आरबीआई कर रहा है सहारा के भ्रमित करने वाले देनदारी की जांच

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: विज्ञापन देकर बताई गई थी 73000 करोड़ की देनदारी : सहारा इंडिया की पैरा बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईएफसीएल) को बैंकिंग लाइसेंस शायद ही मिल पाए। रिजर्व बैंक की तरफ से नए बैंकों के लिए गाइडलाइंस जारी होने के बाद कंपनी ने भले ही समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर निवेशकों के 73,000 करोड़ रुपये चुकाने की घोषणा की हो, इसके बावजूद रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने कहा है कि सहारा को लाइसेंस मिलना बहुत मुश्किल है।

उक्त अधिकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस में कई शर्तें ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना सहारा समूह के लिए मुश्किल होगा। इस संवाददाता ने इस बारे में सहारा के प्रवक्ता अभिजीत सरकार से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ना तो फोन उठाया और ना ही एसएमएस का जवाब दिया। रिजर्व बैंक के उक्त अधिकारी ने बताया कि सहारा का विज्ञापन काफी भ्रमित करनेवाला है। इस विज्ञापन की हम जांच कर रहे हैं और देख रहे हैं किस तरह 73,000 करोड़ रुपये की देनदारियां बताई गई हैं। अभी तक हमारी जानकारी में यह देनदारी महज 5,000 करोड़ रुपये है, लेकिन 73,000 करोड़ रुपये की देनदारी कहां से आई, हम इसकी जांच कर रहे हैं।

कंपनी ने अपने विज्ञापन में कहा है कि दिसंबर 2011 तक वह जमाकर्ताओं के कुल 73,000 करोड़ रुपये दे देगी, जो उसे रिजर्व बैंक ने 2015 तक देने को कहा था। इसके बाद उसके ऊपर एक पैसे की भी देनदारी नहीं बचेगी। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस में योग्य एनबीएफसी को बैंकिंग लाइसेंस देने की बात कही गई है, हालांकि सहारा इंडिया फाइनेंशियल रेसिडुअल नॉन-बैंकिंग कंपनी (आरएनबीसी) की श्रेणी में आती है। उक्त अधिकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस में कई ऐसी शर्तें हैं जो बैंकिंग लाइसेंस पाने में कंपनी की राह में बाधक बन सकती हैं।

गाइडलाइंस के मुताबिक अगर किसी प्रमोटर ग्रुप की आमदनी का प्रमुख हिस्सा रियल्टी से आता है तो वह लाइसेंस का हकदार नहीं होगा। लेकिन सहारा समूह की तीन इकाइयां रियल्टी में हैं। इसके अलावा दस साल का सफल बिजनेस ट्रैक रिकॉर्ड भी उसके लिए बाधक बन सकता है। गाइडलाइंस में सेबी, सीबीआई, आयकर विभाग से फीडबैक लेने की बात कही गई है और सहारा के खिलाफ सेबी में भी मामला है। इसी साल जून में सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के खिलाफ आदेश में 66 लाख निवेशकों को ब्याज समेत उनका धन लौटाने को कहा था। सेबी ने मुंबई में की गई तहकीकात का उदाहरण देते हुए कंपनी के नियमन पर भी सवाल उठाए थे। साभार : भास्‍कर


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