श्रम न्‍यायालय ने दैनिक जागरण के विरुद्ध अदालती कार्रवाई शुरू की

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भागलपुर। बिहार के भागलपुर मुख्यालय स्थित श्रम न्यायालय में पीठासीन पदाधिकारी न्यायाधीश अशोक कुमार पांडेय के समक्ष मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड के विरुद्ध रेफरेन्स केस नं0-06।2008 में 02 सितम्बर को विधिवत अदालती सुनवाई शुरू हो गई। बिहार सरकार की ओर से मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में वादी पक्ष मुंगेर के कामगार व अधिवक्ता बिपिन कुमार मंडल हैं।

02 सितंबर को कामगार बिपिन कुमार मंडल ने न्यायाधीश के समक्ष कामगार की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत करने की इजाजत देने की प्रार्थना की और शिकायत की कि प्रबंधन पक्ष ने इस मुकदमे में लंबे समय से लिखित वक्तव्य (रिटन स्टेटमंट) नहीं जमा किया है और मुकदमा को टालने की कोशिश में लगा है। न्यायाधीश ने सुनवाई के उपरांत कामगार बिपिन कुमार मंडल को आगामी 26 सितंबर, 2011, दिन सोमवार को गवाहों की सूची देने और गवाहों की गवाही शुरू करने का लिखित आदेश पारित कर दिया।

न्यायाधीश ने प्रबंधन को रिटन स्टेटमेंट दाखिल करनेके अधिकार से वंचित किया : न्यायाधीश ने 02 सितंबरको अपने आदेश में मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड को प्रबंधनकी ओर से लिखित वक्तव्य (रिटन स्टेटमेंट) दाखिल करने के अधिकार से वंचितकर दिया यह कहाकर की कि प्रबंधन को पर्याप्त समय डब्लूएस दाखिल करनेको दिया गया था। परन्तु, प्रबंधन ने रिटन-स्टेटमंट दाखिल नहीं किया।

बिपिन का मामला क्या है? : श्रम न्यायालय में कामगार बिपिन कुमार मंडल, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, ने न्यायाधीश के समक्ष रिटन स्टेटमंट दाखिल कर लिखा है कि दैनिक जागरण (भागलपुर संस्करण) के कार्यकारी संपादक शैलेन्द्र दीक्षित के मौखिक आदेश से वे 25 मई 2003 से मुंगेर मुख्यालय से दैनिक जागरण के संवाददाता के रूप में जुड़े। अधिवक्ता होने के कारण संपादक ने उन्हें दैनिक जागरण के लिए मुंगेर से विधि संवाददाता के रूप में काम करने का निर्देश दिया। उनके समाचार विधि संवाददाता संवाद-कोड से छपने लगे। कार्यावधि में कामगार ने संपादक महोदय से सम्पर्ककर नियुक्ति-पत्र और वेतन के भुगतान की मांग शुरू कर दी। परन्तु संपादक महोदय ने न तो नियुक्ति-पत्र दिया और न ही वेतन शुरू किया। मुंगेर कार्यालय के तात्कालीन ब्यूरो चीफ मो. शमशाद आलम ने संपादक से पैरवी के लिए दस हजार रुपये की मांग की। जब कमगार ने दस हजार रुपया का भुगतान नहीं किया, तो उन्हें मौखिक आदेश से काम से हटा दिया गया। 01 मार्च, 2004 से कामगार का समाचार दैनिक जागरण में छपना बंद हो गया। इस प्रकार वेतन और नियुक्ति पत्र की मांग करने पर कामगार को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।

न्यायालय को क्या निर्णय करना है? : श्रम न्यायालय को निर्णय करना है -‘क्या दैनिक जागरण के एक्टिंग एडिटर द्वारा बिपिन कुमार मंडल, कामगार की सेवा समाप्ति न्यायोचित है? अगर नहीं, तो वे (कामगार) किस सहाय्य के हकदार हैं?

मुंगेर से श्रीकृष्‍ण प्रसाद की रिपोर्ट.


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