सीएम के हस्‍तक्षेप के बाद पत्रकार को फंसाने की साजिश नाकाम

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: हिंदुस्‍तान के भ्रष्‍टाचार से लड़ना पड़ा महंगा : भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग का एलान करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचारियों से लड़ने वाले पत्रकारों की रक्षा किस प्रकार करते हैं, मुंगेर के वरीय पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद के साथ घटित घटना के दस्तावेज स्वतः खुलासा करते हैं। पुलिस दस्तावेज यह भी उजागर करता है कि बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ काफी मजबूत हो चुकी है और इस जड़ को काटने का प्रयास करने वाले लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ सकती है।

जिन्दगी बरबाद होना तो मामूली बात है क्योंकि भ्रष्टाचार में कई शक्तिशाली मीडिया हाउस और राज्य के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के शीर्षस्थ पदाधिकारीगण शामिल हैं। पुलिस दस्तावेज यह भी उजागर करता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को कमजोर करने में मीडिया हाउस और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के वरीय पदाधिकारियों की गठजोड़ लगी है। जरूरत है कि मुख्यमंत्री निगरानी विभाग की विशेष टीम गठित कर अरबों रुपयों के विज्ञापन घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करावें और घोटाले को उजागर करने वाले पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद के विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज करने की घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरूद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करें।

पुलिस दस्तावेज क्या कहते हैं?: पुलिस उपाधीक्षक सह लोक सूचना पदाधिकारी, मुख्यालय मुंगेर ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पत्रांक -124, सूचना दिनांक 28-07-2008 के जरिए मुंगेर के पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद को सूचित किया है कि -‘‘मुंगेर के कासिम बाजार थाना की कांड संख्या- 71/08 में अनुसंधान, गवाहों के बयान, घटनास्थल का निरीक्षण और पर्यवेक्षण में यह पाया गया है कि प्राथमिकी में जहां पर घटनास्थल बताया गया है, वहां पर किसी प्रकार की घटना घटित होने की बात साक्षियों के द्वारा नहीं बताया गया है। साक्षियों ने यह भी बताया है कि सोनी देवी, पति कामो राउत, साकीन- बेटवन बाजार, अड़गड़ रोड, मुंगेर नाम की कोई महिला घटनास्थल वाले मोहल्ले में नहीं रहती है। अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी ने अनुसंधान के क्रम में वादिनी (सूचक) सोनी देवी, पति कामो राउत की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी साजिश के तहत गलत नाम-पता बताकर नामजद अभियुक्त श्रीकृष्ण प्रसाद (पत्रकार) को बदनाम करने और फंसाने की नीयत से यह कांड दर्ज कराया है। पुलिस इस कांड में भारतीय दंड संहिता की धारा 448, 323, 504, 354, 341 के अन्तर्गत घटना को असत्य पाती है और अंतिम प्रतिवेदन सरासर झूठ समर्पित करती है।‘‘

पुलिस ने जब अंतिम प्रतिवेदन सरासर झूठ न्यायालय में समर्पित कर दिया, तो मुंगेर के 50 वर्षीय पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद और उनके परिवार को नई जिन्दगी मिली। मुंगेर शहर के कासिम बाजार थानान्तर्गत बेटवन बाजार, अड़गड़ा रोड निवासी श्रीमती सोनी देवी, पति कामो राउत ने कासिम बाजार थाना के थाना-प्रभारी सुबोध तिवारी के समक्ष 16 मई 2008 को सुबह 9 बजकर 15 मिनट में मुंगेर के वरीय पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद के विरुद्ध लिखित प्राथमिकी दर्ज की और आरोप लगाया कि ‘‘15 मई 2008 की शाम एक आदमी मेरे घर आया और बोला कि मेरा पखाना और नाला साफ कराना है, कितना लोगी? और बोला कि टेलीविजन पर समाचार दिखाता हूं। टीवी का बहुत बड़ा पत्रकार हूं। मेरे ही इशारे पर टीवी फोटो दिखाता है। पुलिस मेरी मुट्ठी में रहती है। पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है। मेरा नाम श्रीकृष्ण प्रसाद है। अखबार में भी हम समाचार लिखते हैं। मैंने कहा- भैया, 150 रुपया दे दीजिएगा। बस, वह मेरा बाल पकड़ कर दो-तीन चांटा मारा और गंदा-गंदा गाली देने लगा और बोला कि हरमजादी, डोम, मेहतर इतना कहने के बावजूद भी नहीं सुनी कि हम कौन आदमी हैं। मैं रोने लगी। इतने में वह मेरी छाती पकड़ लिया और बोला कि 3 नं0 गुमटी पर मेरा घर है। तब हम चिल्लाने लगी और अगल-बगल के आदमी जमा हो गए। तो वह भाग गया। श्रीमान से प्रार्थना करती हूं कि मुझ हरिजन पर हुए बर्ताव पर उचित फैसला करें।‘‘

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मुंगेर के पत्रकारों में हलचल मच गई। दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक प्रभात खबर ने एकजुट होकर षड़यंत्र के तहत सोनी देवी की प्राथमिकी से संबंधित खबर छापी। परन्तु जब पुलिस ने अनुसंधान में घटना को असत्य पाया, तो तीनों अखबारों ने घटना के असत्य होने की खबर को नहीं छापा। इस घटना से तीनों अखबारों के सामूहिक षड़यंत्र की बू आती है।

आखिर श्रीकृष्ण प्रसाद के विरुद्ध इतना गहरा षड़यंत्र क्यों हुआ? : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेजे पत्र में पीड़ित पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद, जो मुंगेर से दूरदर्शन, आकाशवाणी और यूएनआई के लिए काम करते आ रहे हैं, ने बताया कि चूंकि उन्हों ने दैनिक हिन्दुस्तान के बिना निबंधन के अखबार भागलपुर से छापने और लगभग एक करोड़ रुपये के सरकारी विज्ञापन प्रकाशन मद में घोटाला से संबंधित कार्रवाई की सूचना सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना से मांगी थी, तो निदेशालय और दैनिक हिन्दुस्तान प्रकशित करनेवाली कंपनी मेसर्स एसटी मीडिया लिमिटेड ने मिलीभगत कर थाना-प्रभारी को धन से प्रभावित कर काल्पनिक घटना की प्राथमिकी पुलिस थाना में दर्ज करायी और सरकरी विज्ञापन घोटाला को उजागर करने वाले पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद को जेल की हवा खिलाने और जिन्दगी बरबाद करने का गहरा षड़यंत्र किया।

मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को समझा और पत्रकर श्रीकृष्ण प्रसाद की जिन्दगी बचा ली, परन्तु इस षड़यंत्र में शामिल लोगों के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से पत्रकारों में निराशा है। श्रीकृष्ण प्रसाद अब पुनः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार के नए चर्चित पुलिस महानिदेशक अभयानन्द को पत्र लिखे जा रहे हैं। श्रीप्रसाद स्वर्ग लोक से आई सोनी देवी के बयान पर वरीय पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद के विरुद्ध काल्पनिक घटना की प्राथमिकी दर्ज करनेवाले थाना प्रभारी सुबोध तिवारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। साथ ही श्री प्रसाद इस षड़यंत्र में शामिल मीडिया हाउस और सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के वरीय पदाधिकरियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री दोषियों के विरुद्ध कब तक ठोस कानूनी कार्रवाई कर पाते हैं?

काशी प्रसाद

मुंगेर


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