मनचलों ने मीडियावालों पर धावा बोला

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रांची में लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है, वो भी तब जब छेड़छाड़ की वारदात बढ़ने के बाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। लेकिन अभी तक इस बात की ओर किसी का ध्यान नहीं गया है कि किस तरह से रांची में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए लड़कियों के हॉस्टल अब लैला मजनुओं के अड्डे बन रहे हैं। रांची के दो पुराने सरकारी हॉस्टल आदिवासी छात्रावास और वीमेंस कॉलेज के छात्रावासों को ही ले लें।

ये दोनों छात्रावास अलग-अलग जगह हैं। लेकिन यहां का बाउंड्रीवाल इस कदर टूटा हुआ है कि दिन हो या रात कोई भी बेरोक टोक आ जा सकता है। छेड़छाड़ के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान अभी तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है। जब इस खबर की तहकीकात करने कुछ टीवी चैनल के लोग वहां पहुंचे तो मीडियाकर्मी लड़के-लड़कियों की आपत्तिजनक स्थिति देखकर अचंभित थे। मीडियाकर्मियों ने वहां पर कई और आपत्तिजनक चीजें कवर कीं।

इस तरह जायजा लेना मजनुओं को रास नहीं आया। पोल खुलने के डर से मनचलों ने मीडियावालों पर धावा बोल दिया। कई लोगों के एक साथ हमला करने से दोनों मीडियाकर्मी बुरी तरह घायल हो गए। फोन करने पर कुछ देर में पुलिसवाले भी पहुंचे। लेकिन तब कोई कागजी कार्रवाई नहीं हुई न ही मनचलों के धरपकड़ के लिए पुलिस ने कोई तत्‍परता दिखाई। पुलिस ने दोनों मीडियाकर्मियों को बुलवाया और मामला दर्ज कराया, लेकिन बात अभी भी वहीं है कि क्या रांची में रहने वाले हॉस्टल की लड़कियां सुरक्षित हैं?

रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट.


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