अन्‍ना के समर्थन में देहरादून के पत्रकार सड़क पर उतरे

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: राष्‍ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा : दिल्‍ली पुलिस द्वारा अन्‍ना को गिरफ्तार किए जाने के विरोध में देहरादून के पत्रकारों ने जुलूस निकाला तथा जिलाधिकारी के माध्‍यम से राष्‍ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भेजा. इस दौरान दर्जनों पत्रकारों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के रवैये की निंदा की तथा अन्‍ना एवं उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक बताया.

राष्‍ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने बताया कि विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है. इसका हनन नहीं किया जाना चाहिए. लोकतंत्र में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की आजादी है. पत्रकारों ने राष्‍ट्रपति से तत्‍काल हस्‍तक्षेप करते हुए अन्‍ना हजारे के मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.

जुलूस तथा ज्ञापन देने वालों में वरिष्‍ठ पत्रकार बसंत निगम, अनिल राणा, मनोज कंडवाल, रॉबिन सिंह, रमन नेगी, मोहम्‍मद रजा, अतुल चौहान, प्रदीप थलवाल, शक्ति सिंह, मयूर, धनंजय भारती, सौरभ भाटिया, कैलाश बिष्ट, राकेश खण्डूडी, दिनेश रतूडी, संजीव, पंकज, परमजीत, भावना, दिव्या, सबीहा, अजय राणा, संदीप, मुजम्मिल, विक्रम, बलवीर समेत कई अन्‍य लोग भी शामिल रहे.

नीचे पत्रकारों द्वारा राष्‍ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन.


 

प्रतिष्ठा में

महामहिम राष्ट्रपति महोदय

भारत गणराज्य

नई दिल्ली

माध्यम से- जिलाधिकारी, देहरादून,उत्तराखंड

महामहिम महोदया

हम उत्तराखंड के तमाम युवा पत्रकार आपका ध्यान निम्नलिखित बिदुंओं पर आकर्षित करते हुए, आपसे उक्त बिदुंओं पर भारतीय गणराज्य के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते विनम्रता से विचार करने का अनुरोध करते हैं-

1- आपके संज्ञान में प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे एवं सरकार के बीच चल रहे मतभेदों व जनभावनाओं की सूचना भी होगी।

2- सवाल अन्ना के बिल या संसदीय परंपराओं के टकराव पर बहस का भी नहीं हैं।

3- सवाल हैं कि जिस तरह से आज श्री अन्ना हजारे एंव उनकी टीम को शांतिपूर्ण अनशन करने से रोका गया, उसे हम संविधान द्वारा प्रदत्त विरोध के अधिकार, प्रदर्शन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का हनन मानते हैं।

4- सरकार द्वारा जिस तरह से श्री अन्ना हजारे के संवैधानिक अधिकारों का हनन कानून की धाराओं के माध्यम से किया गया, यह भी हम अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।

5- संविधान में निहित अपने अधिकारों के शांतिपूर्ण प्रयोग में अगर श्री अन्ना हजारे के साथ देश के लाखों लोग जुड़ते हैं तो ये देश की जनता का संवैधानिक अधिकार हैं।

महामहिम महोदया, हम लोग स्वयं लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ अर्थात मीडिया में कार्य करने वाले पत्रकार हैं। हमें यह महसूस हो रहा हैं कि सरकार के खिलाफ जब भी कोई व्यक्ति अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करता हैं, और उसे देश की अपार जनता का समर्थन मिलता हैं, तो सरकार विभिन्न कानूनों का सहारा लेकर उस अभिव्यक्ति की स्वंतनत्रता के मौलिक अधिकारों एंव विरोध प्रदर्शन के संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन करती हैं, जैसे कि श्री अन्ना हजारे के साथ हुआ।

महामहिम हम उत्तराखंड के युवा पत्रकार देश की संसदीय व्यवस्था में सरकार द्वारा संवैधानिक अधिकारों के हनन पर चिन्तित हैं, और आपसे इस मामले में तुरन्त हस्तक्षेप करने का विनम्र आग्रह करते हैं, ताकि भारतीय गणराज्य के संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा हो सके।

जयहिन्द

साभिवादन

उत्तराखंड के प्रबुद्व युवा पत्रकार


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