महिला सब एडिटर ने चीफ सब की फोन पर ऐसी की तैसी की

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अमर उजाला, लखनऊ एक बार फिर चर्चा में है. पहले भी कई मामलों को लेकर खबरों में रहने वाला यह यूनिट एक बार फिर आपसी टकराव से दो चार है. पहले खबरें आईं कि मामला छेड़छाड़ से जुड़ा हुआ है, परन्‍तु दोनों पक्षों ने इस खबर को अफवाह बताया. दोनों लोगों ने कहा कि यह टकराव कामकाज को लेकर था ना कि किसी तरह की अश्‍लील हरकत अथवा शब्‍दावली कहने का.

अमर उजाला के लखनऊ ऑफिस का माहौल अक्‍सर तनाव में रहता है, ऐसे ही माहौल में कल एक महिला सब एडिटर सुषमा पाठक ने रविवार की शाम चीफ सब एडिटर फोन पर ही ऐसी की तैसी कर दी. उस समय चीफ सब एडिटर देवेश त्रिपाठी कार्यालय में मौजूद नहीं थे जबकि महिला सब एडिटर कार्यालय में थीं. कुछ जगहों पर यह खबर आई कि फोन पर अश्‍लील भाषा का प्रयोग करने पर सुषमा तिवारी भड़की, परन्‍तु बाद में दोनों पक्षों ने स्‍पष्‍ट किया कि यह इस तरह का मामला नहीं बल्कि काम को लेकर हुई नोंकझोंक थी.

इस संदर्भ में पूछे जाने पर सुषमा पाठक ने कहा कि यह कोई छेड़छाड़ का मामला नहीं था बल्कि खबरों को लेकर मेरा उनसे टकराव हो गया था. मुझे उनकी बात करने की शैली पसंद नहीं थी, वो रुडली बात करते हैं. इसी बीच कुछ इस तरह की बात हो गई कि मेरा उनसे फोन पर झगड़ा हो गया. यह काम को लेकर हुआ झगड़ा था ना कि किसी छेड़छाड़ जैसे मामले को लेकर. कार्यालयों में यह काम के दौरान होता रहता है. इस मामले को कुछ लोगों ने बिना वजह तूल दे दिया है.

दूसरी तरफ जब इस संदर्भ में देवेश त्रिपाठी से बात की गई तो उन्‍होंने छेड़छाड़ जैसी किसी घटना को बिल्‍कुल अफवाह बताया. उन्‍होंने कहा कि जब मैं मौक पर मौजूद ही नहीं था तो छेड़छाड़ कैसे किया जा सकता है. यह काम को लेकर हुआ नोंकझोक था. कभी कभी होता है कि हमारी बात किसी को अच्‍छी नहीं लगती है. यह कार्यालय के लोगों के बीच का मामला है और काम के दौरान कई बार इस तरह की स्थितियां जाने अनजाने आ जाती हैं, जब हमारा व्‍यवहार किसी को तकलीफ पहुंचा देता है. इससे ज्‍यादा कोई बात नहीं है.


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