अब विज्ञापन से चांदी कूटेंगे टीवी चैनल और अखबार

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नई दिल्ली। महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद कंपनियों ने हार नहीं मानी है और आगामी त्योहारी मौसम में अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। इस दौरान कंपनियों के विज्ञापन खर्च में 60 फीसद तक वृद्धि होने की उम्मीद है। ब्रांड संवर्धन, नई रियायतों की घोषणा और बढ़-चढ़कर प्रचार अभियान चलाकर कंपनियां इस त्योहारी मौसम में अपनी बिक्री बढ़ाने की तैयारी में हैं। भारतीय कंपनियों के सालाना विज्ञापन खर्च में 40 से 45 फीसद खर्च त्योहारी मौसम में ही होता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के अनुसार रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली तेल, साबुन, क्रीम और दंतमंजन कंपनियां ने खासतौर से अपना विज्ञापन खर्च 60 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी की है। इसके बाद टीवी, फ्रि ज, कंप्यूटर तथा दूसरे उपभोक्ता इलेक्ट्रोनिक सामान बनाने वाली कंपनियां दौड़ में हैं। रीयल एस्टेट कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। कर्ज महंगा होने के बावजूद उन्हें त्योहारी मौसम में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। सोने-चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं लेकिन रत्न एवं आभूषण और लक्जरी उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी ग्राहकों को रिझाने के नए टिप्स लेकर खरीदारों को रिझाने की तैयारी में हैं।

एसोचैम महासचिव डीएस रावत के अनुसार आटोमोबाइल, कपड़े, रत्न एवं आभूषण, लक्जरी उत्पाद और इलेक्ट्रोनिक सामान बनाने वाली कंपनियों को बिक्री कारोबार में 30 से 40 फीसद वृद्धि की उम्मीद है। एसोचैम ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणो और चंडीगढ़ में 150 कंपनियों से जुलाई और अगस्त के दौरान बातचीत की। इलेक्ट्रोनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियां टेलीविजन पर विज्ञापन देने के मामले में सबसे आगे हैं। खुदरा उत्पाद, कार, मोटरसाइकिल और सेलुलर फोन कंपनियां भी पिछले साल के मुकाबले इस बार विज्ञापन पर पांच फीसद अधिक खर्च करेंगी। वीडियोकान, व्हर्लपूल, एलजी, ब्रिटानिया और सैमसंग कुछ नाम हैं जो कि विज्ञापन पर भारी खर्च करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए विज्ञापन खर्च में औसतन 30 से 35 फीसद सालाना वृद्धि हो रही है। ग्राहकों की इच्छा को वास्तविक खर्च में बदलने के लिए विज्ञापन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। कुछ मामलों में तो ये गतिविधियां मौजूदा आर्थिक सुस्ती के शुरू होने से पहले की स्थिति तक पहुंच गई हैं। कंपनियों के विपणन प्रमुखों के अनुसार टीवी और पत्र-पत्रिकाओं के जरिए विज्ञापन खर्च पिछले साल के मुकाबले 45 फीसद तक बढ़ेगा। तेल, साबुन और टूथपेस्ट कंपनियों के विज्ञापन टेलिविजन चैनलों पर छाए हैं तो पत्र पत्रिकाओं में मिलाजुला रुख है। इनमें आटो, मोबाइल, उपभोक्ता सामाना, रीएल एस्टेट कंपनियों की योजनाएं प्रमुख हैं। एसोचैम के अनुसार अगली दो तिमाहियों में भी कंपनियों के विज्ञापन खर्च में वृद्धि की उम्मीद है। साभार : सहारा


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