''आनंद प्रधान के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिल रहा है''

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: आईआईएमसी ने सभी शिकायतकर्ताओं का फेसबुक अकाउंट ब्लाक किया : पिछले दिनों आईआईएमसी में दाखिले में हुई धांधली को लेकर हुए पर्दाफाश के बाद जिस कम्युनिटी पर छात्रों का जुटान शुरू हुआ था और कई चौंकाने वाले सुबूत धीरे धीरे सामने आ रहे थे, उस कम्युनिटी को कुछ लोगों के लिए ब्लॉक कर दिया गया है. बेशक, आईआईएमसी प्रशासन ने डर कर ही यह कायरतापूर्ण कार्रवाई की है.

गौरतलब है कि दाखिले में धांधली की खबर के बाद प्रवेश परीक्षा में अनुत्तीर्ण कई विद्यार्थियों ने आरटीआई का इस्तेमाल कर अपनी कापी की छायाप्रति लेने की मांग की है जिससे आईआईएमसी प्रशासन घबराया हुआ है. हिंदी पत्रकारिता के गत सत्र के छात्र को आनंद प्रधान पहले ही पैरवी से आने की बात बीच कक्षा में कह चुके हैं. इससे आनंद प्रधान के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिल रहा है.

फेसबुक पर ठोस सबूतों को सार्वजनिक करते हुए एक छात्र ने सत्र 2011-12 के क्रमांक JA 10081 की जांच की मांग की तो हंगामा मच गया और देखते देखते आईआईएमसी प्रशासन के खिलाफ लोगों ने एक से एक साक्ष्य सार्वजनिक करना शुरू कर दिया. पिछली बार अनुत्तीर्ण रही दीपाली ने मुझे फोन कर बताया कि उन्हें उस कम्युनिटी पर ब्लोक कर दिया गया है. दीपाली के अलावा भी कई पीड़ितों को ब्लाक कर दिया गया है ताकि सच्चाई दब जाय. गोया आंख बंद करने से शेर नहीं आयेगा!!! आप सबसे आग्रह है कि परदा फाड़ने में मदद करें.

Anoop Aakash Verma : ise hi kam shabdo me besharmi kahate hai...... mujhe to un logo par bhi sharm aa rahi hai jo hamaare param mitr hone ka dava karate hai... magr yahaan is masale par mook badhir bane huye hai.... jaan padataa hai ki IIMC prashasan ne unhe aajeevan ki naukari de di hai.....shame...

Yogesh Kumar Sheetal : आइये मिलजुल कर इस परदे को उठाते हैं. अन्दर एक मूर्ति है जो दरक चुकी है बस टूटना बाकी है.

Neeraj Bhai Patel : jaroor YKS maine to khud pichle satra main rti dalkar is dhong se parda hataya tha...

Yogesh Kumar Sheetal : Neeraj Bhai Patel, शुक्रिया भाई, टूट रही मूर्ति में ढेला मारने के लिए... अब अगर ये मूर्ति बच भी गई तो अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा. इसे अब तोड़ना ही होगा.

उपरोक्त बातें-कमेंट-पोस्ट को फेसबुक से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है. इसे फेसबुक पर देखने के लिए क्लिक करें- योगेश कुमार शीतल का फेसबुकी नोट

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योगेश कुमार शीतल की वॉल और नोट से... कुछ और स्टेटस अपडेट व टिप्पणियां

''आईआईएमसी में केम्पस प्लेसमेंट का पूरा गणित आनंद प्रधान देखते हैं. ऐसे में जाहिर है कि उनके आशीर्वाद से कमा खा रहा कोई भी छात्र उनके खिलाफ नहीं बोलेगा. कई ऐसे छात्र मुझसे संपर्क में हैं जिन्होंने गोपनीयता की शर्त पर ये दर्द बयां किया है, लेकिन राजा को नंगा कहने के लिए इस डर से पार पाना पड़ेगा कि राजा हमपर तलवार चला सकता है. सच ये है कि आईआईएमसी को एक पालतू संस्थान बना दिया गया है. कथादेश के मीडिया विशेषांक (दिलीप मंडल के सम्पादन में) में भी इस बात का जिक्र है. मैं कुछ और सबूत इकट्ठा कर रहा हूं. फिलहाल ये देखिये. क्या किसी को मात्र इसलिए सब कुछ करने की छूट दे देनी चाहिए क्योंकि वह स्वघोषित वामपंथी हो, और काफी अच्छी बातें करता हो?''

''दाखिले में भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद आईआईएमसी ने अपने कम्युनिटी में सबसे पहले शिकायतकर्ताओं को ही ब्लाक कर दिया और फिर उनमें आपस में फूट डालने की कोशिश की. पक्की खबर है कि कुछ लड़कों को खुद आनंद प्रधान ने कल मिलने के लिए बुलाया है जिसके बाद इस आशंका को बल मिला है कि आनंद प्रधान सब कुछ जानकार भी चुप हैं. अच्छी खबर ये है कि कई आरटीआई डालने के बाद अब कैंपस प्लेसमेंट का मोहमाया त्याग कर कई नए और पुराने छात्रों ने भी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है. नीरज पटेल ने कुछ साक्ष्य रखे हैं.''

Anoop Aakash Verma : shukriyaa neeraj bhai...

Deepali Pandey : mein aap sab ki baat sey sehmat hoo or kayi log peechey hat gaye vajah chaye kuch bhi 100 % sabboot rakhney ka dawa rakhney valey siddhant ab khood peechey hat gaye hein ................jinhoney khood iss andolan ki shuruaat ki thi .............kher RTI ka intazaar kariye saboot ikattha kariye tabhi hum kuch kar saktey hein

Yogesh Kumar Sheetal : दिन भर बोरा भर भर के मेल आ रहे हैं..जो लोग पीछे हट रहे हैं उनकी जरुर कोई मज़बूरी रही होगी. सबूत की चिंता आप न करें. सब कुछ समय पे होगा. मै अपने ऊपर पैरवी से दाखिले के दाग को छुड़ाने के लिए जेल भी जाने के लिए तैयार हूँ और किसी आपराधिक वारदात के लिए भी. मै अकेले ये काम करने में सक्षम हूं. आपलोगों में जो पीछे हटना चाहता है ख़ुशी ख़ुशी हट जाय.


 

: आईआईएमसी में झोल से पर्दा उठना शुरू हो गया है : जब आप सच होते हैं तो आपके अन्दर अपने आप आत्मविश्वास आ जाता है और आप लाख आलोचनाओं के बाद भी शांत रहते हैं और समय की प्रतीक्षा करते हैं कि सामने वाला भी उस सच को जान ले. आईआईएमसी ने बरखा प्रकरण के बाद मुझे न केवल नोटिस थमाया बल्कि खुद आनंद प्रधान ने कक्षा में कहा कि मेरा दाखिला यहां पैरवी से हुआ है. प्रधान सर के चरित्र को मैं तब और बेहतर जान सका जब राष्ट्रमंडल खेल के दौरान एमपीसी में आपत्तिजनक स्थिति में पुलिस के हत्थे चढ़े आईआईएमसी के तीन विद्यार्थियों पर लिखी गई एक खबर को प्रधान सर ने दबा दिया, तब जबकि मैंने उनमें आईआईएमसी के निदेशक सुनीत टंडन का साक्षात्कार भी शामिल किया था. प्रधान सर ने क्लास रूम में मुझे अकेले बुलाया और कमरा अन्दर से बंद कर जम कर झाड़ लगाई. उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि मैंने किसकी अनुमति से निदेशक का साक्षात्कार लिया! इसी तरह बरखा प्रकरण में जब रात को मैंने उन्हें फोन पर सूचना दी कि बरखा या उसके लोग मेरे साथ कुछ गलत कर सकते हैं तो उन्हें बजाय मेरी चिंता के, उल्टा मुझे ही दोषी ठहरा दिया कि मैंने बरखा का उस तरीके से विरोध करके गलत किया. भला हो दिलीप मंडल का जिन्होंने मेरी पूरी बात सुनी और मुझे उनमें उम्मीद भी दिखी. ये भी सच है कि मैं प्रधान सर को कुछ बताना ही नहीं चाहता था क्यूंकि मुझे पता था कि वो बोलने में माहिर हैं और उनके एनडीटीवी से नजदीकी सम्बन्ध हैं. बावजूद दिलीप सर के कहने पर मैंने उन्हें सूचित किया था. इसके अलावे मैंने केम्पस प्लेसमेंट में छात्रों को कम पैसे दिए जाने कि बात जब भड़ास के मंच से उठाई तो प्रधान सर ने मुझे कक्षा में इतना अपमानित किया कि मैं फिर कक्षा में चुप-चुप रहने लगा. अब जबकि आईआईएमसी में चल रहे गोरखधंधे से पर्दा उठना शुरू हुआ है तो अनूप जी की बात को आगे बढाते हुए मैं आग्रह करता हूं कि सत्र २०१०-११ के क्रमांक jc 30050 की भी जांच की जाय और यह सार्वजनिक किया जाय कि क्या मेरा दाखिला यहां पैरवी से हुआ है? अगर इसके कोई प्रमाण मिलते हैं तो मै हमेशा के लिए न केवल पत्रकारिता से संन्यास ले लूँगा बल्कि आईआईएमसी के दीक्षांत समारोह में भी उपस्थित नहीं हूंगा. मैं अपने फेसबुक मित्र अनूप जी के इस बात का समर्थन करता हूं कि सत्र २०११-१२ के क्रमांक JA 10081 की जाँच की जाय, आईआईएमसी को बदनाम करने वाले किसी भी शख्स पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह खुद विभागाध्यक्ष ही क्यों न हों.

Anoop Aakash Verma : खबरों को दबाना भी सिखाते हैं आईआईएमसी के प्राध्यापक आनंद प्रधान जी.....

Yogesh Kumar Sheetal : आप सत्र 2010 -11 के किसी भी छात्र से पूछ लीजिये लाख आपसी मनमुटाव के बाद भी कोई मेरे खिलाफ इतना बड़ा झूठ नहीं बोलेगा.

Anoop Aakash Verma : mai to khule aam kah rahaa hu....IIMC 2011-12 ke roll no. JA10081 ki janch ho......

Yogesh Kumar Sheetal : साथ साथ सत्र 2010 -11 के क्रमांक JC 30050 की भी जांच हो और आई आई एम सी प्रशासन यह स्पष्ट करे कि क्या मेरा दाखिला यहाँ किसी के आशीर्वाद से हुआ है या मेरी प्रतिभा से!!!

Anoop Aakash Verma : are wah!khuli chunauti.....

Anurag Kumar : Don't worry! Tweet this!

Yogesh Kumar Sheetal : दरअसल मै इस मामले को तूल देना नहीं चाह रहा हूं लेकिन जिस तरह आई आई एम सी लगातार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है ऐसे में मेरा चुप रहना न केवल कायरता हैं बल्कि दोषियों को उत्साहित करने वाला कदम भी है

साभार : योगेश कुमार शीतल का फेसबुकी नोट


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