तक?

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मुंबई : बांबे हाईकोर्ट की जज रंजना देसाई और आरवी मोरे की टिप्पणी- ''इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जो भारी भरकम रिपोर्ट सबमिट की है, और एंटी करप्शन ब्यूरो की जो रिपोर्ट है, उनसे रिस्पांडेंट नंबर 9 (कृपाशंकर सिंह) को भ्रष्टाचार के आरोपों से क्लीन चिट नहीं मिल सकती. प्रवर्तन निदेशालय व आयकर विभाग की रिपोर्टों को पढ़ने से पता चलता है कि कृपा को बेटे और बेटी की शादी के दौरान बहुत सारा पैसा गिफ्ट के रूप में मिला.''

दूसरी टिप्पणी याचिकाकर्ता संजय तिवारी की- ''वर्ष 2009 के मार्च और नवंबर महीनों के बीच कुल करीब 60 करोड़ रुपये कृपाशंकर सिंह की पत्नी और उनके बेटे के बैंक एकाउंट में जमा कराए गए. कृपा की पत्नी के पास एक निजी सिक्योरिटी फर्म के साथ साझेदारी में 258 एकड़ कृषि भूमि रत्नागिरी में है जिसकी कीमत 25 करोड़ रुपये के आसपास है. ये जमीन तब खरीदे गए जब कृपा शंकर राज्य के गृहमंत्री थे और उन्होंने इस निजी सिक्योरिटी फर्म को करीब 104 हथियारों के लाइसेंस मंजूर किये थे जिसके एवज में उस फर्म ने जमीन इनकी पत्नी के नाम से खरीदकर गिफ्ट कर दी.''

मतलब साफ है. इन दिनों जिस तरह कांग्रेस और कांग्रेसी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं, उसमें कृपाशंकर सिंह पर इतने गंभीर आरोप लगना बताता है कि ऐसे ही कांग्रेसी अगर कांग्रेस में बड़े पदों पर मौजूद रहे तो एक दिन कांग्रेस का बाजा बजना तय है. खासकर तब जब मुंबई कांग्रेस प्रमुख कृपाशंकर सिंह पर करप्शन के लगे चार्जेज के मामले में बंबई हाईकोर्ट ने जांच करने की मंजूरी दे दी है. बंबई हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय, आय कर और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को कहा है कि वह कृपा पर आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा करने के मामले की जांच करें. न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आरवी मोरे ने कहा कि कृपाशंकर सिंह के खिलाफ जनहित याचिका स्वीकार की जा सकती है. न्याशाधीशों ने जनहित याचिका की सुनवाई चार हफ्ते बाद करने का निर्देश देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों (प्रवर्तन निदेशालय, आय कर और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) को अपना काम करने दिया जाए.

इससे पहले जांच एजेंसियों ने जांच कार्य में हुई प्रगति के बारे में एक सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. न्यायाधीशों ने रिपोर्ट पर गौर करने के बाद एजेंसियों से जांच जारी रखने को कहा है. सात जुलाई को पीठ ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जनहित याचिका पर गौर किए जाने को लेकर अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया था. जहां मुंबई कांग्रेस प्रमुख ने तर्क दिया कि जनहित याचिका को भाजपा के इशारे पर राजनीतिक उद्देश्य से दायर किया गया है, ताकि उनकी और उनके परिवार की छवि खराब हो, वहीं याचिकाकर्ता संजय तिवारी ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के आरोपों से इंकार किया था.

जनहित याचिका में अदालत से आग्रह किया गया था कि वह कृपाशंकर और उनके परिजनों द्वारा अर्जित आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा करने संबंधी आरोपों की जांच के लिए सरकार को निष्पक्ष लोगों का एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दे. जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि कृपाशंकर के नजदीकी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा करोड़ों रुपये के हवाला घोटाला मामले में फिलहाल जेल में हैं. दोनों के बीच काफी नजदीकी थी और दोनों के बीच धन का भारी मात्रा में लेन-देन होता था.

गुरूदास कामत की मंत्रिमंडल से छुट्टी के बाद राहत की सांस ले रहे कृपाशंकर सिंह अपने उपर करप्शन के गंभीर चार्जेज और कोर्ट द्वारा जांच के आदेश के बाद से फिर विवादों में आ गए हैं. मुंबई हाईकोर्ट का साफतौर पर कहना है कि कृपा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से संबंधित जो जनहित याचिका दायर हुई है उसे खारिज नहीं किया जा सकता और केस में इतने पर्याप्त सबूत मौजूद हैं कि आगे सुनवाई जारी रहेगी. मुंबई हाईकोर्ट की रंजना देसाई और रणजीत मोरे की खंडपीठ ने केस पर सुनवाई करते हुए कहा कि "कृपाशंकर वरिष्ठ नेता हैं और वे महाराष्ट्र में वरिष्ठ मंत्री के पद पर काम कर चुके हैं. उनके खिलाफ जो आरोप लगाये हैं वे उनकी आय से संबंधित हैं. अभी तक आयकर विभाग ने और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जो जांच की है उसमें उसने कृपाशंकर को क्लीन चिट नहीं दी है."

इसके बाद अदालत ने कहा कि कृपाशंकर सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता और केस चलता रहेगा. अदालत के इस फैसले के बाद जहां महाराष्ट्र की राजनीति में कृपाशंकर सिंह के खिलाफ माहौल बनाने में उनके विरोधियों को मदद मिलेगी वहीं खुद कृपाशंकर सिंह के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है. मूलत: उत्तर प्रदेश के निवासी कृपाशंकर सिंह, उनकी पत्नी, उनके बेटे और बहू के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला चल रहा है.

याचिकाकर्ता संजय तिवारी ने जो साक्ष्य अदालत को मुहैया कराये गये हैं उसमें बताया गया है कि मार्च 2009 से नवंबर 2009 के बीच कृपाशंकर की पत्नी मालती देवी के खाते में 3.40 करोड़, कृपाशंकर के बेटे के खाते में दो साल के भीतर करीब 60 करोड़ रूपये और उनकी बहू अंकिता सिंह के खाते में एक साल के भीतर पौने दो करोड़ रूपये जमा कराये गये हैं. इसके अलावा याचिकाकर्ता का आरोप है कि कृपाशंकर सिंह के संबंधियों के नाम पर भारी संपत्तियां बनायी गयी हैं जिसमें विले पार्ले पूर्व में ढाई करोड़ का फ्लैट, पनवेल में एक करोड़ कीमत की दुकान, रत्नागिरी में 25 करोड़ के कीमत का आम का बाग, बांद्रा पश्चिम में करीब 40 करोड़ रूपये कीमत का बंगला और करीब 48 करोड़ की कीमत वाला एक ट्रिप्पेक्स फ्लैट शमिल है. कृपाशंकर सिंह के बेटे के नाम बांद्रा कुर्ला काम्पेल्क्स में 22,500 फुट का एक कामर्शियल स्पेश भी है जिसकी कीमत करीब 112 करोड़ रूपये है. इसके अलावा कृपाशंकर सिंह के बेटे नरेन्द्र सिंह के नाम पर बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स में 36 करोड़ कीमत वाली एक अन्य प्रापर्टी के साथ साथ बांद्रा दांडा में 959 स्कायर यार्ड जमीन भी है जिसकी बाजार में कीमत करीब 38 करोड़ रूपया है.

इस बीच, महाराष्ट्र में कांग्रेस का हाल बेहाल होने का क्रम जारी है और माना जा रहा है कि कृपा का पत्ता कटेगा.  मिलिंद देवड़ा, गुरुदास कामत, कृपाशंकर सिंह जैसे लोग संगठन को मजबूत करने की बजाय एक-दूसरे की पोल खोलने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. दक्षिण मुंबई के कांग्रेस सांसद मिलिंद देवड़ा की ताजपोशी और केंद्रीय राज्यमंत्री गुरुदास कामत के इस्तीफे से मुंबई कांग्रेस में खींचतान बढ़ गई है. मिलिंद देवड़ा को केंद्र सरकार में सूचना व प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री बनाए जाने के साथ ही मुंबई कांग्रेस के समीकरण बदल गए हैं. मिलिंद की ताजपोशी से देवड़ा खेमा जहां एक बार फिर प्रभावशाली बन कर उभरा है, वहीं गुरुदास कामत को कम प्रभावशाली पेयजल एवं स्वच्छता (स्वतंत्र प्रभार) विभाग दिए जाने से उनके समर्थकों में नाराजगी थी, जिसके बाद कामत ने इस्तीफा देकर पार्टी के लिए काम करने की घोषणा की है.

कामत का विभाग बदलना और मिलिंद की ताजपोशी करने का सीधा संबंध मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से जोड़ा जा रहा है. केंद्रीय राज्यमंत्री बनने से पहले कामत अच्छे ढंग से इस पद को संभाल चुके हैं, परंतु 2012 में होने वाले मुंबई महानगरपालिका चुनाव के मद्देनजर हाल के दिनों में कामत, देवड़ा और कृपाशंकर सिंह समर्थकों में जिस तरह की खींचतान शुरू हुई है, उससे कहीं न कहीं कांग्रेस की छवि खराब हो रही थी. मुरली देवड़ा के मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह का क्या होगा? यह सवाल सभी कांग्रेसियों की जुबान पर है.

राजनीतिक गलियारे में जारी अटकलों पर यदि विश्वास किया जाए तो कांग्रेस हाईकमान कृपाशंकर सिंह को मुंबई मनपा चुनाव तक अध्यक्ष बनाए रखने के मूड में है. परंतु देवड़ा को यदि कांग्रेस का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो कामत और कृपाशंकर गुट के विवाद को खत्म करने के लिए उन्हें भी अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. वैसे मोहन प्रकाश ने जब से महाराष्ट्र कांग्रेस का प्रभारी पद संभाला है, तब से संगठन के मामलों में जिस ढंग के चौकाने वाले फैसले हो रहे हैं, उसके मद्देनजर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष या फिर कृपाशंकर सिंह के राजनीतिक भविष्य के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना राजनीतिक हलकों में जल्दबाजी माना जा रहा है. हालांकि अब जबकि कोर्ट के आदेश के बाद कृपा शंकर सिंह भ्रष्टाचार के मामले में बुरी तरह घिर चुके हैं, यह माना जा रहा है कि जल्द ही उनकी राजनीतिक मौत होने वाली है क्योंकि उन पर कांग्रेस देर तक कृपा नहीं करने वाली. कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस में कृपा से पल्ला झाड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई है.


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