हिंदी की दुर्दशा से आहत आनंद प्रकाश कल लगा लेंगे फांसी!

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आज हमारे देश में हिंदी भाषा को पहला दर्जा मिला हुआ है और किसी भी दफ्तर में किसी भी प्रकार का काम करने के लिए हिंदी का प्रयोग करना अनिवार्य किया गया है, परन्तु इन सब के बावजूद भी हिंदी की दुर्दशा आज इतनी हो गई है की हरियाणा के किसी भी दफ्तर में व किसी भी वाहन पर नेम प्लेट अंग्रेजी में ही मिलेगी. सरकारी कामकाज व चिट्ठी-पत्र आदि अंग्रेजी में ही लिखे जा रहे हैं, वही जिला प्रशासन के सभी अधिकारी अपने दफ्तर के बाहर अपनी नेम प्लेट हिंदी में न लिखवा कर अंग्रेजी में ही लिखवा रहे है.

जिस से हिंदी को पहला दर्जा न होकर तीसरे दर्जे में प्रयोग किया जा रहा है. करनाल के एक पत्रिका 'वतन के सिपाही' के सम्पादक आनंद प्रकाश शर्मा इस लड़ाई को लगभग 16 साल से लड़ते आ रहे हैं और उन्हों ने प्रधानमन्त्री से लेकर मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा तक को पत्र लिखा हैं कि हिंदी का सम्मान किया जाये और हरियाणा में हर दफ्तर के बाहर व वाहनों पर हिंदी भाषा का प्रयोग अनिवार्य किया जाये, परन्तु सरकार की ढीले रवैये के कारण आज हिंदी की दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पत्र के द्वारा आनंद शर्मा को आश्वासन भी दिया था कि हिंदी के प्रयोग की बात सभी दफ्तरों में कहा जायेगा, परन्तु उन के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गई. आज यह सम्पादक अपनी हिंदी भाषा की दुर्दशा पर फांसी लगाने को बेबस है और इस बात से खफा होकर इस सम्पादक ने अपनी पत्रिका व अख़बार में एलान कर दिया है कि वह 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के दिन अपने आप को फांसी लगा लेगा, जिस की सारी जिम्‍मेदारी हरियाणा सरकार व मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा की होगी.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.


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