चंडीगढ़ नगर निगम ने माना की प्रेस क्‍लब की जमीन लीज पर नहीं है

E-mail Print PDF

पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम और प्रेस क्लब को जवाब तलब किया है. प्रशासन पर मिलीभगत और प्रेस क्लब पर बिना किसी लीज़ या अनुमति के करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगाया गया है. याचिका पत्रकार और क्लब के सदस्य संजीव पांडे ने दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि अदालत तक वे एक लम्बी जद्दोजहद के बाद आए हैं. उनका आरोप है कि चंडीगढ़ प्रेस क्लब के पास कोई लीज़ या अनुमति नहीं है. सूचना के अधिकार के तहद प्रशासन से ये जानकारी पाने में ही उन्हें मुद्दत लग गई. प्रेस क्लब और सभी सम्बंधित सरकारी विभाग लीज़ की जानकारी देने के मामले में टालमटोल करते रहे. प्रशासन मामले को नगर निगम और नगर निगम एस्टेट आफिस के मत्थे मढ़ता रहा. आखिरकार केन्द्रीय सूचना आयोग के दखल के बाद उन्हें जानकारी मिल पाई. जानकारी ये मिली कि चंडीगढ़ प्रेस क्लब को ये ज़मीन कभी लीज़ पर दी ही नहीं गई.

याचिका के मुताबिक़ चंडीगढ़ प्रेस क्लब का पंजीकरण कोई 33 साल पहले सेक्टर 23 में स्थित एक घर के पते पर कराया गया गया था. लेकिन क्लब 27 सेक्टर में करोड़ों रुपये मूल्य की तीन एकड़ ज़मीन पर काबिज़ है. रजिस्टर्ड आफिस के रूप में कोई ठोस पता क्लब के लैटर हेड या वेबसाईट पर आज भी नहीं है. सरकारी रिकार्ड के मुताबिक़ ज़मीन दरअसल कम्युनिटी सेंटर की है, जिस पर प्रेस क्लब काबिज़ है और वहां किचन है, बार है, स्विमिंग पूल है, तमाम तरह की व्यापारिक गतिविधियां हैं. आरोप है कि ये सब प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा है. ये भी आरोप है कि इस जगह का उपयोग आम बाशिंदों की बजाय कुछ ख़ास लोगों के लिए हो रहा है.

श्री पांडे का आरोप है कि किसी भी लीज़ के अभाव में चंडीगढ़ प्रेस क्लब करोड़ों रुपये कीमत की इस ज़मीन पर काबिज़ है तो वो अतिक्रमण है. और वो खुद प्रशासन को किसी लीज़ की जानकारी नहीं होने के बावजूद है तो ये मिलीभगत का सबूत भी. याचिका में कहा गया है कि कभी कोई कार्रवाई मीडिया, नौकरशाहों और नेताओं की मिलीभगत की वजह से नहीं की गई. न्यायमूर्ति एस.के.मित्तल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है.


AddThis